आज से मरीजों को दी जाएगी एंटी कोविड ड्रग 2DG, जानें- कैसे करेगी काम ? कितनी डोज की है जरुरत ?

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन यानी डीआरडीओ ने एंटी कोरोना ड्रग 2DG को तैयार किया है. जिसे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस देसी दवा की पहली खेप लॉन्च कर दी है.

DRDO कोविड अस्पताल में दी जाएगी दवा

2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) कोरोना रोधी दवा है. ये दवा एक पाउडर के रूप में है. इस दवा को सबसे पहले दिल्ली के DRDO कोविड अस्पताल में भर्ती मरीजों को दिया जाएगा. डीआरडीओ की ये दवा ऐसे समय में आई है, जब कोरोना की दूसरी लहर ने कोहराम मचा रखा है और तीसरी लहर की चर्चा हो रही है. कोरोना की देसी दवा 2-डीजी  पाउडर के रूप में पैकेट में आती है और इसे पानी में घोल कर पीना होता है.

जून के पहले हफ्ते से सभी जगहों पर मिलेगी दवा

एंटी कोविड दवा पर DRDO प्रमुख जी. सतीश रेड्डी ने बताया कि अभी एक हफ्ते में 10,000 के आस पास कुल उत्पादन होगा. आज AIIMS, AFMS और DRDO अस्पतालों में इसे दे रहे हैं. बाकी राज्यों को अगले चरण में देंगे. अभी थोड़ी देरी है. जून के पहले हफ्ते से सभी जगहों पर 2DG दवा उपलब्ध होगी. ये दवा कोरोना वायरस से संक्रमित कोशिकाओं पर सीधा काम करेगी. शरीर का इम्यून सिस्टम काम करेगा और मरीज जल्दी ठीक होगा. इसे मरीज के वजन और डॉक्टर के प्रिसक्रिप्शन के आधार पर कम से कम 5-7 दिन सुबह-शाम 2 डोज लेनी है.

मरीजों को तेजी से ठीक करती है ये दवा

इस दवा को कोरोना के मरीजों के लिए काफी असरदार मानी जा रही है. ये दवा कोरोना मरीजों को तेजी से ठीक होने में मदद करेगी और उनकी ऑक्सीजन पर निर्भरता को कम करेगी. इस दवा को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) के इनमास लैब के वैज्ञानिकों ने डाक्टर रेड्डी लैब्स के साथ मिलकर बनाई है. इस दवा के मरीजों पर इस्तेमाल को डीसीजीआई ने भी मंजूरी दे दी है.

मरीज के शरीर से ग्लूकोज लेता है कोरोना

एक्सपर्ट ने बताया की ये दवा ग्लूकोज का एक सब्स्टिट्यूट है. दरअसल कोरोना वायरस अपनी एनर्जी को बढ़ाने के लिए मरीज के शरीर से ग्लूकोज लेता है, मगर 2DG देने के बाद कोरोना वायरस ग्लूकोज के धोखे में इस दवा का इस्तेमाल करने लगता है. इससे वायरस को एनर्जी मिलना बंद हो जाती है और उनका वायरल सिंथेसिस बंद होने लगता है. मतलब इस तरह नए वायरस का बनना बंद हो जाता है साथ ही बाकी बचे वायरस भी मरने लगते हैं.

ट्रायल में मिला अच्छा रिस्पॉन्स

इस दवा को बनाने में लगभग एक साल का समय लगा है. पिछले साल अप्रैल में इस दवा के पहले चरण का ट्रायल किया गया था, जिसमें पाया गया था कि ये दवा कोरोना संक्रमण को बढ़ने से रोकती है. इसी के आधार पर दूसरे चरण का ट्रायल किया गया था. इसके बाद देशभर के 11 अस्पतालों में फेज II B क्लीनिकल ट्रायल किया गया था. फिर देशभर के 27 अस्पतालों में इस दवा का आखिरी ट्रायल किया गया था. सभी ट्रायल में इसका अच्छा प्रभाव दिखा जिसके बाद गंभीर लक्षण वाले मरीजों पर इस दवा के आपातकालीन इस्तेमाल को डीसीजीआई की ओर से मंजूरी मिल गई है.

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