बहुत बड़ा ऑक्सीजन घपला हुआ है ?

 दोस्तों बीजेपी के नेता विनीत शारदा अग्रवाल..एक सांस में कमल कमल कह जाते थे..लेकिन कोरोना आपदा में इनको अपनी ही सरकार से दुत्कार मिली है..बीजेपी नेता ने बीजेपी मंत्री से रेमेडिसिविर मांग लिया तो जैसे किडनी मांग ली हो..बीजेपी के नेताजी मंत्री से गाली खा गए..दूसरे आशीष पांडे जी हैं..योगी जी का ट्विटर संभालते हैं..कुछ समय तक योगी जी को इतिहास का बेस्ट सीएम बता रहे थे..लेकिन आज वो अपने ही भाई जैसे मित्र को कोरोना से नहीं बचा पाए..बाताया कि सरकार और सिस्टम ने उनके भाई को मार दिया..उत्तर प्रदेश में हाहाकार है..शलभमणि त्रिपाठी जैसे कुछ लोग मदद कर रहे हैं लेकिन उनकी मदद भी नाकाफी साबित हो रही है..बाकी सीएम साहब क्वारेंटीन इतिहास उनको किसी चीज के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराएगा..क्यों आक्रमण के समय घायल सिपाही युद्ध में ना वीर कहा जाता है और ना ही कायर..

दोस्तों स्थिति ये आ चुकी है कि कोरोना से ज्यादा उत्पात ऑक्सीजन की कमी ने मचाया है..हालात ये हैं कि नॉन कोविड अस्पतालों में मतलब जो लोग कोरोना पॉजिटिव नहीं थे वो ऑक्सीजन की कमी से तड़पकर मर गए..

और तो और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ऑक्सीजन प्लांट्स पर आदेश जारी कर दिया कि किसी व्यक्ति को ऑक्सीजन ना दी जाए..केवल संस्थानों को ऑक्सीजन दी जाए..दोस्तों अस्पतालों में जगह नहीं है..बेड नहीं हैं..डॉक्टरों की कमी है..ऐसे में ऑक्सीजन सिलेंडर लगाकर लोग घरों में अपना इलाज करवा रहे थे..मुख्यमंत्री के आदेश के बाद घरों में पड़े मरीज ऑक्सीजन की कमी से तड़पने लगे..बाद में मुख्यमंत्री कार्यालय ने थोड़ा सुधार किया कि डॉक्टर के लिखे पर्चे पर ही ऑक्सीजन सिलेंडर दिया जाए..

टीवी रिपोर्टस के मुताबिक हालात ये हुए कि ऑक्सीजन की कालाबाजारी की आशंका में सीएमओ ने प्राइवेट अस्पतालों की ऑक्सीजन सप्लाई बंद करवा दी..हालत ये हुई कि प्राइवेट अस्पताल तड़प उठे..प्राइवेट अस्पतालों के मालिक सीएमओ के चरणों में गिर गए लेकिन सही समय पर ऑक्सीजन नहीं मिला..मेव अस्पताल ने नोटिस जारी कर दिया कि हमने यूपी सरकार और सीएम से ऑक्सीजन मांगी लेकिन नहीं मिली इसलिए अपने मरीज को हायर अस्पताल में ले जाईये..असुविधा के लिए हमें खेद है..

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कोरोना की क्या हिम्मत थी..मेरे लखनऊ को ऑक्सीजन की कमी ने बर्बाद कर दिया है..कोरोना बाद में मार रहा है..ऑक्सीजन की कमी पहले मौत की सजा सुना रही है..कितनी कहानियां आपको बता हूं..

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मुझे फोन करके मेरे लखनऊ के लोग अपना दुख दर्द बता रहे हैं..मैं सरकारों को बता रही हूं लेकिन कुछ नहीं हो रहा है..लखनऊ की समाजसेवी हैं..नेहा अग्रवाल जी..पूरे लॉकडाउन भर पूरे कोरोना काल में लोगों को फ्री में रोटियां खिलाई हैं..आज उनके परिजन हॉस्पिटल में जिंदगी मौत के बीच हैं..जहां ऑक्सीजन खत्म हो गई है..दूसरों की मदद करने वाले लखनऊ के मशहूर दास्तान गो..हमांशू वाजपेयी अपनी बहन को कोरोना से नहीं बचा पाए..

किस किस का हाल बता हूं..क्या क्या कह के सुना दूं..फोन डर डरकर देखते हैं..पता नहीं कौन सा अशुभ समाचार आया हो..दोस्तों उत्तर प्रदेश के लिए दुआ कीजिए..शोक के समय में शुभ समाचारों का इंतजार है..दुआ कीजिए..चलते हैं राम राम दुआ सलाम..जय हिंद…

डिस्क्लेमर- प्रोग्राम में दिखाई गई भाषा व्यंग्यातमक है. प्रस्तोता का मक्सद किसी जाति, धर्म संप्रदाय,व्यक्ति या सरकारों को ठेस पहुंचाने या छवि धूमिल करने का नहीं है. स्थितियों के वर्णन का मक्सद समाज में सुधार लाने का है..