अगर कोरोना की दवा होती..और ये गरीबों की बीमारी होती तो क्या होता…

पूरे विश्व में सिर्फ एक खबर है कोरोना..हम कोरोना से लड़ाई में कहां हैं..जवाब है हम अभी अपने कामगारों को घर तक पहुंचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं जब खाली होंगे तो कोरोना से भी लड़ेंगे..ट्रेन से आने वाले..बस से जाने वालों की थर्मल स्कैनिंग तक नहीं कर पा रहे हैं..देश में कोरोना दूसरी स्टेज में चल रहा है दूसरी स्टेज मतलब वो वक्त जब विदेश से आए लोगों और उसके रिश्तेदारों को कोरोना हुआ है…यानी अभी कोरोना केवल अमीरों की बीमारी है..लेकिन तीसरा स्टेज तबाही लाता है जब ये आम लोगों को पकड़ता है

 

12429 बसें उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के बेड़े में हैं लेकिन उत्तर प्रदेश इधर उधर भागते अपने मजदूरों का इलाज नहीं कर पा रहा है..बात कोरोना की ही करें तो थाली वाली बजाने तक सब ठीक है..कोरोना का इलाज भी नहीं है ये भी ठीक है..लेकिन मेडिकली हम कितने मजबूत हैं उसकी भी बात होनी चाहिए..यूपी की 21 करोड़ की आबादी में 78 हजार डॉक्टर  हैं..जबकि 21 लाख डॉक्टर होने चाहिए..जब डॉक्टर नहीं हैं तो अस्पतालों की बात अपनेआप समझ जाइये..डॉक्टर कितनी आबादी पर कितने होने चाहिए ये who तय करता है..

 

मतलब विश्व स्वास्थ्य संगठन के तय मानकों के मुताबिक प्रति एक हजार की आबादी पर एक डॉक्टर होना चाहिए..लेकिन भारत में 11 हजार लोगों पर केवल एक डॉक्टर हैं..यानी तय मानक के मुकाबले 11 गुना कम डॉक्टर हमारे पास हैं..यूपी बिहार में ये आंकड़ा और खतरनाक है..

इतना ही नहीं नीति आयोग के हैल्थ इंडेक्स 2019 में 21 राज्यों की हेल्थ के बेसेस पर एक सूची बनाई गई..जिसमें 21 राज्य रखे गए..आपको जानकर हैरानी होगी कि उत्तर प्रदेश 20वें नंबर पर आया और बिहार आखिरी नंबर पर आया..केरल पहले नंबर पर है.आंध्र प्रदेश दूसरे और महाराष्ट्र तीसरे नंबर पर रहा था..फिर भी इन तीनों राज्यों में कोरोना का कहर भारत में सबसे ज्यादा है..

 

तो कुल मिलाकर हम लड़ नहीं सकते..छिप सकते हैं..इसीलिए यूपी में योगी को छोड़कर बीजेपी के सारे नेता छिप गए हैं..देश के सारे उद्योगपति छिप गए हैं..अमीर रामायण देख रहे हैं…और गरीब सड़कों पर घर जाने की महाभारत झेल रहा है..सरकार सच कह रही है कि छिप जाइये..कोरोना का इलाज होता भी तो यूपी और भारत में आपको छिपना ही पड़ता..तो प्रिवेंशन इज बेटर देन क्योर..इधर उधर भागिए मत..जहां हैं वहीं रहिए..आपकी जान जा सकती है…

 

 

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