गंगा में तैरती लाशें कहाँ की हैं ? क्या ये वर्षों पुरानी परंपरा है ? या आने वाला है कोई बड़ा संकट, जानें सब कुछ-

देश में कोरोना से हाहाकार मचा हुआ है दूसरी तरफ बिहार के बक्सर से सबसे भयानक तस्वीर सामने आ रही है. यहाँ गंगा नदी के महादेवा घाट के पास सैकड़ों लाशें तैरती दिखाईं दीं हैं. इनको देखने के बाद हर कोई दहशत में है की आखिर ये आईं कहाँ से.

UP के बताये जा रहे शव

बक्सर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अश्विनी कुमार चौबे का संसदीय क्षेत्र है. प्रशासन का कहना है कि ये शव उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद और वाराणसी से बहकर यहां पहुंचे हैं. बक्सर और पड़ोसी UP के गाजीपुर जिलों के DM ने अपने-अपने यहां के शव होने से साफ इन्कार कर दिया है. बक्सर जिला प्रशासन ने अब ड्रोन कैमरे से घाटों की निगरानी करने की तैयारी की है. ताकि पता लगाया जा सके की ये शव कहाँ से बह कर आये हैं.

71 शवों को किया दफ़न

घाट पर पड़े शवों को प्रशासन ने जेसीबी की मदद से जमीन में दफ़न करा दिया है. चौसा और आसपास के घाटों से कुल 71 शवों के DNA व कोविड टेस्ट के लिए सैंपल लिए गए हैं. SP नीरज सिंह ने बताया कि इन लोगों की मृत्यु कैसे हुई है, इसकी जांच की जाएगी. इस बात की भी जांच की जा रही है कि शव यहां कैसे पहुंचे ?

सभी शव हैं कोरोना संक्रमित

घाट पर मौजूद रहने वाले पंडित दीन दयाल पांडे ने बताया कि  अमूमन इस घाट पर दो से तीन लाशें ही रोज़ाना आती थीं लेकिन इधर बीते 15 दिन से यहाँ तकरीबन 20 लाशें आती हैं. ये जो शव गंगा जी में तैर रहे हैं, ये संक्रमित लोगों के शव हैं. यहाँ गंगा जी में बहाने से हम लोग मना करते हैं, लेकिन लोग मानते नहीं हैं. प्रशासन ने यहाँ चौकीदार लगाया है, लेकिन उनकी कोई बात नहीं सुनता है.

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मृत शरीर को गंगा में प्रवाहित करने की परंपरा

वहीं वहां के स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता शिव प्रकाश राय का कहना है कि इस इलाके में मृत शरीर को गंगा में प्रवाहित करने की परंपरा सदियों पुरानी है. उनका कहना है कि लोगों की मान्यता है कि गंगा में जल प्रवाह करने से मनुष्य को मुक्ति मिलती है. इसके पीछे की मान्यता ये है कि आखिरी समय में भी शरीर जल में रहने वालों के काम आये.

लोगों को नहीं किया गया जागरूक

उन्होंने बताया कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है. ये परंपरा पुरानी है, लेकिन इस बार मृत्यु ज्यादा हुईं, तो इस वजह से लाशों का ढेर एक साथ मिला है. गंगा साफ करने की परियोजना चल रही है, लेकिन सरकार की तरफ से कभी जल प्रवाह पर रोक लगाने की कोई कोशिश नहीं की गई. इसलिए ये परंपरा आज के दौर में भी जारी है. इस परंपरा को खत्म करने या लोगों को जागरूक करने का कोई प्रयास नहीं किया गया, जिसकी वजह से गंगा में प्रदूषण बढ़ रहा है.

विकराल रूप ले सकती है ये स्थिति

कोरोना काल में संक्रमण की वजह से मृत्यु होने के बाद अगर लाश को इस तरह गंगा में प्रवाहित किया जा रहा है, तो इसके परिणाम भी घातक हो सकते हैं. क्योंकि गंगा का पानी कई राज्यों और जिलों के लोगों के घरों में जाता है. ऐसे में विकराल स्थिति बन सकती है. शिव प्रकाश का ये भी कहना है कि अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में खर्चा काफी ज्यादा है, सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए, साथ ही गंगा के घाटों के पास ही विद्युत शवदाह गृह बनाने की भी जरूरत है. बक्सर के स्थानीय पत्रकार बताते है कि यहाँ कोविड संक्रमित मरीज़ों के दाह संस्कार में 15-20 हज़ार रुपए ख़र्च हो रहे हैं.

सतर्क हुआ जिला प्रशासन

इतनी बड़ी संख्या में लाशों के बाद से जिला प्रशासन सतर्क हो गया है. लोग गंगा नदी में शव प्रवाहित न कर सकें, इसके लिए पुलिसबल तैनात किया गया है. वहीं ये भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि लाशों का अंतिम संस्कार जलाकर कराया जाए. चरित्रवन और चौसा श्मशान घाट पर दिन-रात चिताएं जल रही हैं. कब्रिस्तानों में भी भीड़ लगी रहती है. स्थानीय लोगों ने बताया कि रोजाना 20 से ज्यादा लोग श्मशान घाट में रजिस्ट्रेशन भी नहीं कराते है. चौसा में भी 25 शवों का अंतिम संस्कार किया गया. इनमें 7 को जलाया गया और 16 शवों को नदी में बहा दिया गया.

शेखर सुमन और उर्मिला मातोंडकर ने जताया दुःख

इन लाशों की कई वीडियो और फोटोज सोशल मीडिया पर सामने आए हैं. देश की इस भयावह स्थिति पर शेखर सुमन, उर्मिला मातोंडकर समेत कई बॉलीवुड सेलेब्स ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर दुख और चिंता व्यक्त की है. शेखर सुमन ने लिखा, “संदिग्ध कोरोना पीड़ितों के 150 से ज्यादा आधे जले हुए शव बिहार में गंगा नदी में तैरते पाए गए। अगर यह ‘प्रलय’ नहीं है, तो क्या है? हम इसके लायक नहीं हैं। यह बहुत ही भयावह है। भगवान प्लीज हमें इस तबाही से बचाईए।”

उर्मिला मातोंडकर ने पोस्ट शेयर कर लिखा, “मैं बेपनाह अंधेरों को सुबह कैसे कहूं, मैं इन नजारों का अंधा तमाशबीन नहीं। 100 से ज्यादा शव गंगा में बहा दिए गए। दुखद, क्रूर, अमानवीय विश्वास से परे। ओम शांति। #IndiaCovidCrisis।”

कुत्ते नोच रहे शव

उधर कानपुर उन्नाव में घाट पर जगह कम पड़ी तो नदी के बीच रेत के टीले पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है. इससे क्षेत्र में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है. आसपास बस्ती और गांवों में रहने वाले लोग डरे हुए हैं. सैकड़ों शव होने की वजह से ज्यादातर शव एक दूसरे पर दफनाए गए हैं लेकिन अब उन शवों को कुत्ते खींचकर इधर उधर फैला रहे हैं और खा रहे हैं. इससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है.

Photo:- AmarUjala.com

बलिया में मिले 17 शव

बलिया में भी गंगा किनारे कई स्थानों पर शवों को देख हड़कंप मच गया है. संक्रमण फैलने की आशंका भी तेज हो गई है. बताया जाता है कि गंगा किनारे कोटवा नारायणपुर से लेकर मांझी घाट तक यही स्थिति है. मामला सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने भरौली व उजियार घाट पर  कुल 17 शवों को दफनाया है. मामला सामने आने के बाद बलिया डीएम अदिति सिंह ने कहा कि थाना नरही क्षेत्र अंतर्गत बलिया-बक्सर पुल के नीचे गंगा नदी के तट पर सोमवार की शाम को कुछ दिन पुराने क्षत-विक्षत अज्ञात शव मिलने की सूचना मिली है.

पुल से नदी में फेंक रहे शव

कुछ लोगों के गैरजिम्‍मेदाराना रवैये के कारण संक्रमण के और ज्यादा फैलने का खतरा बढ़ सकता है. उत्तरप्रदेश के सीमावर्ती बिहार के सारण जिले के मांझी प्रखंड के जयप्रभा सेतु पर जो हो रहा है उसे जानकर आप हैरान रह जायेंगे. बिहार और यूपी की सीमा को जोड़ने वाले पुल जयप्रभा सेतु पर एम्बुलेंस चालक अस्पतालों से शवों को लाते हैं और शवों को पुल से ही नदी में फेंककर आराम से निकल जाते हैं. प्रशासन आँखे मूंदे स्थिति को सामान्य या नियंत्रण में बताने की कोशिश में लगा रहता है. ये बात किसी और ने नहीं वहां रह रहे स्थानीय लोगों ने बताई है.

Photo:- NDTV.IN

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