मुस्लिमों की चूड़ी टाइट रखना चुनावी मुद्दा क्यों होता है ? पंडित जी (Brahman) को पकड़कर क्या करोगे ? संपादकीय व्यंग्य..

PRAGYA KA PANNA
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विदेशों में दूसरे देशों में चुनाव तकनीक टेक्नॉलॉजी डेवलपमेंट..एम्पलॉयमेंट..टीम टाम लेमड़ा तैमड़ा पर वोटिंग होती है..और हमारे यहां..हिंदू (Brahman) खतरे में है..इस पर वोट पड़ता है..हमारे यहां..मुसलमान की चूड़ी टाइट रहे इस पर वोट पड़ता है..हमारे यहां..खुल्ला नेता लोग अलग अलग जातियों भी भीड़ बुलाकर उनसे जाति के नाम पर वोट मांगते हैं..फलाना जाति से कहते हैं..वोट दो जिंदगी बना देंगे..ढिमाकाने से कहते हैं..वोट दे दो..मजा करा देंगे..कोई नहीं पूछता सरकार में थे तो हमारे लड़के को नौकरी क्यों नहीं लगी..कोई नहीं पूछता कि सरकार में थे..हमारे खेत सांड क्यों चर गए..कोई नहीं पूछता कि इतने सालो में सड़कों ये दुर्दशा क्यों है..कोई नहीं पूछता कि एमएसपी पर फसल क्यों नहीं खरीदी जाती..कोई नहीं पूछता कि गुंडागर्दी और क्राइम किसी भी सरकार में कम क्यों नहीं होती..विकास चला जाता है भाड़ में..सच ये है कि वोटर सपोर्टर और गपोर्टर मिलकर सरकार बनाते हैं..जो सामने वाले की चूड़ी टाइट करने का वचन देता है..लोग उसे ही वोट देते हैं..और यही वोटिंग पैटर्न है..

दोस्तों इस समय का हाल आपको बता रही हूं..उत्तर प्रदेश के छोटे से लेकर मोटे नेता तक..सबकी सबसे बड़ी चिंता क्या है कि ब्राह्ममण किधर जाएगा..ब्राह्ममण को पकड़ो..ब्राह्ममण को जकड़ो..ब्राह्ममण का सम्मेलन करो..ब्राह्मम्ण को समझाओ..ब्राह्म्मण को फुसलाओ..उसे जाने मत दो..निकलने मत दो..पकड़ो पकड़ो..पंडित जी को पकड़ो..अरे भईया..ब्राह्मण के पास अपना दिमाग है..33 साल से आपने भले ही उसको गद्दी पर नहीं बिठाया है लेकिन वो आज भी सोच सकता है..समझ सकता है..अपने डिसीजन ले सकता है..उसको समझाने के लिए सम्मेलन करने की जरूरत नहीं है..अपना पैसा सम्मेलन की जगह लोगों की भलाई के लिए बहाओ तो बहुत कुछ बदल जाएगा..ब्राह्मण सबसे समझदार वोटर है..जिधर जाता है शांति से जाता है..ब्राह्मण (Brahman) वोटर की खासियत है वो कभी पलटकर पूछता नहीं है..आदोलन नहीं करता है..अपनों के लिए भी आवाज नहीं उठाता..वो जवाब सिर्फ इवीएम से देता है..अगर ब्राह्मण पलट कर पार्टियों से पूछ दे तो सभी पार्टी वाले खीस निपोर देंगे..

बीजेपी वालों से ब्राह्मण (Brahman) पूछ पाता तो पूछता कि विकास दुबे कांड में 2-4 दिन पहले ब्याहकर आई खुशी दुबे को जेल में क्यों रखा है..आपकी पुलिस ने तो दूसरे दिन ही कह दिया था कि खुशी दुबे निर्दोष है उसको छोड़ दिया जाएगा..लेकिन आप उसको जेल में क्यों सड़ा रहे हैं…ठीक है कानून आपका है तो कोई भी धारा लगाईये..लेकिन 2-4 दिन पहले ब्याहकर आई लड़की के पास कौन से परमाणु बम के फार्मूले थे तो उसको जेल में बंद करके रखा है..कोई मुंह नहीं खोलता लेकिन ब्राह्ममण का वोट सबको चाहिए..

ये बसपा वाले..इनका तो नारा ही था..कि तिलक तराजू और तलवार इनको जूते मारो चार..जिनको नहीं मालूम उनके लिए और खोल देती हूं..तिलक मतलब ब्राह्मण..तराजू मतलब लाला..और तलवार मतलब ठाकुर..इतनी नफरत थी बसपा को तिलक तराजू और तलवार से लेकिन अब उसी तिलक पर लार टपक रही है..अब ब्राह्मण (Brahman) शंख बजाएगा और हाथी बढ़ता जाएगा..

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समाजवादी पार्टी को भी याद आया कि ब्राह्मण तो पेड़े में लगा हुआ वो आम है जिसे सब चूस लेना चाहते हैं..तो वो भी पीछे क्यों रहें..इसलिए समाजवादी पार्टी भी परशुराम जी की मूर्ति लगवा रही है..सबको लगता है कि ब्राह्मण (Brahman) मिठाई का भूखा होता है..सम्मान का भूखा होता है..तारीफ का भूखा होता है..लेकिन भईया वो समय जा चुका है..अब ब्राह्मण बगल में भिक्षा वाली पोटली दबाकर नहीं चलता है..ब्राह्मण के पास अपनी बुद्धि पहले भी थी और आज भी है..यूपी की सभी पार्टियां अलग अलग नामों से ब्राह्मण सम्मेलन कर रही हैं..बताईये प्रबुद्ध वर्ग सम्मेलेन चल रहे हैं..अरे भाई ब्राह्मण प्रबुद्ध हुआ तो बाकी सारी जातियां बेवकूफ हैं क्या..या फिर आप ब्राह्मण के लिए सम्मेलन करेंगे और दूसरी सारी जातियों को भेड़ बकरियों की तरह रैलियों में समझा देंगे..और वोट ले लेंगे..जातिवादिता का खुला खेल चल रहा है..abhishek

दोस्तों इसी उत्तर प्रदेश में ठाकुर सरकार है..इसी उत्तर प्रदेश में यादव और मुस्लिमों की मुली जुली सरकार थी..इसी उत्तर प्रदेश में बहुजन सरकार थी..कांग्रेस का जमाना छोड़ दीजिए तो जो लोग बाह्मणों (Brahman) की इतनी पूजा करते घूम रहे हैं..उनका सम्मेलन कराते घूम रहे हैं..अगर उनकी नजरों में ब्राह्मण इतने ही पूजनीय हैं तो किसी ब्राह्णण को यूपी का मुख्यमंत्री क्यों नहीं बना देते..अखिलेश बना दें..पवन पांडे..अभिषेक मिश्रा हैं..उनके पास मुख्यमंत्री कैंडीडेट घोषित कर दें..योगी आदित्यनाथ..के पास ब्राह्मणों की फौज है किसी को कैंडीडेट घोषित कर दें..मायावती जो ब्राह्णमणों को लेकर इतनी चिंतित हैं..अपनी पार्टी के एकलौते ब्राह्णण सतीश चंद्र मिश्रा जो केवल ब्राह्णण का सम्मेलन कराने के लिए ही बसपा में हैं..

मायावती उनको मुख्यमंत्री पद का दावेदार क्यों नहीं घोषित कर देंती..कि बहुजन समाज पार्टी से अगर अगला कोई मुख्यमंत्री बनेगा तो वो ब्राह्णण (Brahman) होगा..लेकिन ऐसा कोई नहीं करेगा..सबको वोट चाहिए..ब्राह्णणों का लोड कोई नहीं लेता..कांग्रेस से नारायण दत्त तिवारी आज से 32 साल पहले आखिरी ब्राह्णण मुख्यमंत्री थे..तब से यादव जाटव और ठाकुर के अलावा कोई और मुख्यमंत्री की गद्दी पर नहीं बैठा..यूपी में कोई और कैंडीडेट मुख्यमंत्री बनने लायक नहीं है क्या..ब्राह्मण या किसी और जाति का कोई भी आदमी राजयोग लेकर नहीं पैदा हुआ है क्या..बातें सही और खरी खरी कहती हूं..इधर वालों को भी मिर्ची लगेगी और उधर वालों को भी.दोस्तों आप लोगों से कहना चाहती हूं..जातिवादिता के खेल में बिल्कुल मत पड़ना..जिसके भीतर उत्तर प्रदेश को आगे ले जाने की क्षमता हो उसे ही वोट देना..

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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