कहे का डबल इंजन .. दलित ( Dalit ) होना आज भी अभिषाप है: संपादकीय व्यंग्य

PRAGYA KA PANNA
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देश में हर 15 मिनट में एक दलित ( Dalit ) को सताया जा रहा होता है..दलितों पर जुल्म के मामले में यूपी नंबर वन है..ये हालत देश के उस राज्य यूपी की है..जहां की सरकार की ब्रांडिंग डबल इंजन के नाम पर की जाती है..मैं पूछना चाहती हूं प्रयागराज में हुई घटना में डबल इंजन किसी दलित के काम आया क्या..आप डबल इंजन क्या..आप दर्जन भर इंजन लगा लो जब आपका शासन दलित गरीब वंचित शोशित के लिए नहीं है तो कोई इंजन का क्या करे..प्रयागराज में पूरे दलित परिवार का खात्मा योगी जी की बिरादरी के लोगों ने कर दिया..क्या पहले इंजन योगी जी प्रयागराज गए..जवाब है नहीं..क्या दूसरे इंजन मोदी जी प्रयागराज गए..जवाब है नहीं..क्या इन दोनों इंजनों के पर्जे छर्रे तमंचे प्रयागराज गए..जवाब है नहीं..तो फिर आगे की डबल इंजन की सरकार..इससे अच्छा तो धक्कामार ठेला है..ऐसे इंजनों का कोई क्या करे जो अपने समाज के कमजोर वर्ग को अपनी गाड़ी पर ना बिठाए..मोदी जी को यूपी ने प्रधानमंत्री बनाया..योगी जी को मुख्यमंत्री बनाया..कईयों को राज्यपाल बनाकर छोड़ दिया..कईयों को केंद्र में कईयों को प्रदेश में मंत्री बनाया है..लेकिन दलितों ( Dalit ) पर अत्याचार के मामले में यूपी नंबर वन है..इसका मतबल तो यही है कि इन सबको दलितों से कोई मतलब नहीं है..दलितों के पैर धोना..दलितों की बस्ती में सफाई करना..दलितों के लिए आंसू बहाना..कोरी नौटंकी है..नाटक है..स्टंटबाजी है..

दलितों से वोट मांगा दलितों ने वोट देकर सरकार बना दी..दलितों ने सोचा था सरकार सहायता देगी..इवीएम ने दलित का वोट तो एक्सेप्ट कर लिया लेकिन यूपी की व्यवस्था ने दलितों को एक्सेप्ट नहीं किया..प्रयागराज के फाफामऊ में दलित ( Dalit ) परिवार ने ठाकुर पड़ोसियों के खिलाफ थाने में शिकायत कर रखी थी..खेत का मामला था..घर की मां बेटी के साथ बलात्कार करके मारा बाप बेटे को काट दिया..दलित मां बेटी को बलात्कार के बाद मारना ये बाताता है कि यूपी में दलित समाज सरकारों से कितने प्रकाशवर्ष की दूरी पर रहते हैं..हाथरस में ठाकुर अपरकास्ट के लोगों ने दलित बच्ची के साथ बलात्कार किया..फिर मार दिया..मैं खुद सवर्ण हूं..लेकिन एक बात बहुत ईमानदारी से कहती हूं..दलितों पर अत्याचार का एक ही कारण है और एक ही जाति आत्याचार में सबसे आगे है..उसके पीछे सिर्फ एक ही मानसिकता है कि हमारी सरकार है..और हमारी सरकार में किसी की हिम्मत कैसे हो सकती है हमसे ऊंची आवाज में बात करने की..

दोस्तों ये तो मैंने आपको समाज का ताना बताया..हर ठाकुर समाज का व्यक्ति बुरा है ऐसा नहीं है..लेकिन नीचे तक मैसिजिंग है कि ठाकुर साहब हैं इनकी सरकार है..थानों तक में भेदभाव है..ये वो सच है जो आपको कोई नहीं बताएगा लेकिन मेरे इस बात पर अकेले में सहमति सब जताएंगे..अब मैं आती हूं..सरकार पर मैं कुछ गलत कर रही हूं तो मुझे कमेंट में जरूर बताना..मायावती की भी एक सरकार थी..मायावती खुद दलित ( Dalit ) थीं..उस समय अगर कोई घटना होती थी..तो दरोगा..एसपी और डीएम छोड़िए डीजीपी हेलीकॉप्टर उठाकर भागते थे..आज की तारीख में क्या है..दलितों पर हो रहे अत्याचार हो रहे हैं..क्या आपके डीजीपी के मुंह से थूक निकला..क्या आपने डीएम के माथे पर पसीना आते देखा है..नहीं देखा होगा..दलित उत्पीड़न के मामलों में जिलों के जिलाअधिकारियों पर कोई फर्क नहीं पड़ता..हाथरस में आपने देखा होगा..डीएम पर सरकार ने कोई कारवाई नहीं की..एसडीएम पर कोई कार्रवाई नहीं हुआ..उल्टे डीएम ने गांव को बंधक बना लिया..रात मे लाश जलवा दी..

अब बात मायावाती की करती हूं..जितने भी दलित भाई बहन मेरी बात सुन रहे होंगे वो इस बार पर मुझसे सहमत होंगे कि मायावती की सरकार जाने के बाद मायावती ट्विटर से आगे बढ़ ही नहीं पा रही हैं..दलितों का कोई बड़ा नेता उत्तर प्रदेश में नहीं है..चंद्रशेखर आजाद को छोड़कर..मुख्यमंत्री उसी 5 कालिदास मार्ग में रहते हैं जहां मायावती रहती हैं..मुख्यमंत्री का दफ्तर भी उसी लखनऊ में है जहां मायावती का था..लेकिन दलितों पर बढ़ रहे अत्याचार के लिए राजा का व्यहवार जिम्मेदार है..राजा अगर ये चिल्लाकर कह दे कि अगर दलितों ( Dalit ) को परेशान किया गया तो जिले के जिलाधिकारियों की खैर नहीं..मजाल है कोई अन्याय करने की सोचेगा.लेकिन ऐसा है नहीं..थानों में जिलों में जिनको कुर्सियां मिल रही हैं..वो अपने जूतों तले दलितों को दबा रहे हैं..

समय मिले तो पूछिएगा डबल इंजन के जुमले के बारे में..कहां है डबल इंजन..रात के बारा बजे गहने पहनाकर लड़कियों को घुमाने वालों से..दूरबीन लेकर घूमने वालों से कि प्रयागराज में क्या हुआ..क्यों हुआ..और क्या आपनी दूरबीन की रेंज प्रयागराज तक पहुंचती है..दोस्तों मैं अपने देश की सभी जातियों सभी धर्मों का आदर करती हूं..सभी लोग इंसान हैं..सबको मिलकर रहना चाहिए..झगड़े हर जगह होते हैं..झगड़ों का जवाब अभी भी कानून से ही निकल सकता है..बलात्कार किसी भी लड़ाई का बदला नहीं हो सकता.

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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