प्रदर्शन के दौरान मरने वाले किसानों को 20 दिसंबर को श्रद्धांजलि देगा किसान संगठन, प्रदर्शन जारी

किसान आंदोलन अब आर-पार की लड़ाई में बदल गया है. एक तरफ किसान कानून रद्द कराने पर अड़े हैं दूसरी तरफ सरकार सिर्फ संशोधन की बात कर रही है. इसलिए किसान रोजाना नए नए ऐलान कर रहे हैं.

farmers organizations tribute farmers dying during protests
farmers organizations tribute farmers dying during protests

किसान आंदोलन का आज 20वां दिन था. किसान नेताओं ने कहा कि सरकार कानून वापसी को तैयार नहीं है लेकिन हम उनसे ऐसा करवाकर ही रहेंगे. किसान नेता इंद्रजीत ने सिंघु बॉर्डर पर कहा, ‘हम बातचीत से भाग नहीं रहे हैं, लेकिन सरकार को हमारी मांगों पर ध्यान देना होगा और वो हमारे सामने पुख्ता प्रस्ताव रखे.

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इस आंदोलन के दौरान 20 दिनों में 20 किसानों ने अपनी जान गंवाई है यानी करीब हर दिन एक किसान ने जान गंवाई है. हम 20 दिसंबर को देशभर के गांवों में लोगों को रोककर इन किसानों को श्रद्धांजलि देंगे. लड़ाई अब उस मुकाम पर पहुंच गई है, जहां से हमें हर हाल में जीत हासिल करनी है.

वहीं इससे पहले प्रदर्शन के दौरान ठंड के कारण मरे किसानों को राष्ट्रीय लोकदल ने श्रद्धांजलि दी थी. जिला इकाई ने कैंप कार्यालय क्षेत्र व महिला प्रकोष्ठ ने कस्बा बिलराम में कैंडिल मार्च निकाला था. दो मिनट का मौन रखकर मृतात्मा की शांति के लिए ईश्वर से प्रार्थना की गई थी. पीड़ित परिजनों को एक-एक करोड़ रुपये मुआवजा व एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की भी मांग की गई थी.

कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का कहना है कि हम किसानों से आगे की बातचीत करना चाहते हैं. हम चाहते हैं कि किसानों के साथ हर कानूनों के नियम पर बात हो. इस बीच, भारतीय किसान यूनियन के सदस्यों ने तोमर से मुलाकात की है.

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, “कुछ ऐसे लोग हैं जो प्रदर्शन का गलत इस्तेमाल कर किसानों को बहका रहे हैं. दिल्ली में देश विरोधी भाषण देने वालों की तस्वीरें भी प्रदर्शन में देखी गई हैं. ऐसे लोगों की फोटो वहां कैसे पहुंची, मैं समझ नहीं पा रहा हूं. कुछ लोग जरूर हैं जो किसानों को बहकाने की कोशिश कर रहे हैं. मुझे लगता है कि यह गलत है.