आपदा में भी अवसर..उत्सव में भी अवसर भीड़ देखकर दोगुने किए टिकट के दाम.

PRAGYA KA PANNA
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सरकार ने आपदा में कौन कौन से अवसर तलाशे..आपदा बताकर आपके कहां कहां महंगाई की सूई लगाई..महीने के आखिर में आपको मालूम चल जाता होगा..लेकिन अब नई बात ये है कि सरकार ने उत्सव में भी अवसर खोज लिया है..दोस्तों सरकार ने रेलवे स्टेशन पर प्लेफॉर्म टिकट के दाम 10 रूपए से बढ़ाकर 20 रूपए कर दिए हैं..और दाम बढ़ने (Plateform Ticket Hike) का कारण ये बताया है कि भइया त्योहारों में रेलवे स्टेशन पर बहुत भीड़ हो जाती है..भीड़ कम करने के लिए दाम बढ़ा दिए हैं..समझ रहे हैं..ये सब वही नेता कर रहे हैं..

जो रैलियों में भीड़ लाने के लिए मरे जाते हैं..तब नहीं कहते हैं..कि हमारी रैली की वजह से सड़क पर बहुत जाम लगता है..लोगों को बहुत तकलीफ होती है..इसलिए हम मंच लगाकर अकेले ही भाषण देंगे..लेकिन नहीं तब तो बिना भीड़ देखे..आंते सूख जाती हैं..हर हाल में भीड़ चाहिए..200-200 रूपए और खाने का लालच देकर (Plateform Ticket Hike) भीड़ बुलाते हैं..घर से लाते हैं..और घर तक छोड़ने जाते हैं…डीएम कप्तान टाइप के लोग कंडक्टर बने घूमते हैं..यूपी में रैली होती है तो दिल्ली बिहार से ट्रेन में भर भरकर लोग लाए जाते हैं..तब नहीं रेलवे स्टेशन पर भीड़ हो जाती है..ठीक कह रही हूं ना..रैली के मैदान में यूपीएससी का पेपर तो लगा नहीं होता है..भाषण सुनने के लिए ही बुलाते हो ना..

वो भीड़ तुम्हारे वोट के लिए आ रही है..तो पइसा देकर बुलाते हो..और ये भीड़ त्योहारों पर टिकट खरीदकर अपने घर जा रही है..तो तुम्हारे पेट में दर्द हो गया कि नहीं नहीं 10 रूपए के टिकटवा मा काम नहीं चलेगा..ससुर इ सब त्योहार में जाएगा तो है ही मानेगा नहीं ना..एही लिए कर दो प्लेटफार्ट का टिकट डबल..ऐही अच्छा मौका है..कर दो वसूल गैंग को एक्टिव..प्लेटफार्म टिकट ना हो गया…प्रीमीयम तत्काल का टिकट हो गया..भीड़ देखी नहीं कि दाम बढ़ा दिए..ये सरासर सरकारी लूट है..

तेल पर दाम बढ़ाया तो कहा..देश के विकास के लिए बढ़ा दिया..इतिहास में पहली बार आटा दाल चालव पर टैक्स लग गया..तो कहा देश के विकास के लिए लगा दिया ..हर चीज में महंगाई सुरसा के मुंह की तरह बढ़ती जा रही है..हर बात पर कहते हैं देश को महंगाई की सूई विकास के लिए लगा रहे हैं…लेकिन अइसा भी कौन सा विकास है जो सेंट्रल विस्टा..और चुनावी रेवड़ी (Plateform Ticket Hike) बांटने के अलावा दिखाई ही नहीं देता..समूचे भारत वर्ष ने विकास तो सिर्फ अडानी भाईसाहब का ही देखा है..दुनिया के नंबर दो अमीर आदमी बन गए हैं..

ये बताओ भइया सरकार जब तुम्हारे पास पैसे नहीं हैं..जिधर भीड़ देखते हो उधर वसूली गैंग बिठा देते हो..तो फिर अडानी अंबानी जैसों का हजारों करोड़ का कर्जा माफ काहे किया..भारत के लोगों के टैक्स का पइसा उठाकर उद्योगपतियों को काहे दे दिया..आम आदमी से प्लेटफार्म पर भी जाने का दोगुना वसूल लेते हो..आंटा दाल चालव दूध दही निवाले तक पर टैक्स लगा देते हो..लेकिन व्यारियों का कर्जा माफ कर देते हो..वार रे सरकार..ऐसी सरकार पहली बार देखी है..जो अपनी जनता से भीड़ का पूर्वानुमान लगाकर दोगुना पैसे वसूल लेती है..और उद्योगपतियों को मुफ्त में बांट देती है..

सरकारों का काम है अपने लोगों को सुविधाएं देना..ना कि भीड़ देखकर वसूली करना..सरकार को तो ये कहना चाहिए कि त्योहार आ गए हैं..जैसे हम रैलियों में फ्री लोगों को भर भर के लाते थे..वैसे ही फ्री लोगों को घर पहुंचाएंगे..त्योहार आ गए हैं तो किराया आधा कर देंगे..नहीं ये सब नहीं होगा..ये केवल रैलियों में ही होगा..एक बार लोगों ने वोट दे दिया..अब 5 साल कहां जाओगे.आजादी के इतिहास में ये पहली बार हुआ है कि त्योहार में भीड़ को देखकर टिकट के दाम दोगुने कर दिए गए हों..

सब भक्ति रस में डूबे हैं..कोई बोलेगा नहीं मैं ये बात बहुत अच्छे से जानती हूं..मैं ये भी जानती हूं..कि जिसको प्लेटफॉर्म पर जाना होगा वो 20 दे ही देगा..20 रूपए किसके पास नहीं हैं..लेकिन सरकार को हमने भीड़ देखकर वसूली करने के लिए नहीं..एक सिस्टम बनाकर हमें सहूलियत देने के लिए चुना है..जिन विदेशों में डंकापति (Plateform Ticket Hike) का डंका बजने की कोल कपोल कहानियां सुनाई जाती हैं..उन देशों से सीखिए….वो त्योहारों पर प्लेटफॉर्म टिकट के दाम नहीं बढ़ाते..वो बिजली पानी..अस्पताल..ट्रांसपोर्ट अपनी जनता को फ्री में देते हैं..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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