विद्रोह के स्वर: कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने ऐसा क्या कह दिया कि सोनिया को छोड़ना पड़ रहा अध्यक्ष पद

कांग्रेस पार्टी में सियासी घमासान के बाद अब अंदरूनी कलह मच गई है. पार्टी नेताओं ने विद्रोह कर दिया है की आखिर पार्टी का करताधर्ता गाँधी परिवार से ही क्यों, कोई और क्यों नहीं ?

congress working committee meeting sonia gandhi leadership
congress working committee meeting sonia gandhi leadership

इस बात को लेकर बहस इतनी तेज हो गई है कि पार्टी अध्यक्ष सोनिया गाँधी अपने पद से स्तीफा देने को तैयार हो गई हैं. आज कांग्रेस कार्यसमिति की आभासी बैठक हुई. इसमें मनमोहन सिंह, प्रियंका गांधी वाड्रा, कैप्टन अमरिंदर सिंह सहित कांग्रेस के नेता शामिल हुए. बैठक के दौरान पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अध्यक्ष पद के छोड़ने की पेशकश की है.

बतादें कि 23 वरिष्ठ नेताओं द्वारा लेटर बम फोड़ा गया जिसकी मुख्य वजह पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी हैं. पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गांधी को खत लिखने वाले नेता न सिर्फ राहुल की कार्यशैली से असहज हैं, बल्कि उनकी कार्यशैली को पार्टी को नुकसान पहुंचाने वाला भी मान रहे हैं. असंतुष्ट नेताओं ने दो हफ्ते पहले ये पत्र सोनिया गांधी को भेजा था लेकिन पार्टी ऐसे किसी पत्र के होने से बार-बार इनकार करती रही है.

बैठक में सोनिया ने कहा कि मुझे रिप्लेस करने की प्रक्रिया शुरू करें. इस दौरान, पूर्व मुख्यमंत्री मनमोहन सिंह और वरिष्ठ नेता एके एंटनी ने उनसे पद पर बने रहने को कहा. बतादें कि अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर सोनिया गांधी ने 10 अगस्त को एक साल का कार्यकाल पूरा किया है. 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार के बाद राहुल गाँधी ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था. तब सोनिया ने अगस्त में एक साल के लिए अंतरिम अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाली थी.

आखिर क्यों पार्टी के अंदर ऐसा विद्रोह हुआ इस पर एक नजर डालते हैं-

पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं को बदलाव जरुरी लगता है. क्योंकि पार्टी का जनाधार कम हो रहा है. 2014 के चुनाव में सोनिया गांधी अध्यक्ष थीं. तब कांग्रेस को अपने इतिहास की सबसे कम 44 सीटें ही मिली थीं. 2019 के चुनाव में राहुल गांधी अध्यक्ष थे. तब पार्टी सिर्फ 52 सीटें ही जीत सकी थी. इससे देश में कांग्रेस का कैडर कमजोर हुआ है. दूसरी तरफ 2010 में पार्टी के सदस्यों की संख्या जहां चार करोड़ थी, वहीं, अब ये एक करोड़ से कम रह गई है.

इसी के चलते कांग्रेस की 6 राज्यों छत्तीसगढ़, पुडुचेरी, पंजाब, राजस्थान, झारखंड और महाराष्ट्र में सरकार बची है. मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया के बगावत के बाद कमलनाथ की सरकार गिर गई थी. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि दिसंबर 2018 में मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार आने पर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने मुझे मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री का पद देने का प्रस्ताव किया था. लेकिन मैं समझ गया था कि 15 महीने में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह सरकार का बंटाधार कर देंगे इसलिए जनता की भलाई के लिए मैंने इसे ठुकरा दिया था.

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