कृषि कानूनों के विरोध में कल ‘भारत बंद’, किसानों को मिला 20 सियासी दलों का समर्थन, इन चीजों पर रहेगी छूट-

नए किसान कानूनों के विरोध में चल रहे आंदोलन का आज 12वां दिन है. अब पूरा विपक्ष खुलकर किसानों के समर्थन में सामने आ चुका है. विपक्षी दलों ने किसानों की ओर से बुलाए गए भारत बंद के समर्थन में एक जॉइंट स्टेटमेंट भी जारी किया है.

farmers protest kisan andolan India Close
farmers protest kisan andolan India Close

सोनिया गांधी समेत 11 बड़े नेताओं ने मांग की है कि केंद्र सरकार किसानों की मांगें पूरी करे. समर्थन देने वाले विपक्षी दलों में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, NCP नेता शरद पवार, माकपा महासचिव सीताराम येचुरी, DMK के चीफ एमके स्टालिन और PAGD के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, RJD की ओर से तेजस्वी यादव, भाकपा के महासचिव डी राजा, भाकपा (ML) के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य, AIFB के महासचिव देवव्रत विश्वास, RSP के महासचिव मनोज भट्टाचार्य और शिरोमणि अकाली दल शामिल हैं.

-----

उधर दिल्ली को घेरकर बॉर्डरों पर हजारों किसान डटे हैं. हरियाणा मूल के बॉक्सर विजेंदर कुमार(Vijender Kumar) ने भी कृषि कानून वापस नहीं लिए जाने पर अपना ‘खेल रत्न’ अवॉर्ड वापस करने की चेतावनी दी है. सिंघु बॉर्डर से जय किसान आंदोलन से योगेंद्र यादव ने कहा कि 8 तारीख को सुबह से शाम तक भारत बंद(India Close) रहेगा. चक्का जाम शाम तीन बजे तक रहेगा. दूध-फल-सब्ज़ी पर रोक रहेगी. शादियों और इमरजेंसी सर्विसेज़ पर किसी तरह की रोक नहीं होगी.

किसान नेता बलदेव सिंह(Baldev Singh) ने सिंघु बॉर्डर पर केंद्र सरकार के नए कृषि कानून(Agricultural law) के विरोध में बुलाए भारत बंद को लेकर सभी से इसमें शामिल होने की अपील की है. गुजरात से भी 250 किसानों का जत्‍था दिल्‍ली आ रहा है. किसान आंदोलन को ये मजबूत करने वाला है.

बतादें कि कृषि कानूनों को लेकर चल रहे किसान आंदोलन(kisan andolan) के कारण उद्योग जगत को रोजाना करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है. कई बड़ी कंपनियों के ट्राले तो जाम में फंसे हुए हैं. दिल्ली से आने वाले कर्मचारी भी कंपनियों में नहीं पहुंच रहे हैं. इसका असर उत्पादन पर पड़ रहा है. विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने 9 दिसंबर को राष्ट्रपति से मिलने के लिए समय मांगा है. बसपा प्रमुख मायावती ने भी आज किसान आंदोलन को समर्थन का ऐलान किया है.

वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी(Kailash Chaudhary) ने कहा कि, मैं नहीं मानता असली किसान, जो अपने खेतों में काम कर रहे हैं, वे इस बारे में चिंतित हैं. कुछ राजनीतिक लोग आग में घी डाल रहे हैं. मुझे नहीं लगता कानून वापस लिए जाने चाहिए. जरूरत पड़ी तो इनमें कुछ संशोधन हो सकते हैं.