चांद की चौथी कक्षा में सफलतापूर्वक पहुंचा चंद्रयान-2, अब सिर्फ 164 किमी की है दूरी, देखें नज़ारा-

चंद्रयान-2 ने शुक्रवार शाम 6:18 बजे सफलतापूर्वक चांद की चौथी कक्षा में प्रवेश कर लिया है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने शुक्रवार को बताया कि उपग्रह के सभी उपकरण सही सलामत हैं और अच्छी तरह से काम कर रहे हैं.

chandrayaan-2 successfully enters in fourth lunar orbit
chandrayaan-2 successfully enters in fourth lunar orbit

कक्षा में बदलाव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 30 अगस्त,2019 को शाम 6.18 बजे किया गया है. इसमें 1155 सेकेंड का समय लगा. एक सितंबर को शाम छह से सात बजे के बीच चंद्रयान-2 को चांद की पांचवीं कक्षा में डाला जाएगा. उसके बाद दो सिंतबर को ऑर्बिटर से लैंडर अलग हो जाएगा और चांद के 100 किलोमीटर की एपोजी और 30 किलोमीटर की पेरीजी में पहुंच जाएगा. इसके बाद चंद्रयान-2 चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर सात सितंबर को सॉफ्ट लैंडिंग को लेकर कई जटिल प्रक्रियाओं से गुजरेगा.

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इससे पहले 28 अगस्त को यह यह तीसरी कक्षा में पहुंचा था. 20 अगस्त को चंद्रयान-2 सफलतापूर्वक चांद की कक्षा में पहुंचा था. कक्षा में पूरी तरह स्थापित होने में इसे करीब आधा घंटा लगा था. द्रयान-2 ने 26 अगस्त को दूसरी बार चांद की तस्वीरें भेजी थीं। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने ट्वीट कर बताया था कि भेजी गई तस्वीरें चांद की सतह से 4375 किमी ऊपर से टैरेन मैपिंग कैमरे के जरिए ली गई हैं.

चंद्रमा की सतह पर उतरना किसी विमान के उतरने जैसा बिलकुल भी नहीं है. श्रीहरिकोटा से निकला बाहुबली रॉकेट का एक हिस्सा लैंडर विक्रम 6-7 सितंबर के आस-पास चंद्रमा की सतह पर उतरेगा. इसी दौरान कई तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है.

सबसे बड़ी चुनौती ये होगी कि चंद्रयान-2 के रोवर और लैंडर चंद्रमा पर सही जगह और आसानी के लैंड कर जायें. चांद पर रोवर और लैंडर को आराम से उतारने के लिए प्रोपल्शन सिस्टम और आनबोर्ड कंप्यूटर का काम मुख्य रूप से होगा. और ये सभी काम खुद-ब-खुद होंगे. इसको कोई कंट्रोल नहीं कर सकता है.

अब चांद की सतह पर उतरने में क्या होगा ये भी जान लिजिये- जैसे ही लैंडर चांद की सतह पर अपना प्रोपल्शन सिस्टम आन करेगा, वहां तेजी से धूल उड़ेगी. और ये धूल उड़कर लैंडर के सोलर पैनल पर जमा हो सकती है, इससे बिजली आपूर्ति बाधित हो सकती है. ये भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी. अगर ऐसा हुआ तो आनबोर्ड कंप्यूटर के सेंसरों पर भी असर पड़ सकता है.

चंद्रयान-2 के चांद पर लैंड करने के बाद लैंडर और रोवर अपना काम शुरू करेंगे. इन दोनों का चांद पर एक दिन का काम पृथ्वी के 14 दिन के बराबर होगा. क्योंकि चांद का एक दिन या एक रात धरती के 14 दिन के बराबर होता है. जिसकी वजह से चांद की सतह पर तापमान तेजी से बदलता है. इसलिए लैंडर और रोवर के काम में बाधा आ सकती है.

चंद्रयान-2 में कुल 13 पेलोड हैं. आठ आर्बिटर में, तीन पेलोड लैंडर विक्रेम और दो पेलोड रोवर प्रज्ञान में हैं. पांच पेलोड भारत के, तीन यूरोप, दो अमेरिका और एक बुल्गारिया के हैं. चंद्रयान-2 की कुल लागत 978 करोड़ रुपये है.

चंद्रयान- 2 का मकसद
  • भूकंपीय गतिविधियों का अध्ययन करना.
  • चंद्रमा पर पानी की मात्रा का अनुमान लगाना.
  • चंद्रमा के बाहरी वातावरण की ताप-भौतिकी गुणों का विश्लेषण है.
  • चांद की जमीन में मौजूद खनिजों एवं रसायनों तथा उनके वितरण का अध्ययन करना.