कोरोना से ज्यादा खतरनाक ब्लैक-व्हाइट फंगस क्या है ? किन लोगों को होगा ? पढ़िये पूरा विश्लेषण-

कोरोना के साथ अब ब्लैक फंगस black fungus भी लोगों के लिए नई मुसीबत बन गया है. इतना ही नहीं व्हाइट फंगस white fungus के मरीज मिलने से अफरातफरी मच गई है. ये ब्लैक फंगस से ज्यादा घातक मानी जा रही है. आज हम ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस के बारे में बताने जा रहे हैं की इससे कैसे बचना है ये कैसे फैलता है इसके क्या लक्षण है ?

कोरोनावायरस शरीर में पैदा कर रहा डायबिटीज

ब्लैक फंगस से कई राज्यों में इस बीमारी के चलते लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी है. ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों पर ICMR के प्रमुख डॉ. बलराम भार्गव ने कहा कि कोरोनावायरस डायबिटीज भी दे सकती है, क्योंकि इससे शुगर बढ़ता है. इसका मतलब ये हुआ कि अगर आपको कोरोना संक्रमण से पहले शुगर की समस्या नहीं थी तो ये उसके इलाज के दौरान हो सकती है. देश भर में ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों के पीछे एक वजह ये भी हो सकती है.

ब्लैक फंगस black fungus को महामारी माना जाए

केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को चिट्ठी लिखकर कहा है कि ब्लैक फंगस को महामारी माना जाए. ब्लैक फंगस के मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी की सही समय पर पहचान जरूरी है. कोरोना से ठीक हो रहे या स्वस्थ हो चुके मरीजों के लिए जरूरी है कि ये इसके शुरुआती लक्षणों का ध्यान रखें. कोरोना वायरस से लड़ रहे मरीज के शरीर में ब्लड शूगर लेवल बढ़ने से उसकी इम्युनिटी या रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है. ऐसे कंडीशन में फंगल इंफेक्शन का खतरा कई गुना बढ़ा जाता है. जिसकी वजह से ब्लैक या व्हाइट फंगस होता है.

ऐसे लोगों को जल्दी होता है black fungus

ICMR के अनुसार म्यूकरमाइकोसिस एक फंगल इन्फेक्शन है. ये उन लोगों को निशाना बनाता है, जो दवाइयों पर चल रहे हों या उन्हें पहले से स्वास्थ्य की ऐसी परेशानियां हों, जिससे इम्युिनटी घट रही हो. ऐसे मरीजों को सांस लेने से फंगल इन्फेक्शन हो सकता है. नाक और फेफड़े इसका निशाना बनते हैं. ब्लैक फंगस खतरनाक बीमारी में भी बदल सकता है और इसके लक्षण होते हैं- नाक और आंख के पास दर्द और लाली, बुखार, सिरदर्द, कफ, सांस में दिक्कत, खूनी उल्टी, दिमागी उलझन.

-----

शरीर में शुगर का स्तर सही रखें

सर गंगाराम अस्पताल के नेत्र रोग विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर ए.के ग्रोवर ने बताया कि कई मरीज ऐसे हैं जिनको चेहरे पर सूजन और एक तरफ दर्द होने की शिकायत हुई थी. इनके अलावा इस बीमारी में पलकों का गिरना, नाक से काले रंग का तरल पदार्थ गिरना, आंख का लाल होना, धुंधला दिखना, यह सब लक्षण भी हैं. डॉ. ग्रोवर ने बताया कि इससे घबराने की ज्यादा जरूरत नहीं है. बस जरूरी है कि लोग शरीर में शुगर का स्तर सही रखें. दिन में दो समय नाक में ड्राप डालते रहें (स्लाइन वाली) और बिना डॉक्टरों कि सलाह के स्ट्राइड न लें.

मास्क भी इस फंगस से बचा सकता है

ब्लैक फंगस के इलाज में काम आने वाली दवाई एंफोटेरिसिन-बी के उत्पादन पर भी काम चल रहा है. सरकारें इस बीमारी पर जीत सुनिश्चित करने के लिए दिन रात जुटी हुई हैं. डॉक्टरों का कहना है कि जिस तरह मास्क कोरोना संक्रमण से बचाता है. उसी तरह वो ब्लैक फंगस से भी लोगों की सुरक्षा करता है. क्योकि मास्क लगाने के बाद धूल, मिट्टी या अन्य किसी प्रकार से फंगस शरीर में प्रवेश नहीं कर सकेगा. इसलिए जरूरी है कि कोरोना से ठीक होने के बाद भी लोग मास्क लगाना न छोड़ें.

व्हाइट फंगस white fungus कैसा होता है ?

व्हाइट फंगस के भी वही लक्षण हैं जो ब्लैक फंगस के हैं जैसे प्रतिरोधक क्षमता की कमी. डायबिटीज, एंटीबायोटिक का सेवन या फिर स्टेरॉयड का लंबा सेवन. कैंसर के मरीज जो दवा पर हैं, उन्हें ये जल्दी अपनी गिरफ्त में ले लेता है. व्हाइट फंगस से फेफड़ों में संक्रमण के लक्षण HRCT में कोरोना जैसे ही दिखते हैं. इसलिए इसमें अंतर करना मुश्किल होता है. ऐसे मरीजों में रैपिड एंटीजन और RT-PCR टेस्ट निगेटिव होता है. HRCT में कोरोना जैसे लक्षण (धब्बे हो) दिखने पर रैपिड एंटीबॉडी टेस्ट और फंगस के लिए बलगम का कल्चर कराना चाहिए.

इन बातों का रखें ध्यान

इन फंगस से बचने के लिए ख़ास कर ध्यान रखे की जो मरीज ऑक्सीजन या वेंटिलेटर पर हैं, उनके ऑक्सीजन या वेंटिलेटर उपकरण विशेषकर ट्यूब आदि जीवाणु मुक्त होने चाहिए. ऑक्सीजन सिलेंडर ह्यूमिडिफायर में स्ट्रेलाइज वाटर का प्रयोग करना चाहिए. जो ऑक्सीजन मरीज के फेफड़े में जाए, वो फंगस से मुक्त हो. साथ ही मरीज के बलगम के फंगस कल्चर की जांच भी करानी चाहिए. फंगस से बचने लिए किसी धूलभरी कंस्ट्रक्शन साइट पर जाते वक्त मास्क पहनें. मिट्टी में काम करते वक्त जूते और लंबे मोजे पहनें, लंबी बांह की शर्ट और ग्लव्स पहनें. सफाई बरतें और बहुत अच्छी तरह से नहाएं.

ऐसे लक्षणों से सतर्क रहें

जब आपको नाक बंद होने पर, नाक से खून या काला मैटेरियल बहने पर, चीक बोन पर लगातार दर्द होने पर या चेहरे पर एक तरफ दर्द होने पर, सुन्न होने या सूजन पर या नाक के कोने पर कालापन आने, दांत में दर्द, दांत गिरने, जबड़े ढीले पड़ने पर या दर्द के साथ धुंधलापन या दोहरी इमेज दिखने पर या थ्रोम्बाउसिस, फीवर, स्किन का रंग बदलने और खूनी कफ आने और सांस लेने में दिक्कत बढ़ने जैसे लक्षण दिखें तो सतर्क हो जाएँ और तुरंत डॉक्टर की सलाह लें.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *