कौन है मौलाना साद ? हज़ारों लोगों को ख़तरे में डालकर हो गया फ़रार, जानें हर सवालों के जवाब

कोरोना वायरस का अबतक का सबसे बड़ा मामला दिल्ली के निजामुद्दीन स्थित तब्लीगी जमात के मरकज से सामने आया है, जिसके बाद पूरे देश में इसको लेकर हड़कंप मचा हुआ है. लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर इसके पीछे किसका हाँथ है ?

delhi muzaffarnagar tablighi jamaat maulana saad
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इसमें तबलीग़ी जमात के मौलाना मोहम्मद साद कांधलवी का नाम सामने आ रहा है. मौलाना साद ही तबलीगी जमात का अमीर यानी मुखिया है. तब्लीगी जमात भारतीय उपमहाद्वीप में सुन्नी मुसलमानों का सबसे बड़ा संगठन है. मौलाना साद तब्लीगी जमात के संस्थापक मुहम्मद इलियास कांधलावी का पड़पोता है. मौलाना साद के परदादा मौलाना इलियास कांधलावी ने 1927 में तब्लीगी जमात का गठन किया था.

तीन साल पहले इस जमात में विवाद हुआ था जिसके बाद जमात दो गुटों में बंट गया था. इसी के बाद मौलाना साद ने पुरानी तबलीगी जमात का खुद को अमीर घोषित कर लिया था. दूसरा गुट 10 सदस्यों की सूरा कमेटी बनाकर दिल्ली के तुर्कमान गेट पर मस्जिद फैज-ए-इलाही से अपनी अलग तबलीगी जमात चला रहा है.

13 मार्च को ही मौलाना साद ने मरकज में जोड़ का एक कार्यक्रम रखा था. जिसके लिए भारत ही नहीं विदेश से भी काफी लोग आए थे. इसी के चलते लॉकडाउन के बाद भी तबलीगी जमात के मरकज में हजारों की संख्या में लोग मौजूद थे. पकड़े जाने के बाद ज़मात के लोग कहने लगे की हम लोगों को सरकार से कोई जानकारी नहीं दी गई.

वहीँ दूसरी तरह कोरोना संक्रमण के खतरे को भांपते हुए मस्जिद फैज-ए-इलाही ने तबलीगी जमात का काम सरकार की चेतावनी के बहुत पहले एक मार्च को ही बंद कर दिया था. अब सवाल यहाँ खड़ा होता है कि पूरे देश में कोरोना महामारी की जानकारी थी. 11 मार्च को पहले कोरोना पॉजिटिव मरीज की मौत भी हो गई थी, लेकिन मौलाना साद को कोई जानकारी ही नहीं थी. क्या ये संभव है ?

पूरे देश में सभी छोटे बड़े कार्यक्रम रद्द कर दिए गए. सारे दौरे रद्द कर दिए गए. स्कूल कॉलेज सब बंद कर दिए गए. तो फिर 13 से 15 तक इतना बड़ा कार्यक्रम करने की क्या जरुरत थी ? मौलाना साद को अगर देश की जानकारी नहीं थी तो क्या विदेशों की भी जानकारी नहीं थी ? कोरोना वायरस तो जनवरी से ही एक वैश्विक महामारी बना हुआ है. मार्च से पहले ही करीब 10 हज़ार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी थी. तो ऐसे में क्या विदेशों से जमातियों को बुलाना ठीक था ?

अगर इतना बड़ा जलसा कर भी लिया था तो अगले दिन या 2 दिन के अंदर सभी को वापस भेज देना चाहिए था. लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. दिल्ली सरकार ने 13 मार्च को एडवाइज़री जारी की कि कहीं भी किसी भी कार्यक्रम में 200 से ज्यादा लोग नहीं मौजूद हो सकते. 16 मार्च को फिर दूसरी एडवाइजरी जारी की कि 50 से ज्यादा नहीं इकठ्ठा हो सकते हैं. 20 मार्च तक तो सब खुला रहा कोई लॉकडाउन नहीं था. जलसे में आये हुए लोग आराम से अपने घर जा सकते थे. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. और आज जमात के 700 से ज्यादा लोगों में कोरोना वायरस के लक्षण मिले हैं. जिससे पूरे देश में हड़कंप मचा हुआ है.

लेकिन समझाने के बजाये उल्टा मौलाना साद ने मुश्लिम समुदाय को और भड़का दिया कि ये मुश्लिमों को मुश्लिमों से अलग करने की एक चाल है. पांचों टाइम की नमाज़ पढ़ने वालों को कोई कोरोना नहीं होगा. अखबारों, टीवी और सोशल मीडिया पर ख़बरें दिखा कर लोगों को डराया जा रहा है. मस्जिद में रहने से कोई नहीं मरता और अगर मरता भी है तो मरने के लिए मस्जिद से अच्छी जगह और क्या हो सकती है. साद के इस बयान पर काफी बवाल हुआ.

दिल्ली पुलिस ने महामारी अधिनियम 1897 और आईपीसी की दूसरी धाराओं के तहत मौलाना साद समेत छह लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है. जिसके बाद मौलाना का सारा भूत उतर गया और उसने दूसरा ऑडियो जारी किया उसमें उसने बताया कि जलसे में आये सभी लोगों को सरकार का साथ देना चाहिए और अपना टेस्ट करवाना चाहिए. मैं खुद क्वारंटाइन हो गया हूँ. उसने ये भी कहा कि आप जहां भी हों, वहीं रहे और खुद को वहीं पर क्वारंटाइन करे. ये इस्लाम या शरीयत के खिलाफ नहीं है.

मौलाना मुहम्मद साद कंधालवी क्या वास्तव में क्वारंटाइन हैं? या फिर उन्होंने गिरफ्तारी से बचने के लिए कोई नया पैंतरा चला है. क्युकि जब पुलिस की एक टीम मौलाना साद के घर गई तो वहां पर उनके परिवार वाले ही मिले वो नहीं मिला. पुलिस मौलाना साद पर लगे आरोपों के बारे बताकर वापस चली आई वहीं, घरवालों ने कहा कि उन्हें इस बाबत खबर नहीं है कि साद कहां पर है ?

ऐसा क्यों हुआ ? आखिर इतने लोगों की जान खतरे में क्यों डाली गई ? इसके पीछे सबसे बड़ा कारण था मौलाना मोहम्मद साद कांधलवी की ज़िद. वो किसी की नहीं सुनता है. उसको जो ठीक लगता है वही करता है. ये कोई और नहीं बल्कि मौलाना साद के सबसे क़रीबी रिश्तेदार और उनके बहनोई मौलाना ज़िआउल हसन ने मीडिया को बताया है.

ज़िआउल हसन ने बताया कि तबलीग़ी जमात की लीडरशिप मोहम्मद साद को विरासत में मिली है. वो इस्लाम के बहुत बड़े ज्ञानी नहीं हैं लेकिन संस्था पर पकड़ सख़्त है. वो दूसरों की कम सुनते हैं. जब वो जमात के अमीर बने तो उन्हें उतनी इज़्ज़त नहीं मिली जितनी एक संस्था के लीडर को मिलनी चाहिए थी. साद की सबसे बड़ी कमज़ोरी उसकी ज़िद है. वो किसी की नहीं सुनते.

इस मामले के बाद तबलीगी जमात देशभर के निशाने पर आ गई है. लॉकडाउन के बावजूद यहां 2000 से ज्यादा लोगों का इकट्ठा होना जमात की सामाजिक जिम्मेदारी पर सवाल खड़े कर रहा है. अब इसका असर इसकी अंतरराष्ट्रीय शाखाओं पर भी पड़ा है. बांग्लादेश की तबलीग़ी जमात पर अब मौलाना साद का असर बहुत कम है. पाकिस्तान का भी यही हाल है. बतादें कि जमात के लाखों सदस्य दुनिया के 80 से अधिक देशों में हैं, जिनमे पाकिस्तान, बांग्लादेश, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया और अमरीका ख़ास हैं.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम ने मौलाना साद को नोटिस भेज कर टीम ने मरकज से जुड़े 26 सवालों के जवाब मांगे हैं. जिसमें ये निम्न हैं-

  • धार्मिक आयोजनों में लोगों की भीड़ जुटने से पहले क्या कोई इजाजत कभी पुलिस से या प्रशासन से मांगी गई या कभी मिली तो उसकी जानकारी और दस्तावेज मुहैया कराएं.
  • 12 मार्च के बाद मरकज में आये सभी लोगों की पूरी जानकरी दें. कौन-कौन आए थे और कितने लोग थे. जिसमे विदेशी और भारतीय शामिल हैं.
  • जो बीमार थे और जिनको हॉस्पिटल ले जाया गया, उनकी पूरी जानकारी दीजिए.
  • संगठन का पूरा पता और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी जानकारियां
  • संगठन से जुड़े कर्मचारियों की पूरी डिटेल, जिसमें घर का पता और मोबाइल नंबर भी शामिल हो.
  • मरकज के मैनेजमेंट से जुड़े लोगों की डिटेल मांगी गई है.
  • ये लोग कब से मरकज से जुड़े हैं. उनकी पूरी जानकारी
  • मरकज की पिछले 3 साल की इनकम टैक्स की डिटेल, पैन कार्ड नंबर, बैंक अकाउंट की डिटेल और एक साल की बैंक स्टेटमेंट की डिटेल मांगी गई है.
  • 1 जनवरी 2019 से अब तक मरकज में हुई सभी धार्मिक आयोजन की जानकारी भी मांगी गई है
  • मरकज के अंदर सीसीटीवी लगा है. अगर लगा है तो कहां-कहां.

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