नोटबंदी (Demonetisation) 100 प्रतिशत फ्लॉप शो था : संपादकीय व्यंग्य

PRAGYA KA PANNA
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6 साल पहले जब नोटबंदी(Demonetisation) की गई थी..तो इतने फायदे गिनाए गए थे..जितने कोरोना काल में गौमूत्र और गोबर के भी नहीं गिनाए गए होंगे..हमारे यहां का जालिम लोशन भी इतनी तेजी से खुजली पर असर नहीं करता जितनी तेजी से नोटबंदी के असर के बारे में बताया गया था..गोदी मीडिया की एंकर एंकराएं..नोटबंदी के बाद सुहावने सावन में तैर रहे थे..कुछ चिप लगा रहे थे..कुछ नैनो टेक्नॉलिजी..बता रहे थे..कुछ आतंकवाद की कमर तोड़ रहे थे..कुछ नोटबंदी को भ्रष्टाचार नाशक बूटी बता रहे थे..कुछ ने नोटबंदी के साथ ही काले धन के खात्मे का ऐलान कर दिया था..

कुछ ने कहा नकली नोट वालों का नेटवर्क खत्म हो गया..तमाम मन गढ़ंत भक्ति रस में डूबे हुए समाचार हवाओं में गूंज रहे थे..लेकिन ठहरिए..नोटबंदी का नतीजा सुनते जाइये…

नोटबंदी (Demonetisation) सरकार का 100 प्रतिशत फ्लॉप शो था..ये मैं नहीं रिजर्व बैंक कहता है.जब 99 प्रतिशत नोट बैंक लौट गए..तो फिर देश में छिपा हुआ काला धन कितना था..सरकार इस पर कुछ नहीं कहती..नोटबंदी के बाद अब आप नोटबंधी का जिक्र हवाहवाई जुमले के तौर ही सुन पाएंगे..वैसे तो सरकार ने नोटबंदी का नाम लेना ही बंद कर दिया हैनोटबंदी से देश को कोई फायदा नहीं हुआ..रियल स्टेट में काम करने वाला कोई भाई या बहन वीडियो देख रहे हैं तो कमेंट में बताईये..आपकी लंका लगाने का सुनियोजित इंतजाम सरकार ने नोटबंदी से कैसे किया..पूरा देश काम धंधा छोड़कर लाइन में लगा था. लोगों को दिन भर लाइन में लगने का दुख नहीं था..क्योंकि उनको लगता था कि उनके बगल वाले मिश्रा जी जितना माल बनाए थे..वो सब नोबंदी में बर्बाद हो गया..अब मिश्रा जी रोड पर पाए जाएंगे..लेकिन ऐसे हुआ कुछ नहीं 99 प्रतिशत नोट बैंक में जमा हो गए

आतंकवाद वैसे ही जारी है..सिविलियन..और सेना दोनों पर आतंकी हमले जारी हैं..नोटबंदी (Demonetisation) से पहले जो बाबू 50 रूपए घूस लेकर काम चला लेता था..नोटबंदी के बाद उसकी डिमांड 50 से 100 पहुंच गई..एक भी बात झूठ हो तो बताईयेगा..पूरा देश नोटबंदी की मार झेल रहा था लेकिन देश के दो तीन अरबपति मित्रों को कोई फर्क नहीं पड़ा..याद करिए जब देश का हर व्यापारी कराह रहा था..तब जियो अपने शबाब पर था.

आप जिन टीवियों पर समाचार देखते हैं…उन पर नोटबंदी (Demonetisation) को विश्व के सबसे महान नेता द्वारा सबसे महान फैसला बताया जाएगा..अगर आप उनको देखते हैं..तो मेरा वीडियो देखकर आपका मन मुझे गाली बकने का करेगा..लेकिन मुझे गाली बकने से पहले नोटों में चिल लगाने वाली चाटुकारिता याद कीजिएगा और अपना 2 हजार का नोट चेक करिएगा और देखिएगा..कहीं उसमें वाकई चिप फिट तो नहीं है..तो कुल मिलाकर नोटबंदी से सिर्फ एक चीज बदली है..डिजिटल लेनदेन बढ़ा है..

इसके अलाव सुईं की नोक के बराबर भी फायदा नहीं हुआ..जीडीपी जमीन चाट गई..अर्थव्यवस्था..की अर्थी सज गई..इतने खराब हालात पिछले 40 साल में भी नहीं हुआ..कारगिल युद्ध के समय भी नहीं हुए..ना ही आर्थिक मंदी के दौरान हुए..सरकारी उपक्रम बिक रहे हैं..

हवाई अड्डे मित्रों के पास जा रहे हैं..सीमाओं पर चीन आंख दिखा रहा है..पाकिस्तान बाज नहीं आ रहा है..जबकि नोटबंदी (Demonetisation) को सब समस्याओं को हल बताया गया था..मोटी मोटी नोटबंदी ये समझ में आई कि नोटबंदी पूरे देश में 500 और 1000 रूपए की नोट बैंक में जमा कराने का फ्लॉप…पिटा हुआ दो कौड़ी का तलाशी अभियान था..जिसने देश को आर्थिक तौर पर बर्बाद कर दिया.

नोटबंदी (Demonetisation) से बीजेपी को छोड़कर सबको नुकसान हुआ..नोटबंदी के तुरंत बाद यूपी में विधानसभा चुनाव कराए गए..सारा पैसा बैंक में जमाा कराने के बाद नंगे नहाते क्या और निचोड़ते क्या..बीजेपी एकतरफा 325 सीटों के साथ विधानसभा चुनाव जीती..जो लोग कमेंट में ये कहेंगे कि नोटबंदी का चुनाव से क्या मतलब..उनके लिए इतना ही कहूंगी..लल्ला जितना बनते हो उतने हो नहीं..

हैं..भारत में चुनाव कथा के बाद मिलने वाली पंजीरी से नहीं लड़ा जाता..मुझे तो समझ नहीं आता कि जब पूरे देश में सबको अपने धन का हिसाब किताब देना और रखना जरूरी है तो पार्टियों को मिलने वाला चंदे का हिसाब किताब जनता को क्यों नहीं दिखाया जाता.पार्टियों से इनकम टैक्स क्यों नहीं लिया जाता.

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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