पद संभालते ही जस्टिस रंजन ने खारिज की भाजपा नेता की याचिका, दिए सख्त निर्देश

भारत के मुख्य न्‍यायाधीश दीपक मिश्रा दो अक्‍टूबर को सेवानिवृत्त हो गए। उन्होंने अपना पद छोड़ते हुए सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ जज रंजन गोगोई को अपने उत्तराधिकारी के रूप में नामांकित किया। रंजन गोगोई ने तीन अक्‍टूबर को मुख्य न्‍यायाधीश पद की शपथ ली। जस्टिस गोगोई इस पद पर पहुंचने वाले पूर्वोत्‍तर भारत के पहले मुख्‍य न्‍यायधीश हैं।

जनहित याचिका खारिज

कामकाज के पहले ही दिन जस्टिस रंजन गोगोई के सख्त तेवर देखने को मिले। गोगोई ने एक जनहित (पीआईएल) याचिका खारिज कर दी। आपको बतादें यह याचिका भाजपा नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय ने दाखिल की थी। जिसमें चुनाव सुधारों को लेकर बात कही गई थी, इसके साथ ही याचिका में उपाध्याय ने चुनावी खर्च का ब्योरा देने की अवधि घटाए जाने की मांग की थी। चुनाव हारने वाले उम्मीदवार भी अपने चुनावी खर्च का ब्योरा दें। उपाध्याय ने केंद्र सरकार को चुनावी याचिकाओं के जल्द निपटारे और हाईकोर्ट में ऐसे मामलों की सुनवाई छह महीने या साल में पूरी करने के लिए अतिरिक्त जजों की नियुक्ति के निर्देश दिए जाने की मांग की थी।

रंजन गोगोई ने दिए सख्त निर्देश

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याचिका खारिज करते हुए रंजन गोगोई ने यह स्पष्ट कर दिया कि सुप्रीम कोर्ट में तभी जल्द सुनवाई के लिए आ सकते हैं, जब किसी को फांसी होने वाली हो, कोई मरने वाला हो या फिर कोई डिमोलेशन जैसी कार्रवाई का मामला हो। दरअसल सुनवाई के वक्त गोगोई उपाध्याय से नाराज हो गए थे। उपाध्याय अपने वकील को कुछ बताने लगे जिसे देख रंजन गोगोई ने सख्त लहजे में कहा कि खुद आप पेटिशनर इन पर्सन नहीं हैं लेकिन इस तरह कैसे वकील को समझा सकते हैं। आपकी याचिका इसी आधार पर खारिज की जाती है। इसके बाद वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी एक मुद्दा उठाया। उन्होंने 6 रोहिंग्या को डिपोर्ट करने का मामला जज के सामने रखा तो CJI ने कहा कि पहले याचिका दाखिल करें फिर देखेंगे क्या करना है।

यह फैसला होगा अहम

जल्द ही रंजन गोगोई के सामने देश का सबसे बड़ा मुद्दा आने वाला है जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। वह मुद्दा है अयोध्या में राम मंदिर। इसे निपटाना उनके समक्ष एक बड़ी चुनौती होगी। इस मामले में 28 अक्‍टूबर को शीर्ष अदालत की तीन जजों की बेंच सुनवाई शुरू करने जा रही है। जिसमें नए सीजेआइ गोगाेई को तीन बेंच के लिए जजों का ऐलान करना है।