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क्या होता है ‘ब्लैक फंगस’ ? क्या हैं इसके लक्षण ? UP में 3 लोगों की मौत

एक तरफ कोरोना का कहर दूसरी तरफ अब ब्लैक फंगस अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है. ये कोरोना संक्रमित या कोरोना से ठीक हो चुके लोगों को ज्यादा परेशान कर रहा है.

चिकित्सकों ने बताएं इसके लक्षण

चिकित्सक बताते हैं कि नाक, दांत, सीने में दर्द हो या चेहरे में सूजन आ जाना ये सभी ब्लैक फंगस के लक्षण है. ऐसी स्थिति में तत्काल चिकित्सक से संपर्क कर जांच कराएं और इलाज शुरू कराएं. कोरोना मरीजों के आलावा डायबिटीज के मरीजों का सुगर लेबल बढ़ जाने या बीमार लोग जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, उनमें भी ब्लैक फंगस का खतरा अधिक है.

ब्लैक फंगस क्या है ?

म्युकरमाइक्रोसिस या जिसे ब्लैक फंगस भी कहते हैं ये गंभीर फंगस संक्रमण है. ये रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर हमारे शरीर पर बुरा प्रभाव डालता है. ये डायबिटिक और ट्रांसप्लांट या कैंसर के रोगियों के लिए अधिक खतरनाक साबित हो सकता है. कोरोना संक्रमितों या संक्रमण से निकल चुके लोगों में ये ज्यादा देखने को मिल रहा है.

10 राज्यों में मिले ब्लैक फंगस के मरीज

देश के 10 राज्यों में म्यूकोरमाइकोसिस यानी ब्लैक फंगस के मामले देखने को मिल रहे हैं. इस बीमारी के तहत मरीज की आंख की रोशनी जाने और जबड़े और नाक की हड्डी गलने का खतरा रहता है. ये इतनी गंभीर बीमारी है इसमें सीधे मरीज को आईसीयू में भर्ती करना पड़ रहा है. ये फंगस साइनस या फेफड़ों को प्रभावित करता है.

UP ने ब्लैक फंगस से 3 मरीजों की मौत

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में ब्लैक फंगस से एक महिला रोगी की मौत हो गई है. उसका इलाज डॉक्टर राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में चल रहा था. महिला कोरोना से मुक्त हो चुकी थी. ब्लैक फंगस से लखनऊ में ये पहली मौत है. जबकि प्रदेश में अब तक इस बीमारी से तीन लोगों की जान जा चुकी है. इससे पहले दो मौतें कानपुर में हो चुकी हैं.

स्वास्थ्य विभाग को किया अलर्ट

अधिकारियों के मुताबिक, ब्लैक फंगस के कानपुर में 51, गोरखपुर में 16, लखनऊ में 8, मेरठ में 5 और वाराणसी-झांसी में 3-3, हापुड़ और मथुरा व गाजियाबाद में एक-एक मरीज मिले हैं. बीते एक हफ्ते के अंदर देशभर में ब्लैक फंगस के मामले सामने आए हैं. इसके बाद राज्य सरकारें अलर्ट हो गई हैं. योगी सरकार ने भी स्वास्थ्य विभाग को अलर्ट किया है.

हो सकती है मौत

डॉक्टर्स का कहना है कि ब्लैक फंगस खून के साथ दौड़ता है. सांस लेने के दौरान नाक और मुंह के जरिए इसके प्रवेश करने की संभावना ज्यादा रहती है. ये नाक या मुंह के रजिए प्रवेश करने के बाद खून के साथ फेफड़ों, आंख, कान और दिमांग तक पहुंच जाता है. ब्लैक फंगस का दिमाग यानी मस्तिष्क में प्रवेश करना सबसे ज्यादा खतरनाक माना गया है. इसके बाद व्यक्ति के बचने की उम्मीद कम हो जाती है. जबकि आंख, कान, नाक में होने पर इलाज हो सकता है.

सतर्कता ही बचाव का एकमात्र कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना संक्रमण या उसके डर के कारण कई बार लोग बिना डॉक्टरी सलाह के या ज़रूरत से ज़्यादा स्टेरॉयड ले लेते हैं. ऐसा करने से ब्लैक फंगस का खतरा होता है. मौजूदा वक्त में इस बीमारी से निपटने के लिए अभी सुरक्षित सिस्टम नहीं है. इसकी दवा की शॉर्टेज या कालाबाज़ारी अभी से ही कुछ जगहों पर होने की खबर आ रही है. ऐसे में विशेषज्ञ बताते हैं कि मौजूदा हालत को देखते हुए सतर्कता ही बचाव का एकमात्र कारण है.

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