अल्ला हु अकबर से डर कैसा..खिसक गई कट्टरपंथियों की जमीन ? : संपादकीय व्यंग्य

PRAGYA KA PANNA
PRAGYA KA PANNA

किसानों (Farmers) ने मंच से अल्ला हु अकबर के नारे लगा दिए तो क्या हो गया..ये नारा देश विरोधी नारा है क्या..या इस नारे को देश की सुप्रीम कोर्ट ने..या फिर सरकार ने या संसद ने या विधानसभा ने या लोकसभा ने बैन कर रखा है क्या..जैसे जय श्री राम है..जय श्री कृष्ण है..जैसे जय माता दी है..वैसे ही तो है अल्ला हु अकबर है..इसमें इतनी मिर्ची लगने जैसी कौन सी चीज है.. अल्ला बड़ा नेक है..या अल्ला नेक है..या अल्ला सुप्रीम है..कह दिया गया तो कौन सी किसानों ने किसी भैंस खोल ली..अगर ये शब्द कह दिया गया कौन सी आफत आ गई..जो कट्टर हैं..जिन्होंने अंधभक्ति का काला चश्मा लगा रखा है उनको अल्ला हु अकबर से इतनी तकलीफ हो गई कि रात भर नींद नहीं आई..

जिनको अल्ला हु अकबर क्रूर शब्द लगता है..वो मेरा ये वीडियो आखिर तक जरूर देखें..क्यों मैं चाहती हूं कि मेरे वीडियो और सही तर्क के लिए देखिए..मैं किसी का अंध समर्थन नहीं करती..खास तौर पर वो नई पीढ़ी जो सोशल मीडिया पर कुछ भी देख पढ़ और सुनकर भ्रम पाल लेती  है वो अभी वीडिय स्किप ना करें..जानकारी ले लें..मेरी बातें तीखी लगेंगी लेकिन सही भी लगेंगी..लोगों के दिमाग में ये भर दिया गया है कि जब भी कोई अल्ला हु अकबर बोल रहा है तो वो आतंकवादी ही है...पर क्या किसी ने ये सोचने की कोशिश की है कि हर रोज़ अज़ान के वक्त भी अल्लाहू अकबर ही बोला जाता है..क्यों बोला जाता है..वैसे तो बद्र की लड़ाई में रसूल ने पहली बार ये शब्द बोला था...ये कब बोला गया और कहां बोला गया इसके पीछे कई थ्योरी हैं, लेकिन सदियों से ये शब्द शांति और आत्मीयता का प्रतीक है..

ये तो उसी तरह है जैसे इसाई Amen कहते हैं या हिंदू राधे-राधे..या हर हर महादेव..अगर कोई हरहर महादेव चिल्लाकर किसी की हत्या कर दे तो उसमें महादेव का नारा दोषी नहीं है..जय श्री राम कहकर कोई लिंचिंग करे तो उसमें प्रभु भगवान श्रीराम के नारे का कोई कसूर नहीं है..वैसे ही अल्ला हु अकबर कहकर कोई दे तो अल्ला हु अकबर कहने वाले सब आतंकी या तालिबानी या जिहादी नहीं हो जाते..अल्ला हु अकबर कहने वाले को गाली देकर आप इस शब्द कि पवित्रता पर उँगली उठाते हैं..मैं हिंदू ब्राह्ममण कुल में पैदा हुई कन्या हूं..मैंरे कुल में सिखाया गया है कि सभी धर्मों का आदर करना चाहिए..

किसानों (Farmers) को अल्ला हु अकबर कहने में कोई दिक्कत नहीं है..ना ही हर हर महादेव कहने में है..हमारे पुराने वाले बीजेपी के रेल मंत्री प्यूष गोयल जी को अल्लाह से कोई तकलीफ नहीं थी..सुनिए..

लेकिन जिस उत्तर प्रदेश में चुनाव ही अल्ला और श्री राम के बीच होना है..काम की जगह धर्म धर्म चिल्ला जाएगा..रमजान और दिवाली में दी गई बिजली के यूनिट गिनाए जाएंगे..जहां शमसान और कब्रिस्तान की दीवारों पर वोटिंग होगी..जहां यूपी की बेहतरी की जगह बुर्खे पर बात होगी वहां आप उम्मीद भी क्या कर सकते हैं..वहां के लोगों के दिमाग में हिंदू मुसलमान ही ठूसा जाएगा..जिस मंच से हर हर महादेव और अल्ला हु अकबर के नारे लगे हों..उस मंच को पहले हिंदू मुस्लिम एकता का प्रतीक वाला मंच माना जाता था..अब अल्ला हु अकबर कहने पर लोग खुलेआम तालिबानी लिख दे रहे हैं..चट पट एफआईआर दर्ज कर लेने वाली कंपनी खामोशी से तमाशा देख रही है…

दोस्तों मैं मुजफ्फरनगर की किसान रैली में पहुंच नहीं पाई..मुझे अफसोस है..लेकिन हिंदू मुसलमान की राजनीति करने वालों को देश के किसानों (Farmers) ने बहुत करारा जवाब दिया है..मंच से अल्ला हु अकबर और हर हर महादेव कहकर मुंह बंद कर दिया है…ये बता दिया हैकि किसानों का धर्म सिर्फ मेहनत है..उसे अल्ला हु अकबर कहने में कोई तकलीफ नहीं है..ना उसको जय श्रीराम कहने में कोई दिक्कत है ना ही जय माता दी कहने में ना ही वाहे गुरू का जयकारा लगाने में कोई दिक्कत है…उनका ईमान ही उनका धर्म है..उनकी मेहनत ही उनकी कास्ट है..

             ये जो धर्म के नाम पर नफरत बोते हैं ये अगली बार कहें कि अल्ला हु अकबर के नारे क्यों लगा दिए..ये अल्ला हु अकबर क्या होता है..क्या भारत को तालिबान बनाना चाहते हो..तो उनसे कहना अल्ला हु अकबर नाम का लब्ज तालिबान ने इजाद नहीं किया था..अल्ला हु अकबर का मतबल है.. अल्लाह बड़ा नेक है..ये थैक्यू कहने जितना सरल है..भ्रम फैलाने वाली फैक्ट्री पर आप ही ताला लगा सकते हैं...नफरती जहर को आप सही ज्ञान से खत्म कर सकते हैं..

               केवल आपको ईद की सेवईं खाने में अबकाई आती होगी..और आप पूरे उत्तर प्रदेश को अपने जैसा नहीं बना सकते..जिनको मैं कह रही हूं उनको समझ में आ रहा है..किसानों ने जिस मुजफ्फरनगर में किसानों का अथाह समंदर इकट्ठा किया था..ये मुजफ्फरनगर वही जगह है जहां पर अखिलेश सरकार में दंगे हुए..पश्चिमी यूपी में हिंदू और मुसलमान के बीच गहरी खाई पैदा हो गई..इसको 2014 में भी सबसे पहले पहचाना था बीजेपी ने..और इसीलिए तब प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी ने अपनी रैलियों की शुरुआत पश्चिमी यूपी से ही की...उस समय आज तक ने छापा था कि मुजफ्फरनगर दंगों के बाद वेस्ट यूपी में  अपने पक्ष में बने माहौल में और गर्मी डालने की तैयारी बीजेपी ने कर ली है. बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी बरेली और मेरठ में रैली करेंगे...

               देखिए दोस्तों बांटों और राज करने वाले अंग्रेजों से जिन लोगों ने शिक्षा पाई है..जिनके वंशजों ने जेल से चिट्ठी लिखलिखकर अंग्रेजों से माफियां मांगी हैं..मांफी मांगकर अपनी सजाएं कम कराईं वो अंग्रेजो से सीखे हुए अपने पुराने फॉर्मूले पर ही चल रहे हैं..यानी बांटो और राज करो..पहले किसानों की यूनियन में फूट डलवाई..अब चाहते हैं कि किसान हिंदू मुसलमान में बंट जाएं..और किसानों की एकता खत्म हो जाए..लेकिन किसानों को मालूम है कि किसान का धर्म सिर्फ मेहनत है..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *