उद्योगपतियों को बांटा, बुजुर्ग रेल यात्रियों को डाटा..

PRAGYA KA PANNA
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रेलवे में अब से बुजुर्गों को किराए में मिलने वाली छूट नहीं मिलेगी..क्यों नहीं मिलेगी क्योंकि..भारत के बुजुर्ग रेलवे पर बोझ थे..रेलवे ये बोझ आधे पैसे में नहीं ढ़ोना चाहता था..बस इसलिए छूट बंद कर दी..रेलवे अंग्रेजों के जमाने से चल रहा है..तमाम सरकारें (Distributed industrialists, Scolded the Elderly) आईं तमाम चली गईं लेकिन किसी ने बुजुर्गों को बोझ नहीं समझा..नया भारत बनाने निकली सरकार ने बुजुर्गों को बोझ मान लिया..

प्रधानमंत्री ने कुछ दिन पहले कहा था कि रेवड़ी कल्चर बहुत खतरनाक है..तब कोई नहीं समझ पाया था कि क्या क्या छीना जाने वाला है…लेकिन अब जब आप क्रोनोलॉजी (Distributed industrialists, Scolded the Elderly) समझेंगे तो समझ जाएंगे..कि चुनाव भर अपनी फोटो लगा लगाकर फ्री की रेवड़ी बांटने वाले प्रधानमंत्री अचानक फ्री की सुविधाओं को..जो देना सरकार की जिम्मेदारी है..उसे रेवड़ी क्यों कहने लगे थे..

दोस्तों सरकार ने घरेलू गैस सिलेंडर से सब्सिडी खत्म कर दी..ठीक है आप राजा हैं..आपका जो मन आएगा आप करेंगे..हिंदू मुसलमान होकर जनत पूछने का अधिकार पहले ही खो चुकी है..इसलिए वो पूछ नहीं सकती..आपने इतिहास में पहली बार (Distributed industrialists, Scolded the Elderly) अनाज पर टैक्स लगा दिया..दूध दही पर टैक्स लगा दिया..आप राजा हैं आपसे कौन पूछ सकता है..ना ही आप बताएंगे..आपने रेलवे में बुजुर्गों को मिलने वाली 50 प्रतिशत की छूट खत्म कर दी..आप राजा हैं..आप माई बाप हैं..आपकी जो मर्जी में आएगा वो खत्म कर देंगे..

लेकिन आप जनता की गर्दन पर महंगाई का चाकू रखकर उद्योगपतियों का कर्जा नहीं माफ कर सकते..धन्नासेठ लोगों के पास पैसे की क्या कमी आ गयी कि सरकार ने उनका कर्जा माफ कर दिया..सरकारी पैसे देश के नागरिकों के पैसे हैं..ये वो पैसे हैं जो टैक्स लगा लगाकर..सब्सिडी खत्म करके..बुजुर्गों से बुढ़ापे (Distributed industrialists, Scolded the Elderly) यात्रा का सहारा छीनकर..सरकारी कंपनियां बेचकर सरकारी तिजोरी में भर रहे हैं..सरकार को कोई हक कोई अधिकार और कोई अख्तियार नहीं है कि भारत के आम नागरिकों के पैसे से धन्ना सेठों का कर्जा माफ कर दे…

बहुत से लोग सरकार से सवाल ना करने पड़ें इस डर से विदेशों में क्या चल रहा है..वो ट्विट करके अपना मन बहलाते हैं..सरकार थोड़े से पैसे एड के नाम पर फेंक देती है..उतने में ही देश की बात छोड़कर विदेशी खबरें आपको बताने लगते हैं लेकिन मुझसे देखकर मक्की नहीं निगली जाएगी..मैं देश को इस हाल में देखकर भी आंख (Distributed industrialists, Scolded the Elderly) नहीं बंद कर पाऊंगी..दोस्तों जो लोग ये सोच रहे हैं कि रेलवे में सीनियर सिटीजन की छूट अब खत्म की गई है तो ऐसा नहीं है..मार्च 2020 से बुजुर्गों को यात्रा में छूट नहीं मिल रही है..और किसी को कुछ नहीं मालूम..ये पता कैसे चला ये भी समझिए..

मध्य प्रदेश के एक सज्जन हैं चंद्रशेखर गौड़ उन्होंने अपने घर के बुजुर्गों का टिकट किया होगा..उनको छूट नहीं मिली होगी..उसके बाद उन्होंने डाल दी आरटीआई..और रेलवे से सवाल पूछ लिया तो पता चला कि 20 मार्च, 2020 और 31 मार्च, 2022 के इन दो साल के बीच सरकार ने 7 करोड़ 31 लाख सीनियर सिटीजन (Distributed industrialists, Scolded the Elderly) को छूट नहीं दी है..और बुजुर्गों का पैसा काटकर 15 सौ करोड़ रूपए कमा लिए हैं..तो भइया..सब कुछ छीन लो भारत के लोगों से पइसा ही पइसा इकट्ठा हो जाएगा..पहली बार ऐसी सरकार देखी है जो कुछ बनाकर..उद्योग धंधा लगाकर पैसे कमाने में खुद को बारहां नहीं बताती पैसे काट काटकर टैक्स लगा लगाकर पैसे कमा रही है..

रेलवे के सरकारी सिस्टम में 60 साल से ऊपर का आदमी बुजुर्ग होता है..और 58 साल की अम्मा बुजुर्ग होती हैं..मतलब सीनियर सिटीजन होते हैं..अब से ट्रेन में चलना है तो पूरे पैसे देने पड़ेंगे..भारतीय रेलवे की हालत गड़बड़ (Distributed industrialists, Scolded the Elderly) है ये तो मालूम था लेकिन इतना नहीं मालूम था कि सरकार बुजुर्गों को मिलने वाली राहत तक छीन लेगी..दिन रात ट्विट करने वाले नेता मंत्री हर बात का ढोल पीटते हैं..लेकिन बुजुर्गों को रेलवे में मिलने वाला सहारा छीन लिया है ये ट्विट करने में शर्म आती है क्यों ये भी ट्विट करिए..

सारी सरकारों में रेलवे को कोई दिक्कत नहीं थी..कभी घाटे में रही कभी फायदे में लेकिन भारत की बीजेपी सरकार ने सरकारी पटरियों पर प्राइवेट ट्रेनें भी दौड़ा दीं..कर्मचारी भी कम कर दिए..ट्रेन का किराया (Distributed industrialists, Scolded the Elderly) प्लेन जितना भी कर दिया..लेकिन फिर भी रेलवे में बरक्कत नाम की चीज ही नहीं है..26 हजार करोड़ रुपए के घाटे में है..इतनी भयंकर जनसंख्या होने बाद भी..इतना ज्यादा किराया वसूलने के बाद भी..दो साल से बुजुर्ग लोगों का अधिकार मार लेने के बाद भी अगर रेलवे घाटे में है..तो गलती देश की नहीं है..गलती देश चलाने वालों की है..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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