CM योगी और मुख्तार अंसारी की व्‍यक्तिगत दुश्‍मनी 16 साल पुरानी है

मऊ से बसपा विधायक और गैगस्टर मुख्तार अंसारी के गुनाहों की कहानी लंबी है. पूर्वांचल में उसकी दहशत से लोग घबराते थे. गुनाहों की दुनिया की शुरुआत उसने प्रॉपर्टी डीलिंग और ठेके दिलवाने से की थी. फिर धीरे-धीरे जरायम की दुनिया में कदम रखा.

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मुख्तार अंसारी का रौला ये था कि जब उसका काफिला सड़क से गुजरता था तो किसी की मजाल जो उनके कारंवा के बीच आ जाए. एक लाइन से 786 नंबर की 20 से 30 एसयूवी गुजरती थीं. मुख्‍तार अंसारी जब चलता था तो बॉडीगार्ड और अपने गैंग के बीच सबसे लंबा दिखाई देता था.

सीएम योगी ने दी थी मुख्तार को चुनौती

मुख्तार अंसारी से कुछ हिसाब सीएम योगी आदित्यनाथ के व्‍यक्तिगत दुश्‍मनी के भी हैं. वर्ष 2005 में जब मऊ जिले में दंगे हुए थे. उस समय मुख्तार खुली गाड़ी में दंगे वाले इलाकों में घूम रहा था. उस पर दंगे भड़काने का आरोप भी लगा था. उस समय योगी गोरखुपर से सांसद थे. और योगी ने मुख्तार को चुनौती दी थी और कहा था कि वो मऊ दंगे के पीड़ितों को इंसाफ दिला के रहेंगे. वे मऊ के लिए निकल भी पड़े थे, लेकिन तब UP में बीजेपी की सरकार नहीं थी तो योगी आदित्‍यनाथ को दोहरीघाट में ही रोक दिया गया था.

आजमगढ़ में आतंकवाद के खिलाफ रैली

वर्ष 2008 में CM योगी ने मुख्‍तार को फिर ललकारा. योगी आदित्‍यनाथ ने हिंदू युवा वाहिनी के नेतृत्व में ऐलान किया था कि वे आजमगढ़ में आतंकवाद के खिलाफ रैली निकालेंगे. और सात सितंबर, 2008 को डीएवी डिग्री कॉलेज के मैदान में रैली का आयोजन किया गया था. रैली की सुबह, योगी के साथ गोरखनाथ मंदिर से करीब 40 वाहनों का काफिला निकला. सैकड़ों गाड़ियां पीछे थीं. कई सौ मोटरसाइकिलें भी योगी-योगी के नारे लगा रहे थे. योगी काफिले में सातवें नंबर की लाल एसयूवी में बैठे थे.

गोली मारने वालों को उसी भाषा में जवाब देंगे

काफिला निकल ही रहा था कि तभी एक पत्थर उनकी गाड़ी पर आकर लगा. हमला सुनियोजित था. उस वक्‍त योगी ने सकेंत दिए थे कि हमला मुख्‍तार अंसारी ने करवाया है. योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि काफिले पर लगातार एक पक्ष से गोलियां चल रही थी, गाड़ियों को तोड़ा जा रहा था पुलिस मौन बनी रही. योगी ने उसी समय कहा था कि हम इस लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे, जिसने भी गोली मारी है अगर पुलिस कार्रवाई नहीं करेगी तो गोली मारने वालों को उसी भाषा में जवाब दिया जाएगा.

केस लगते गए और रिहा होता गया मुख्तार

साल 2009 में गैंगस्टर मुख्तार के खिलाफ हत्या के 10 सहित 48 एफआईआर दर्ज थे. मऊ में ठेकेदार अजय प्रकाश सिंह की हत्या में भी अंसारी का नाम आया लेकिन 2017 में इस हत्याकांड में भी अंसारी गाजीपुर की एक स्थानीय अदालत से छूट गया. और अजय प्रकाश सिंह की हत्या के चश्मदीद राम सिंह मौर्या की भी हत्या 2010 में हो गई. इस हत्या में भी कथित भूमिका के लिए अंसारी के खिलाफ केस दर्ज हुआ.

नवंबर 2005 में उस पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधायक कृष्णानंद राय की हत्या कराने के आरोप उस पर लगे. लेकिन जिस समय राय की हत्या हुई उस समय अंसारी जेल में बंद था और जुलाई 2019 में सीबीआई की विशेष अदालत ने अंसारी को रिहा कर दिया.

वक्त बदलते ही व्‍हीलचेयर पर आ गया मुख्तार

2017 में UP में बीजेपी की सरकार आई और वक्त ने ऐसी करवट ली कि आज बाहुबली मुख्तार व्‍हीलचेयर पर आ चुका है. फिरौती के एक मामले में गैंगस्टर मुख्तार पंजाब की रूपनगर जेल में जनवरी 2019 से बंद था. कोर्ट में यूपी सरकार ने दलील दी थी कि अंसारी के खिलाफ गुनाहों की फेहरिस्त लंबी है जिनका निपटारा किया जाना है. कोर्ट ने भी मुख़्तार को UP लाने का आदेश दे दिया. मुख्तार ने यूपी पुलिस के हत्थे न चढ़ने के लिए तमाम हथकंडे अपनाए लेकिन सुप्रीम कोर्ट में उसकी हर चाल धरी की धरी रह गई.

योगी सरकार हर अपराध का हिसाब लेगी

अब माफिया मुख्तार अंसारी यूपी की जेल में पहुंच चुका है. अंसारी अब बांदा की जेल में बंद रहेगा. मुख्तार अंसारी भी इस बात को भली भंती जानता है कि बांदा जेल में उसकी डगर कठिन होगी क्‍योंकि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार उसके हर अपराध का हिसाब लेने वाली है.

मुख्तार के परिवार में कौन क्या था ?

मुख्तार अंसारी के दादा आजादी से पहले भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष थे. उनका नाम भी मुख्तार था. मुख़्तार के नाना ब्रिगेडियर मोहम्मद उस्मान महावीर चक्र विजेता थे. आपको उप राष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी तो याद ही होंगे वो मुख्तार के चाचा हैं. वहीं बड़े भाई अफजाल अंसारी ने 2019 के चुनाव में मोदी लहर के बावजूद केंद्रीय रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा को गाजीपुर से हराया था. खुद मुख्तार भी 5वीं बार विधायक है.

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