लखनऊ: 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपी को मिली फांसी की सजा, पढ़ें पूरा मामला-

निर्भया के बाद अब लखनऊ में एक बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या के मामले में कोर्ट ने आरोपी को फांसी की सजा सुना दी है. साथ ही 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है.

death sentence-to raping and misdeed in lucknow
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मामला लखनऊ के सहादतगंज का है जहाँ 15 सितंबर को छह साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म और हत्या करने वाले आरोपी बबलू अराफात के खिलाफ सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश पाक्सो अधिनियम/अपर सत्र न्यायाधीश लखनऊ ने मृत्यु दण्ड की सजा सुनाई है. और 40 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है. बतादें कि बबलू बहाने से मासूम को अपने घर लेकर गया था, जहां उसने बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और बाद में उसकी हत्या कर दी थी. ये मामला फास्ट ट्रैक कोर्ट में चला था.

आरोपी बबलू इतना शातिर था कि मासूम की हत्या करने के बाद उसका शव अपने ही घर में बंद कर दिया और बच्ची के पिता के साथ मिलकर उसकी तलाश करने में जुटा हुआ था. कुछ देर बाद शक और पूछताछ करने के बाद आरोपी के घर की तलाश ली गई, तब वहां से बच्ची का शव बरामद हुआ. इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था.

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हत्या से पहले उसका गला दबाने की बात समाने भी आई थी. वहीं चाकू और हथौड़े से भी बच्ची पर कई वार किए थे. बच्ची के माथे और दायें आंख के ऊपर चोट के निशान मिले थे. आरोपी मासूम बच्ची का मुहंबोला मामा लगता था. वहीं कोर्ट के सजा सुनाने के बाद बच्ची के माता पिता ने कहा कि सरकार ने जो सजा दी है सही दी है, आरोपी बबलू तीन साल से हमारे यहां काम कर रहा था, उससे कोई रिश्तेदारी नहीं थी.

राजधानी की कोर्ट ने इस मामले में महज चार महीने सुनवाई पूरी कर गठित पॉक्सो एक्ट के मामले में पहली फांसी की सजा सुनाई है. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी के इस आचरण के कारण समाज मे लोग रिश्तेदारी-नातेदारी और दोस्ती के आधार पर बने संबंधों पर भी अविश्वास करने लगे है जो कि भारतीय परिवेश में सामाजिक व्यवस्था के लिए घातक है.

पुलिस कमिश्नर सुजीत पांडेय ने बताया कि 15 सितंबर को छह साल की बच्ची की बॉडी पाई गई थी. 24 घंटे के अंदर आरोपी को गिरफ्तार किया गया. छह दिन के अंदर चार्जशीट दाखिल की गई. एनएसए भी लगाया गया था. केस में सभी साइंटिफिक एवीडेंट इकठ्ठा किए गए थे. डीएनए सैंपल भी लिए गए थे. पैरवी करने के बाद चार माह के अंदर इसकी सजा दी गई.

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