70 से 80 हजार कर्मचारियों को वॉलंटरी रिटायरमेंट देने जा रही है BSNL, वेतन के लाले

आर्थिक तंगी का सबसे बड़ा असर सरकारी टेलिकॉम कंपनी बीएसएनएल पर पड़ा है. बीएसएनएल में अब कर्मचारियों को समय से वेतन न मिलना एक आम बात हो गई है.

bsnl give vrs to 70-80 thousand employees
bsnl give vrs to 70-80 thousand employees

भारत संचार निगम लिमिटेड एक तरफ जमीन किराये पर देकर पैसे जुटा रही है तो दूसरी तरफ खर्च में कटौती के लिए अपने आधे कर्मचारियों को वॉलंटरी रिटायरमेंट देने को तैयार है. विभाग पूरी कवायद में जुटा है कि कर्मचारियों को वेतन निर्गत कर दिया जाए लेकिन आर्थिक संकट के चलते धन का जुगाड़ नहीं हो पा रहा है. पांच बैंकों ने भी विभाग की हालत देखते हुए ऋण देने से हाथ खड़े कर दिए हैं.

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कंपनी के झारखंड सीजीएम (मुख्य महाप्रबंधक) केके ठाकुर ने कहा कि बीएसएनएल के अधिकतर टावर ग्रामीण इलाकों में हैं. लेकिन नियमित बिजली आपूर्ति नहीं होने के कारण ये टावर अधिकतर समय बंद रहते हैं. जिससे कंपनी के राजस्व का भारी नुकसान हो रहा है. स्थिति ये है कि टावर चालू रखने के लिए कंपनी डीजल तक उपलब्ध नहीं करा पा रही है. बतादें कि वेतन न मिलने से देश भर में 1.65 लाख कर्मचारी प्रभावित होंगे.

BSNL के चेयरमैन प्रवीण कुमार पुरवार ने बताया की कंपनी आधे कर्मचारियों को वॉलंटरी रिटायरमेंट देने को तैयार है. सरकार से मंजूरी मिलते ही इन कर्मचारियों को एक आकर्षक पैकेज देकर रिटायर कर दिया जाएगा. हम 70 से 80 हजार कर्मचारियों को VRS देना चाहते हैं. इसे आकर्षक बनाया जाएगा ताकि उन्हें यह पंसद आए. उसके बाद हम काम चालने के लिए आउटसोर्सिंग करेंगे. लोगों को मासिक कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर रखने का भी विकल्प होगा. अगर 60 से 70 हजार भी VRS लेते हैं तो 1 लाख कर्मचारी बचेंगे.

बीएसएनएल इंप्लाइज यूनियन के राष्ट्रीय महासचिव पी अभिमन्यु कहते हैं कि जितना बताया जा रहा है हालात उतने खराब नहीं हैं. कर्मचारी डरे हुए हैं. बीएसएनएल के पास कीमती भूमि हैं. इनका प्रयोग बीएसएनएल में जान फूंकने के लिए कर सकतें हैं. वहीं उत्तर प्रदेश बीएसएनएल इंप्लाइज यूनियन अध्यक्ष के डॉ. डीएन त्रिपाठी ने बताया कि देवरिया और कुशीनगर में संचालन पूरी तरह ठप है. सरकार ध्यान नहीं देगी तो यह स्थिति पूरे देश में हो जाएगी.