UP के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह नहीं रहे, छाई शोक की लहर, 3 दिन का राजकीय शोक घोष‍ित

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह kalyan singh अब हमारे बीच नहीं रहे. लंबी बीमारी के बाद लखनऊ में उनका निधन हो गया है. कुछ दिनों से कल्याण सिंह kalyan singh की तबीयत नाजुक बनी हुई थी.

former cm kalyan singh passed away in lucknow
former cm kalyan singh passed away in lucknow

4 जुलाई से थे भर्ती-

चार जुलाई को संजय गांधी पीजीआइ के क्रिटिकल केयर मेडिसिन की आइसीयू में गंभीर अवस्था में भर्ती किया गया था. लंबी बीमारी और शरीर के कई अंगों के धीरे-धीरे फेल होने के कारण शनिवार रात 9:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. कल्याण सिंह kalyan singh के निधन से शोक की लहर छा गई है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें महान इंसान बताते हुए दुख जताया है. वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘मैंने अपना बड़ा भाई और साथी खोया है.

तीन दिन का राजकीय शोक घोष‍ित

सीएम योगी आदित्यनाथ ने पूर्व मुख्‍यमंत्री कल्‍याण स‍िंंह kalyan singh के न‍िधन पर शोक जताते हुए उत्तर प्रदेश में तीन दिन का राजकीय शोक घोष‍ित क‍िया है. सुबह 11.30 बजे कैबिनेट की बैठक में शोक प्रस्ताव पारित किया जाएगा. शोक प्रस्ताव के बाद कल्याण सि‍ंह के पार्थिव देह को विधान भवन और फिर बीजेपी प्रदेश मुख्यालय में दर्शनों के लिए रखा जायेगा. यहां श्रद्धांजलि के बाद दोपहर दो बजे शव को अलीगढ़ ले जाया जाएगा. वहां भी देह को जनता के दर्शनों के लिए रखा जाएगा.

गंगा के किनारे होगा अंतिम संस्कार

सोमवार को नरोरा में गंगा के किनारे अंतिम संस्कार होगा. अंत्येष्टि वाले दिन सरकार ने सार्वजनिक अवकाश की भी घोषणा की है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुःख जताते हुए कहा कि भारत के सांस्कृतिक उत्थान में योगदान के लिए आने वाली पीढ़ियां हमेशा कल्‍याण सिंह की आभारी रहेंगी. मैं उनके निधन से निशब्द हूं. कल्याण सिंह…राजनेता, वरिष्ठ प्रशासक, जमीनी नेता और बहुत अच्छे इंसान थे. उत्तर प्रदेश के विकास में वो अमिट छाप छोड़ गए हैं.

आगरा से था गहरा लगाव

पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह kalyan singh को आगरा से गहरा लगाव था. उन्हें यहां के कार्यकर्ताओं का नाम और उनके मोहल्लों के नाम जुबानी याद थे. वो जब आगरा पहुंचते थे तो कार्यकर्ताओं के साथ स्कूटर पर बैठकर शहर घूमते थे. आगरा की जलेबी और बेडई का नाश्ता उन्हें बेहद पसंद था. जब भी वो आते तो यहां का नाश्ता जरूर करते थे.

कल्याण के दम पर बनी बीजेपी सरकार

यूपी की राजनीति में उन्हें एक ऐसी तारीख माना जाता है जिसे मिटाया जा सकना संभव नहीं है. ये उनकी ही मेहनत और लगन थी कि बीजेपी ने एक साल के अंदर ही 1991 में अपने दम पर उत्तर प्रदेश में सरकार बना ली थी. कल्याण सिंह kalyan singh उत्तर प्रदेश में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बने थे. राम मंदिर आंदोलन के नायकों में से एक कल्याण सिंह का जन्म 6 जनवरी, 1932 को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में हुआ था. उनके पिता का नाम तेजपाल लोधी और माता का नाम सीता देवी था. कल्याण सिंह ने दो बार उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री पद संभाला था. अतरौली विधानसभा से जीतने के साथ ही वो बुलंदशहर और एटा से लोकसभा सदस्य भी रहे थे. वे राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल भी रहे थे.

कल्याण सिंह कब क्या बने-

  • 1967 : पहली बार विधायक
  • 1969 : दूसरी बार विधायक
  • 1974 : तीसरी बार विधायक -आपातकाल के दौरान मीसा के अंतर्गत कारावास में 25 जून 1975 से दिसंबर-जनवरी 1977 तक 
  • 1977 : चौथी बार विधायक, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री बने
  • 1985 : पांचवी बार विधायक, उत्तर प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष बने
  • 1989 : छठवीं बार विधायक, नेता विधायक दल बीजेपी
  • 1991 : सातवीं बार विधयाक, मुख्यमंत्री बने – 24 अगस्त से 6 दिसंबर 1992 तक
  • 1993 : आठवीं बार विधायक, नेता विधायक दल, बीजेपी
  • 1996 : नौवीं बार विधायक, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, नेता विधायक दल एवं मुख्यमंत्री
  • 2000-2001 : राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय क्रांति पार्टी
  • 2004 : बुलंदशहर संसदीय क्षेत्र से भाजपा सांसद निर्वाचित
  • 2009 : एटा संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सांसद निर्वाचित
  • 2014 : राजस्थान के राज्यपाल नियुक्त

कल्याण सिंह kalyan singh के पहले मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान ही विवादित ढांचा ध्वंस की घटना घटी थी. अयोध्या में विवादित ढांचा के विध्वंस के बाद उन्होंने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए छह दिसंबर, 1992 को मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था. उनके जीवन में कई ऐसे मुकाम आए जिसे लेकर वो हमेशा याद किए जाएंगे.

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