सबसे बड़े लोकतंत्र में आज भी लड़ाई और जोर ज़बरदस्ती से लड़े जा रहे चुनाव

पहले के समय में चुनाव chunav एक त्यौहार हुआ करता था सभी नेता बड़े ही जोर शोर के साथ तैयारियां करते थे. नियम और कायदे कानून के साथ सब होता था लेकिन आज के समय में चुनाव chunav एक तानाशाही बन चुका है. अब सिर्फ जोर ज़बरदस्ती चलती है और चुनाव chunav जीत लिया जाता है जनता से भी कोई मतलब नहीं है.

district panchayat president chunav in uttar pradesh
district panchayat president chunav in uttar pradesh

26 जून को नामांकन पत्र दाखिल किया गया

अगर आपकी सत्ता है तो आपको जीतने से कोई नहीं रोक सकता है. ऐसा ही कुछ उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव chunav में देखने को मिल रहा है. राज्य निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों में अध्यक्ष जिला पंचायत के निर्वाचन के लिए 26 जून को नामांकन पत्र दाखिल करने की तारीख रखी थी और भारतीय जनता पार्टी, समाजवादी पार्टी, अपना दल (एस) और राष्ट्रीय लोकदल समेत निर्दलीय उम्मीदवारों ने अपना पर्चा दाखिल कर दिया था.

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17 सीटों पर निर्विरोध जीतेंगे बीजेपी प्रत्याशी

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लेकिन सत्ता में बैठे दल का ही जिला पंचायत अध्यक्ष पद पर कब्जा होता है ये साबित होने में ज्यादा देर नहीं लगी. अभी तक कुल 17 सीटों में से 16 पर बीजेपी प्रत्याशी और 1 पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी का निर्विरोध चुना जाना तय है. वो इसलिए क्योंकि बीजेपी प्रत्याशी के खिलाफ किसी ने पर्चा ही नहीं भरा. उधर बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने भी चुनाव chunav न लड़ने की घोसणा कर दी थी. मायावती ने बोला कि मैं स्पष्ट कहना चाहती हूं कि अगर यह चुनाव chunav पारदर्शी होते तो हम जरूर लड़ते.

सपा और आरएलडी ने बीजेपी पर सत्ता का लाभ लेकर पुलिस-प्रशासन की मदद से जीत हासिल करने का आरोप लगाया है. दरअसल 14 वॉर्ड में से मात्र 2 सीटें जीतने के बावजूद बीजेपी ने ऐसा चक्रव्यूह रच दिया कि 6 सीटों वाली सपा-आरएलडी अपने प्रत्याशी का नामांकन तक करने नहीं आ पाईं. मायावती के पास तो 5 सीटें आई थीं. फिर भी वो चुनाव chunav नहीं लड़ रही हैं.

सूत्रों का कहना है कि बीजेपी की तैयारियों और सरकारी सिस्टम का उसे सहयोग मिलता देख सपा और आरएलडी की ओर से वॉर्डों से जीते कोई भी सदस्य अध्यक्ष पद का चुनाव chunav लड़ने के लिए तैयार नहीं थे. वहीं बसपा सर्वाधिक पांच सीटें जीतने के बाद भी कोई उम्मीदवार उतारने की हिम्मत ही नहीं कर पाई. राजनीति के जानकार लोगों का कहना है कि ये चुनाव आजादी के बाद से अब तक जिसकी लाठी उसकी भैंस के आधार पर ही होते चले आए हैं. इस बार भी ये चुनाव chunav इसी दिशा में मोड़ लेने लगा है.

3 जुलाई को होने जा रहे जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव chunav में शह और मात का खेल चल रहा है. बीजेपी समर्थित प्रत्याशी साम, दाम, दंड, भेद की नीति अपनाकर हर हाल में इस सीट पर काबिज होने में जुट गए हैं. बीजेपी समर्थित प्रत्याशी को जिताने के लिए बीजेपी के सांसद और विधायकों ने अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा दी है.

सपा जिलाध्यक्ष ने लगाया उत्पीड़न का आरोप

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सपा जिलाध्यक्ष महेन्द्र नाथ यादव ने पर्चा दाखिला करने के बाद से उत्पीड़न का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि जिला पंचायत अध्यक्ष के पर्चा खरीदने के बाद से ही जिला प्रशासन द्वारा उत्पीड़न किया जा रहा है. महेन्द्र नाथ यादव ने सपा जिला पंचायत सदस्य को अगवा करने का आरोप भी लगाया और बताया कि सब कुछ प्रशासनिक अमला करवा रहा है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के उम्मीदवार को निर्विरोध जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाने का कुचक्र है और इसमें प्रशासन बराबर का भागीदार है.

नकली हस्ताक्षर से नामांकन वापस करा लिया

दूसरी ओर बागपत में RLD से जिला पंचायत अध्यक्ष की प्रत्याशी ममता किशोर ने भी बड़ा आरोप लगाया है. चुनावी मैदान में उतरीं ममता किशोर ने बताया की बागपत जिला पंचायत में 20 सदस्य जीतकर आए हैं. जिसमें उसके साथ 14 सदस्य हैं. जो उन्हें जिला पंचायत अध्यक्ष बनाने के लिए समर्थन दे रहे हैं. ममता किशोर अपना नामांकन करने के बाद राजस्थान चली गईं थीं और पर्चा वापसी के दिन बागपत में उनका पर्चा वापस हो गया.

इतना ही नहीं अधिकारियों ने ये भी ऐलान कर दिया कि ममता चुनाव नहीं लड़ेंगी उन्होंनें अपना पर्चा वापस ले लिया है. और ममता राजस्थान से चिल्ला रही है..कि ओ बाबू..वो यूपी वाले अफसर बाबू…हम ममता किशोर हैं..मैं बागपत से 400 किमी दूर राजस्थान में हूं..जब हम यूपी में हैं ही नहीं तो पर्चा कैसे वापस ले सकते हैं..ये जो खेल खेल रहे हो बंद कर दो तुरंत..नहीं तो आत्मदाह कर लेंगे..

मतलब सियासत का इतना बड़ा खेल शायद ही किसी ने सुना हो लेकिन उत्तर प्रदेश में ऐसा ही हो रहा है. इतना ही नहीं रालोद के बागपत जिला पंचायत प्रत्याशी ममता जय किशोर ने बीजेपी सांसद सत्यपाल सिंह पर अपहरण कराकर बीजेपी जॉइन करवाने का आरोप भी लगया है. उनसे कहा गया था कि अगर बीजेपी ज्वाइन नहीं करोगे तो मुकदमें लगवा देंगे.

ये सब देखकर आप अंदाजा लगा सकते हैं कि UP में क्या हो रहा है. ये तो वही तानाशाह वाली बात हो गई कि हम हैं और हम ही रहेंगे. पूरा प्रशासन सत्ताधारियों के साथ लगा हुआ है. हम तो बड़ी बड़ी लोकतंत्र की बातें करते हैं. क्या ये यूपी का लोकतंत्र है.

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3 thoughts on “सबसे बड़े लोकतंत्र में आज भी लड़ाई और जोर ज़बरदस्ती से लड़े जा रहे चुनाव

  • June 30, 2021 at 2:12 pm
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    वर्तमान सरकार का हाल प्रज्ञा जी मेरे जाने में उस बच्चे के जैसा है जो मैच तो खेलना चाहता पर हार होती नहीं देख सकता तो यदि टॉस हारे, तो दोबारा हो.. ऑउट हुए, तो ट्रायल बॉल… बोल्ड हुआ, तो गेंद ज़्यादा तेज थी.. कैच हुआ, तो अरे वो आंटी बीच में आ गयी थी… रन आउट हुए, तो माँ की कसम खाएंगे और यदि सब जुगत भिड़ा कर भी हार तय हो, तो भाई मेरा बेट मेरी बॉल और ये में चला घर!!
    दुर्भाग्य तो ये है कि आज umpire और BCCI का चेयरमैन भी इसी बच्चे की मुट्ठी में है.!

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    • July 1, 2021 at 5:06 pm
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      apne wakt nikal kar comment kiya iske liye shukriya 🙂 keep supporting keep commenting

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  • Pingback: जिला पंचायत चुनाव: पुलिस प्रशासन का इस्तेमाल कर रही बीजेपी, सपा दे रही कांटे की टक्कर – Prime Media Hindustan

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