कोटा अस्पताल में 103 बच्चों की मौत पर गरमाई सियासत, गहलोत-प्रियंका पर बरसे CM योगी-मायावती

राजस्थान में कोटा के जेके लोन अस्पताल में बच्चों की मौत का सिलसिला लगातार जारी है. जिसके बाद अब राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर सवाल उठने लगे हैं और सियासत भी गर्मा गई है.

cm yogi and mayawati Attack gehlot and priyanka in kota child deaths
cm yogi and mayawati Attack gehlot and priyanka in kota child deaths

एक महीने के अंदर बच्चों की मौत का आंकड़ा 103 तक पहुंच गया है. इस बड़ी लापरवाही के बाद अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बुरी तरह से घिर गए हैं. इस घटना पर बसपा प्रमुख मायावती और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनपर जोरदार हमला बोला है. पूरे साल 2019 की बात करें तो यहां 963 बच्चों ने दम ताेड़ा है. वहीं 2018 में 1005 शिशुओं की मौत हुई थी.

मायावती ने ट्वीट करते हुए लिखा कि कांग्रेस शासित राजस्थान के कोटा जिले में हाल ही में लगभग 100 मासूम बच्चों की मौत से माओं का गोद उजड़ना अति-दुःखद व दर्दनाक. फिर भी वहाँ के सीएम गहलोत स्वयं और उनकी सरकार इसके प्रति अभी भी उदासीन, असंवेदनशील और गैर-जिम्मेदार बने हुए हैं, जो अति-निन्दनीय है.

और प्रियंका गांधी का नाम लिए बगैर सवाल उठाया कि कांग्रेस पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और खासकर महिला महासचिव की इस मामले में चुप्पी साधे रखना अति दुःखद है. अच्छा होता कि वो यू.पी. की तरह उन गरीब पीड़ित माओं से भी जाकर मिलती, जिनकी गोद केवल उनकी पार्टी की सरकार की लापरवाही आदि के कारण उजड़ गई हैं.

और अगर कांग्रेस की महिला राष्ट्रीय महासचिव राजस्थान के कोटा में जाकर मृतक बच्चों की ‘‘माओं‘‘ से नहीं मिलती हैं तो यहाँ अभी तक किसी भी मामले में यू.पी. पीड़ितों के परिवार से मिलना केवल इनका ये राजनैतिक स्वार्थ और कोरी नाटकबाजी ही मानी जायेगी, जिससे यू.पी. की जनता को सर्तक रहना है.

यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने लगातार बच्चों की मौत पर कहा कि प्रियंका यूपी में राजनीतिक नौटंकी की जगह राजस्थान में उन गरीब माताओं से मिलतीं, जिनकी गोद उनकी पार्टी की सरकार की लापरवाही से सूनी हो गई तो उन परिवारों को सांत्वना मिलती. इनको न किसी की चिंता है, न संवेदना. सिर्फ राजनीति करनी है.

नवजातों में 3 तरह की समस्याएं-
  • हाइपोथर्मिया : ये बच्चे में तापमान की कमी से होती है, जिसे ट्रांसपोर्ट इंक्यूबेटर या कंगारू मदर केयर से मेंटेन किया जा सकता है.
  • हाइपोग्लाइसीमिया : ग्लूकोज की कमी से होती है. बच्चे को दूध पिलाते हुए लाएं. अगर दूध नहीं है तो 10% ग्लूकोज फीड कराएं.
  • हाइपोक्सिया : ऑक्सीजन की कमी. ट्रांसपोर्टेशन के दौरान ऑक्सीजन का इंतजाम होना चाहिए, तभी बचाया जा सकता है.

बच्चों की मौतों पर सफाई देते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कोटा में हुई बीमार शिशुओं की मृत्यु पर सरकार संवेदनशील है. इस पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. कोटा के इस अस्पताल में शिशुओं की मृत्यु दर लगातार कम हो रही है. हम आगे इसे और भी कम करने के लिए प्रयास करेंगे. मां और बच्चे स्वस्थ रहें ये हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. स्वास्थ्य सेवाओं में और सुधार के लिए भारत सरकार के विशेषज्ञ दल का भी स्वागत है. निरोगी राजस्थान हमारी प्राथमिकता है. साथ ही गहलोत ने दावा किया कि सरकार पूरी तरह मुस्तैद है. पिछले 5-6 सालों में यहां हो रहीं मौतों का आंकड़ा इस बार कम है.

वहीं पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी नाराजगी जताते हुए बृहस्पतिवार को राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडेय को तलब कर उनसे इस बारे में रिपोर्ट मांगी है. मुलाकात के बाद पांडेय ने बताया कि कोटा को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष बेहद चिंतित हैं.

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