ऐ मिस्टर किसान इसी धरती का लाल है..किसानों (Farmers) के मुद्दे पर बीजेपी नेताओं में फूट पड़ी ? : पढ़िए प्रज्ञा जी का संपादकीय व्यंग्य..

PRAGYA KA PANNA
PRAGYA KA PANNA

बीजेपी सरकार ने किसानों पर तीन कानून थोप दिए…हां हां थोप दिए..इसमें कोई शब्द गलत नहीं है..सरकार बोली तुम लोगों के लिए बनाया है..ये लो और मजे करो..किसानों ने (Farmers) कहा हमारे लिए कानून बनाया और हम ही से नहीं पूछा..किसानों ने आवाज उठाई..तो किसानों को आतंकवादी और गैर आतंवादियों में बांट दिया..लेकिन अब बीजेपी खुद किसानों के मुद्दे पर बंटने लगी है..बीजेपी नेताओं को भी लगने लगा है..कि किसानों के साथ बीजेपी की सरकार गलत कर रही है..किसान कोई गलत बात तो कह नहीं है..इतना ही कह रहे हैं कि जो कानून किसानों से बिना पूछे किसानों पर लादे जा रहे हैं उनसे उनका नुकसान है…कानून से किसानों का नुकसान है..तो किसान परेशान हैं..ये बात समझ में आती है लेकिन जिस कानून से बीजेपी को ना नफा होगा ना नुकसान..

देश हित वाले इस कानून के लागू ने हो पाने पर बीजेपी क्यों परेशान है ये बात समझ में नहीं आती है..आप भी सोचिएगा..दोस्तों ये भारत देश है..यहां अपने फायदे की बात सबको बड़ी आसानी से समझ में आ जाती है..फायदा किसी को काटता नहीं है..लेकिन किसानों का ऐसा कैसा फायदा बीजेपी कराना चाहती है कि उस फायदे से किसान ही दूर भाग रहे हैं..कह रहे हैं इतने गुणों वाला कानून हमको नहीं चाहिए…इतना फायदा लेकर हम कहां जाएंगे..अपना फायदा अपने पास रखो..हमको नहीं चाहिए तुम्हारे कानून..हमको अपने हाल पर छोड़ दो..लेकिन सरकार पीछे पड़ी है..कि बहुत बढ़िया कानून है..एक बार मान तो लो..

अभी लागू करेंगे जी अभी किसानों का फायदा हो जाएगा..किसान कहता है ना..हमको ना चाहिए..सरकार कह रही है..ना जी आपको ये कानून लेना पड़ेगा..किसान कहता है ना हमको चाहिए ही नहीं…सरकार कहती है..एक बार इस्तेमाल करके देख लो..समझ में नहीं आता कि सरकार की जान इन कानूनो में क्यों अटकी है..इन कानूनों में सरकार का ऐसा कौन सा कमीशन फंसा है..कि हर हाल में किसानों को देना ही चाहती है..

दोस्तों ये हुई पुरानी बात नई बात ये है कि अब बीजेपी किसानों (Farmers) के मुद्दे पर बंट गई है..बीजेपी के सांसद और मेनका गांधी के बेटे वरुण गांधी किसानों के समर्थन में खड़े हो गए हैं..वरुण गांधी ने बिल्कुल साफ लब्जो में कहा कि “मुजफ्फरनगर में विरोध प्रदर्शन के लिये लाखों किसान इकट्ठा हुए..वे हमारे अपने ही हैं..हमें उनके साथ सम्मानजनक तरीके से फिर से बातचीत करनी चाहिए और उनकी पीड़ा समझनी चाहिए..दोस्तों समझे आप..बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने ये बात इंग्लिश में कही हमने उसका हिंदी अनुवाद करके आपको बताया है..

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वरुण गांधी ने कहा कि हमें यानी बीजेपी की सरकार को किसानों (Farmers) से सम्मान पूर्वक बात करनी चाहिए..यानी आतंकी खालिस्तानी पाकिस्तानी गुंडे कहकर जो बीजेपी नेता किसानों का अपमान कर रहे हैं बीजेपी सांसद वरुण गांधी ने उनको नसीहत दी है..समझ लो तो किसानों के शाप से बच जाओगे वर्ना किसान की हाय बहुत बुरी होती है..वरुण गांधी ने कहा वो यानी किसान हमारे अपने ही हैं..मतलब पाकिस्तानी खालिस्तानी और आतंकवादी और मिनाक्षी लेखी के शब्दों में मवाली नहीं हैं…

दोस्तों फिर कहती हूं..किसानों (Farmers) के मुंह में जब तक जुबान नहीं थी..तब तक वो सरकारों के लिए अन्नदाता था..भगवान था..लेकिन जैसे ही उसके मुंह में जुबान आई उसने बोलना शुरू किया..तो सबसे ज्याद डर सरकारों के भीतर ही बैठ गया..कि अब तक हमारे नेता लोग..बड़े बड़े भाषण देकर बकलोली करते थे..अब ये फटीचर किसान भी मंच से माइक पर बोलेंगे क्या…अब ये सब भी खेत से सिर उठाकर बाहर देखेंगे क्या..किसानों के मुंह में जब से जुबान में आई है तब से सरकार बड़ी तकलीफ में है..कष्ट में है..उधर कुछ लोगों के गोदाम बनकर खड़े हैं..इधर किसान कानूनों के विरोध में खड़े हैं..

दोस्तों जहां तक मैं राजनीति को समझती हूं..उस हिसाब से वरुण गांधी ही नहीं..अभी बीजेपी के और नेता किसानों के पक्ष में आएंगे..आप पूछेंगे क्यों…क्योंकि किसान बीजेपी से नाराज हैं..बीजेपी नेताओं की हालत ये है कि किसानों के गांवों में घुसने से पहले कुछ बीजेपी नेताओं को अपनी गाड़ी से कमल के फूल वाले झंडे उतारने पड़ रहे हैं..पश्चिचमी यूपी के कई गांवों के बाहर पोस्टर लगा दिए हैं कि बीजेपी के नेताओं का गांव के भीतर आना मना है..कई बीजेपी नेताओं को किसान गांवों से भगा चुके हैं..किसान गुस्से में है..और किसानों के गुस्से का सामना सबसे पहले बीजेपी को यूपी में करना पड़ेगा..लोहा बहुत गरम है..और किसानों का हथौड़ा यूपी के ही चुनाव पर गिरेगा..

बीजेपी के नेताओं को ये बात समझ में आ रही है…कैंडीडेट को जीत के लिए लोगों के बीच तो जाना पड़ेगा..मोदी जी की तरह कैंडीडेट तो एम 17 हेलीकॉप्टर से उतर कर भाषण देकर चला नहीं जाएगा..उसको तो गांवों के भैया दद्दू काका चाचा से विधायकी जीतने के लिए वोट मांगने ही पड़ेंगे..और जब कोई वोट मांगने जाए और सामने वाला जूता लेकर खड़ा हो तो कोई भी नेता ऐसा तो बिल्कुल नहीं चाहेगा..इसलिए यूपी के चुनाव तक बीजेपी के कई नेता..किसानों के पक्ष में खड़े होंगे..चुनाव बाद भले ही पतली गली पकड़कर निकल लें..किसान कानून पर किसानों (Farmers) के गुस्से से सबसे ज्यादा नुकसान योगी आदित्यान की यूपी सरकार को होगा..दिल्ली वालों का चुनाव तो अभी 2 साल बाद है..तब तक कोई ना कोई रास्ता निकाल लेंगे..लेकिन किसानों के गुस्से का शिकार यूपी की ही सरकार बनेगी…

दोस्तों किसानों (Farmers) के ऊपर 28 अगस्त को हरियाणा में लाठीचार्ज हुआ था..उसमें कई किसान घायल हो गए थे..किसानों पर हुए अत्याचार का भी किसानों ने करनाल में विरोध किया है..और मिनी सचिवालय घेर लिया है..हरियाणा की सरकार को इंटरनेट तक बंद करना पड़ा है..यूपी और हरियाणा दो राज्यों की बीजेपी सरकारों का चुनाव में किसान बहुत ज्यादा नुकसान करने वाले हैं..अब वो वक्त धीरे धीरे जा रहा है जब किसानों की कोई सुनने वाला नहीं होता था..

किसी बस ड्राइवर को कोई मार दे तो बस हड़ताल हो जाती थी..वकील को कोई मार दे तो वकील हड़ताल पर बैठ जाते थे..डॉक्टर को कोई छू दे तो डॉक्टर हड़ताल कर देते थे..किसानों का कोई माई बाप नहीं था..किसान गरीब की लुगाई था..सबकी भौजाई था..जिसकी मर्जी होती है..छेड़कर चला जाता था..लेकिन अब किसानों ने ये बता दिया है कि अब ये सब नहीं चलेगा..सम्मान दोगे तो सम्मान मिलेगा..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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