आस्था का महापर्व छठ, क्यों दिया जाता है सूर्य को अ‌र्घ्य, मिट जाती हैं ये परेशानियां, ऐसे करें –

लोक आस्था का महापर्व छठ शुरू हो चुका है. चार दिवसीय अनुष्ठान गुरुवार को नहाय-खाय के साथ आरंभ हो गया था. व्रत के दूसरे दिन शुक्रवार को खरना की पूजा की गई है. छठ व्रत संतान, सुख, स्वास्थ्य, आयु आदि के लिए किया जाता है.

chhath puja 2019 second day nahay khay full process of puja
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खरना पूजा के लिए व्रतियों ने सुबह से ही निर्जला व्रत रखा था. रात में व्रती गेहूं के आटे की रोटी, गुड़़-चावल और दूध से बनी खीर के साथ फल-फूल, मिठाई से खरना की पूजा की. पूजा करने के बाद व्रतियों ने प्रसाद ग्रहण किया है. महिलाएं भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना करने के बाद ही शाम में प्रसाद ग्रहण करती हैं. उसके बाद घर-परिवार, सगे संबंधी खरना का प्रसाद ग्रहण करते हैं.

प्रसाद ग्रहण करने के साथ ही 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो चुका है. व्रती अगले 36 से 40 घंटे तक कुछ भी नहीं खाएंगे, जबतक कि वो उगते सूर्य को अर्घ्य ना दे लें.

  • अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य – शनिवार शाम 5.32 बजे तक
  • प्रात:काल सूर्य को अर्घ्य – रविवार सुबह 6.29 बजे के बाद

आज शनिवार दो नवंबर को व्रती शाम को अर्घ्य त्रिपुष्कर योग में देंगी. उसके बाद तीन नवंबर रविवार को उगते सूर्य को सर्वार्थ-सिद्धि योग में भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करेंगी.

सूर्य को भगवान विष्णु का प्रत्यक्ष रूप माना जाता है. और कार्तिक मास में भगवान विष्णु जल में रहते हैं. तो ये मान्यता है कि नदी या तालाब में प्रवेश कर अर्घ्य देने से भगवान विष्णु और सूर्य दोनों की पूजा एक साथ हो जाती है. वहीं ये भी मान्यता है कि गंगा, यमुना, सरस्वती सभी पापों और कष्टों को हर लेती हैं. इसलिए भी जल में अर्ध्य देने की परम्परा है.

माना जाता है कि सुबह के समय सूर्य की पूजा से स्वास्थ्य अच्छा रहता है. शाम को अर्घ्य देने से जीवन में संपन्नता आती है. ऐसा कहा जाता है कि शाम के समय सूर्य अपनी दूसरी पत्नी प्रत्युषा के साथ रहते हैं. यही कारण है कि सूर्य को शाम के समय अर्घ्य देने से देवी प्रत्युषा प्रसन्न होती हैं. इससे भक्तों के घर संपन्नता आती है और उनकी सारी परेशानियां दूर होती हैं.

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