UP में गंगा किनारे मिले हज़ारों शव, बारिश के बाद दिखा डरावना मंजर

उत्तर प्रदेश में गंगा किनारे शवों को दफन करने और प्रवाहित करने से हड़कंप मच गया है. अब लगभग सभी घाटों पर ये मंजर देखने को मिल रहा है. नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन ने उत्तर प्रदेश, बिहार और केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर 4 हफ्तों में जवाब मांगा है.

कन्नौज और उन्नाव में सैकड़ों शव

कन्नौज के महादेवी गंगा घाट के पास करीब 350 शव दफन किये गए हैं. प्रशासन इन पर मिट्‌टी डलवा रहा है, ताकि कोई देख न सके. उन्नाव के शिवराजपुर का खेरेश्वर घाट भी सैकड़ों लाशों से पटा पड़ा है. गंगा के बीच में और किनारे पर कई शव दफनाए गए हैं. लेकिन बारिश हुई और शवों के ऊपर से बालू हटी तो मृतकों के परिजनों की बेबसी और मजबूरी सामने आ गई. बताया जा रहा है कि आसपास के ग्रामीण लकड़ी महंगी होने और आर्थिक तंगी के चलते सूखी गंगा में ही शव दफनाकर चले गए हैं.

गाजीपुर और बलिया ने मिले शव

उधर पूर्वांचल के गाजीपुर और बलिया में भी गंगा में मिली लाशों से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई. दोनों जिलों में प्रशासन ने शवों का कहीं अंतिम संस्कार करा दिया तो कहीं गड्ढा खोदकर दफना दिया गया है. स्थानीय लोगों कहना है कि गंगा में लाशें आसपास के गांव से आई होंगी, जो कोरोना से मौत के बाद लकड़ियों का अभाव में दाह संस्कार नहीं कर पाए होंगे. उन्होंने गंगा में बहा दी होंगी.

कानपुर और फतेहपुर में सैकड़ों

कानपुर के शेरेश्चवर घाट के पास आधे घंटे की दूरी में इतनी लाशों को दफन किया गया था कि जिधर नजर गई, वहां जमीन में लाश ही दफन दिखी. फतेहपुर में भी गंगा किनारे करीब 20 शव दफन मिले. फतेहपुर और उन्नाव प्रशासन इन लाशों को एक-दूसरे के इलाके के बताते रहे. और करीब 8 घंटे बाद ये तय हुआ कि अब दोनों जिलों के लोग अपने-अपने क्षेत्र में शवों का अंतिम संस्कार करेंगे. पहले से जो दफन शव मिले उन पर प्रशासन ने मिट्‌टी डलवा दी.

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प्रयागराज, चंदौली, भदोही और वाराणसी में भी मिले शव

वहीं प्रयागराज से अब तक 13 शवों को गंगा और यमुना नदी से निकाला गया है. चंदौली के बड़ौरा गांव में गंगा घाट पर दो दिन के अंदर 12 से ज्यादा लाशें नजर आईं. पुलिस ने इन सभी लाशों को दफन करवा दिया है. भदोही के रामपुर गंगा घाट पर 8 शव गंगा किनारे मिले हैं. इन सभी की हालत बेहद खराब थी. वाराणसी के सूजाबाद इलाके में गंगा किनारे एक साथ 7 शव मिले हैं.

गाजीपुर में अब भी शवों का मिलना लगातार जारी है. हर रोज करीब 10 से 12 लाशें मिल रहीं हैं. गंगा के तटवर्ती इलाकों में चूना एवं ब्लीचिंग पाउडर का भी छिड़काव कराया गया है. लेकिन डीएम गाजीपुर एमपी सिंह का कहना है कि उनके यहां शव मिलने की कोई संख्या नहीं है. टीम लगाई गई है, जो गंगा घाटों के किनारे सत्यापन करने में जुटी हुई है और शव मिलने पर उन्हें दफनाने का काम कर रही है.

बॉर्डर पर पुलिस बल तैनात

अब गाजीपुर प्रशासन ने बिहार से आने वाले शवों को बॉर्डर से वापस लौटाना शुरू कर दिया है. बॉर्डर पर पुलिस बल तैनात है. ये पुलिसकर्मी बिहार की तरफ से आने वाले शवों को गाजीपुर में दाखिल नहीं होने दे रहे हैं. पुलिस टीमें नाव से गंगा घाटों और नदी पर गश्त कर रही हैं. टीमें लोगों को गंगा में शवों को प्रवाहित नहीं करने के लिए जागरूक भी कर रही हैं. यूपी में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आदेश के बाद से गाजीपुर प्रशासन ने सभी घाटों पर 24 घंटे निगरानी शुरू करवा दी है.

बलिया में भी अब तक 15 लाशें गंगा में मिल चुकी हैं. इन लाशों को प्रशासन ने घाट किनारे ही गड्‌डे खुदवाकर दफन करवा दिया है. जिलाधिकारी अदिति सिंह ने कहा कि सभी शवों का उचित तरीके से गंगा नदी के तट पर ही पुलिस एवं प्रशासन की उपस्थिति में अंतिम संस्कार करा दिया गया है. उक्त शवों के आने के स्रोत की जांच की जा रही है.

नेशनल ह्यूमन राइट कमीशन आयोग ने कहा है कि प्रशासन नदियों में शवों और अधजले शवों को गंगा में प्रवाहित करने को लेकर लोगों को समझाने में फेल रही है. यही कारण है कि आज भी लोग शवों को गंगा में प्रवाहित कर रहे हैं. ये नेशनल मिशन फॉर क्लीन गंगा प्रोजेक्ट की गाइडलाइन के खिलाफ है.

विकराल रूप ले सकती है ये स्थिति

कोरोना काल में संक्रमण की वजह से मृत्यु होने के बाद अगर लाश को इस तरह गंगा में प्रवाहित किया जा रहा है, तो इसके परिणाम भी घातक हो सकते हैं. क्योंकि गंगा का पानी कई राज्यों और जिलों के लोगों के घरों में जाता है. ऐसे में विकराल स्थिति बन सकती है. अंतिम संस्कार की प्रक्रिया में खर्चा काफी ज्यादा है जिससे लोग शव को वहीँ दफना दे रहे हैं या गंगा में बहा दे रहे हैं.

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