पंचतत्व में विलीन हुईं शीला दीक्षित, राजकीय सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का निगमबोध घाट पर राजकीय सम्मान के साथ रविवार दोपहर 3 बजे अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान कांग्रेस के कई बड़े नेता के साथ गृहमंत्री अमित शाह भी निगमबोध घाट पर पहुंचे है.

former chief minister sheila dixit last rites in delhi
former chief minister sheila dixit last rites in delhi

इससे पहले उनकी पार्थिव देह कांग्रेस मुख्यालय में अंतिम दर्शन के लिए रखी गई थी. जहां सभी नेता, अभिनेता और दिग्गजों ने अंतिम दर्शन किये. यूपीए चेयरपर्सन सोनिया और प्रियंका गांधी ने अंतिम दर्शन किए. सोनिया गांधी ने कहा कि शीला दीक्षित एक नेता से ज्यादा दोस्त थीं. शीला से कई यादें जुड़ी हैं. उनके जाने की बहुत कमी खलेगी. उनके बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अंतिम दर्शन किए.

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इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शनिवार देर शाम पूर्वी निजामुद्दीन स्थित दीक्षित के आवास पर पहुंच कर उन्हें श्रद्धांजलि दी. इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज समेत कई नेता उनके अंतिम दर्शन के लिए पहुंचे. उधर, केजरीवाल सरकार ने दिल्ली में दो दिन के राजकीय शोक का ऐलान किया है.

बतादें कि शीला दीक्षित का 81 वर्ष की उम्र में शनिवार दोपहर को निधन हो गया था. सेहत खराब होने के बाद उन्हें एस्‍कॉर्ट अस्‍पताल में भर्ती कराया गया था. वो पिछले कुछ दिनों से बीमार चल रही थीं. पेसमेकर के ठीक से काम न करने पर शनिवार सुबह दिल्ली के एस्कॉर्ट अस्पताल में भर्ती कराया गया था. उन्हें आईसीयू में रखा गया था. मगर उन्हें बचाया न जा सका.

शीला दीक्षित 15 साल 1998 से 2013 तक दिल्ली की मुख्यमंत्री थीं. वर्तमान समय में दिल्ली कांग्रेस की अध्यक्ष थीं. लोकसभा चुनाव के दौरान उन्हें दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाया गया था. वे इस साल उत्‍तर-पूर्व दिल्‍ली से लोकसभा चुनाव लड़ीं थीं. मगर उन्हें बीजेपी के मनोज तिवारी के सामने हार का सामना करना पड़ा था. शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च, 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था.

शीला दीक्षित ने पहली बार 1984 में कन्नौज सीट से चुनाव लड़ा था. तब से शीला 1984 से 1989 तक कन्नोज लोकसभा सीट से सांसद रहीं हैं. और 1986–1989 तक वे केंद्रीय मंत्री भी रहीं हैं. शीला दीक्षित को दिल्ली का चेहरा बदलने का श्रेय दिया जाता है. उनके कार्यकाल में दिल्ली में कई विकास कार्य हुए. शीला दीक्षित ने महिलाओं की स्थिति पर संयुक्त राष्ट्र आयोग में 5 साल (1984-1989) तक भारत का प्रतिनिधित्व किया.

उनका विवाह उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी IAS विनोद दीक्षित से हुआ था. विनोद कांग्रेस के बड़े नेता और बंगाल के पूर्व राज्यपाल स्वर्गीय उमाशंकर दीक्षित के बेटे थे. शीलाजी के दो बच्चे हैं. संदीप दीक्षित और बेटी लतिका सैयद. उनके पुत्र संदीप दीक्षित भी सांसद रह चुके हैं.