भूपेंद्र पटेल ने ली गुजरात के 17वें मुख्यमंत्री पद की शपथ

Bhupendra Patel : भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) ने राजभवन में गुजरात के 17वें मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की. भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनाव से एक साल पहले विजय रुपाणी को हटाकर भूपेंद्र पटेल को मुख्यमंत्री बनाया है. भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) का नाम हर किसी के लिए चौंकाने वाला था. मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के शपथ ग्रहण के दौरान अमित शाह, शिवराज सिंह चौहान, मनोहर लाल खट्टर, प्रमोद सावंत समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे.

शपथ लेने से पहले ही मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) एक्शन में नजर आए. गुजरात के जामनगर में कई दिनों से हो रही बारिश के कारण कई गांवों में पानी भर गया है. जिससे लोग काफी परेशान ऐसे में जब नए सीाएम को मामले की जानकारी हुई तो यहां फंसे तीन लोगों को निकालने के लिए भूपेंद्र पटेल ने जिलाधिकारी से बात कर रेस्क्यू ऑपरेशन के करने की बात कही. जिसके बाद जिला प्रशासन ने बारिश में फंसे लोगों को बचाने के लिए आगे आया.

भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) ने मुख्यमंत्री पद की शपथग्रहण करने से पहले पूर्व सीएम विजय रूपाणी से गांधीनगर स्थित उनके आधिकारिक आवास पर मुलाकात की. विजय रूपाणी ने गुजरात में होने वाले विधानसभा चुनाव के 15 महीने पहले मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था.

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शपथ ग्रहण से पहले भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) अहमदाबाद में अलग-अलग कई नेताओं से मुलाकात की. सीआर पाटिल, विजय रुपाणी, नितिन पटेल से वह मुलाकात की. वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों का भी अहमदाबाद पहुंचना जारी रहा, ये सभी मुख्यमंत्री पद के शपथ ग्रहण में हिस्सा लेने पहुंचे थे.

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अहमदाबाद में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का भूपेंद्र पटेल, सीआर पाटिल, नरेंद्र सिंह तोमर, मनसुख मांडविया, नितिन पटेल समेत अन्य कई नेताओं गृहमंत्री का एयरपोर्ट पर स्वागत किया. जहा से अमित शाह समेत कई नेता सर्किट हाउस पहुंचे. जिसके बाद राजभवन के लिए रवाना हुए. जहां भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) का शपथ ग्रहण होना था.

भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) ने राजभवन में दोपहर के करीब 2:20 बजे मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.

कौन हैं सीएम भूपेंद्र पटेल

15 जुलाई 1962 को अहमदाबाद (शिलाज) गुजरात में जन्मे भूपेद्र पटेल एक साफ सुथरी छवि के नेता कहे जाते. भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) ने सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा के साथ ही व्यवसाय से बिल्डर हैं तथा कई सामाजिक संस्थाओं से जुड़े हैं. साल 2010 में थलतेज से पार्षद चुने जाने के बाद भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) को अहमदाबाद नगर निगम (AMC) की स्टैंडिंग कमिटी का चेयरमैन बना दिया गया था. उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास के ‘गुजरात मॉडल’ का चेहरा अहदाबाद को ही बनाया था.

अहमदाबाद को तब जवाहर लाल नेहरू राष्ट्रीय शहरी नवीनीकरण अभियान (JNNURM) के तहत 2,700 करोड़ रुपये, बस रैपिड ट्रांजिट प्रॉजेक्ट (BRTS) के लिए 1,100 करोड़ रुपये के अलावा साबरमती रिवरफ्रंट के लिए दो चरणों में दी गई 1,200 करोड़ रुपये की रकम दी गई थी. इन सभी योजनाओं के सही तरीके से जमीन पर उतारने में भूपेंद्र पटेल की बड़ी भूमिका रही थी. जिसके बाद साल 2011 में अहमदाबाद यूनेस्को (UNESCO) की संभावित विश्व धरोहर शहरों की सूची में भी शामिल हो गया था.

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इसके साथ ही साल 2017 में भूपेंद्र पटेल ने पहला विधानसभा चुनाव लड़ा और एक लाख, 17 हजार मतों से चुनाव जीता था. यह चुनाव उन्होंने आनंदीबेन पटेल की परंपरागत सीट घाटलोडिया से लड़ा था. साल 2015-17 तक पटेल अहमदाबाद शहरी विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष रहे . पटेल विधानसभा चुनाव लड़ने से पहले स्थानीय राजनीति में सक्रिय थे.

अपने संगी-साथियों में ‘दादा’ के नाम से मशहूर पटेल समुदाय में अच्छी पकड़ मानी जाती हैं. साथ ही गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री तथा उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का करीबी माना जाता है. वह जिस विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं, वो गांधीनगर लोकसभा सीट का हिस्सा है, जहां से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह सांसद हैं.

गुजरात में पटेल समुदाय की अहमियत इन सबसे ज़्यादा है क्योंकि ये लोग ब्यूरोक्रेसी, सरकारी नौकरी और जमींदारी में सबसे प्रभावी हैं. इन लोगों के समर्थन से हवा बनती है और उसका असर दूसरे समुदायों पर भी होता है.यही वजह है कि गुजरात विधानसभा में सबसे ज़्यादा विधायक पटेल समुदाय से ही चुने जाते हैं.

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साल 2017 में ऐसे विधायकों की संख्या 44 थी जिसमें 28 विधायक बीजेपी के थे जबकि 23 विधायक कांग्रेस से चुने गए थे. 2012 के चुनाव में गुजरात में 47 विधायक पटेल थे. तब भी बीजेपी में 36 विधायक पटेल जाति के थे.पिछले साल सूरत में हुए निकाय चुनावों में आम आदमी पार्टी ने काग्रेस को पीछे पछाड़ते हुए 27 सीटें जीती हुई थी.

ऐसे में बीजेपी को लगने लगा था कि उसकी पटेल समुदाय पर भाजपा की पकड़ ढीली पड़ने लगी हैं. जिन्हें अपनी भाजपा अपनी तरफ लाने में कोई कसर छोड़ना नही चाहती हैं. क्योंकि भाजपा को ऐसा लगता हैं कि अगर पटेल समुदाय नाराज हो गया तो अगले साल होने वाले विधान सभा में भारी नुकसान पड़ सकता हैं.

पटेल क्यों हैं पीएम मोदी के चहेते

साल 2010 से 2017 तक भूपेंद्र पटेल (Bhupendra Patel) अहमदाबाद नगर निगम की स्थायी समिति और फिर बाद के दो वर्षों तक अहमदाबाद अर्बन डिवेलपमेंट अथॉरिटी (AUDA) के अध्यक्ष के तौर पर पटेल ने नौकरशाहों और नेताओं के बीच की खींचतान खत्म करने में अहम भूमिका निभाई थी. साथ ही अधिकारियों और चुनाव जीतकर आए जनप्रतिनिधियों के बीच तालमेल बैठाकर कई विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाना का काम किया था. पटेल ने वर्ष 2012 में बिल्डिंग रेग्युलाइजिंग स्कीम को बढ़ावा देने के लिए शुल्क कटौती का आइडिया दिया तब तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी सराहना की थी.

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