भारत में पाकिस्तान से ज्यादा भुखमरी (Bhukhamaree) मोदी जी के फ्री राशन पर उठे सवाल : संपादकीय व्यंग्य.

ऑक्सीजन थी नहीं.सरकार कहती थी ऑक्सीजन बहुत है वैक्सीन पूरी नहीं कर पा रहे थे..कह रहे थे..हमने तीन मार दिया है..कोयला नहीं है..लेकिन सरकार कह रही है कोयला बहुत है..एयर इंडिया बिक रही थी सरकार खबर को गलत बता रही थी..सरकारी कंपनियों को फॉर सेल की लाइन में खड़ा कर दिया..सरकार इसे मॉनिटाइजेशन बता रही थी.अब ग्लोबल हंगर इंडेक्स यानी भुखमरों (Bhukhamaree) की सूची में भारत 101वें नंबर पर खड़ा है..यहां तक कि पाकिस्तान नेपाल बांग्लादेश जैसे देशों की हालत हमसे ठीक है..लेकिन हमारी सरकार चीजें ठीक करने के बजाए रिपोर्ट को गलत बता रही है..गोदी मीडिया के चुनावी सर्वे में खुद की जीत दिखाए जाने के बाद पीठ ठोकते हैं..ग्लोबल हंगर इंडेक्स में सर्वे के तरीके को फर्जी बता रहे हैं..ग्लोबल हंगर इंडेक्स कह रहा है कि भारत भुखमरों की सूची वाले देशों में 101वें नंबर पर है..हमारी सरकार कहती है अरे छोड़ो फर्जी हो तुम लोग यानी जब मैंग्जीन वैग्जीन में भारत या भारत के प्रधानमंत्री नाम आता है तो कहते हैं…सीना 56 इंज का हो गया..डंगा बज रहा है..और जब हंगर रिपोर्ट आई है तो कहते हैं फर्जी है.सब फर्जी है.

दोस्तों पाकिस्तान में भी भुखमरी (Bhukhamaree) हमसे कम है..नेपाल में भी हमसे कम भुखमरी है..बांग्लादेश भी अपने लोगों की रोटी पानी का इंतजाम हमसे अच्छा कर लेता है..लेकिन 5 किलो फ्री राशन देने के बाद भी..किसानों को 6 हजार साल का देने के बाद भी..116 देशों की सूची में भारत 101वें पायदान पर खड़ा है..हमारी हालत पाकिस्तान बांग्लादेश और नेपाल से भी बत्ततर है..इसका सीधा सा मतलब ये है..राष्ट्रवाद के चूरन से सिर्फ नेताओं का पेट भरा है..आपको धर्म की चटनी चटकार नेता छप्पन भोग उड़ा रहे हैं..और आपका देश जो विश्वगुरू बनने जा रहा था..भुखमरी से जूझ रहा है…ये तो साफ है कि ये भारत वो भारत नहीं है जिसके पीछे संसार चला था..ये नया भारत है..किधर चल रहा है आप सोचिए..

116 देशों की सूची में भारत 101 नंबर पर है..5 ट्रिलियन का सपना..मेक इन इंडिया का सपना..आत्मनिर्भर भारत का सपना फलाने ढिमकाने का सपना तो हम तब देख पाएंगे ना जब पेट भरा होगा..यहां तो रोटी के लाले हैं..हम भुखमरों की सूची से बाहर नहीं निकल पा रहे हैंऔर सपने ऐसे दिखाए जाते हैं जैसे रोज कद्दुओं में तीर मारे जाते हों..एक बात और बता दूं..ग्लोबल हंगर इंडेक्स की इन्हीं रिपोर्टस पर पहले यहीं भारत वर्ष की पार्टियां.सरकारों पर लोन तेल लेकर चढ़ जाती थीं..लेकिन नए जमाने के भारत में तूफान को देखकर यहां की सरकारें शुतुर्मुर्ग की तरह मुंह रेत में दबाकर कहती हैं..तूफान कुछ नहीं होता..वो नहीं आएग लेकिन शुतुर्मुर्ग के रेत में गर्दन दबा लेने से तूफान अपना रास्ता थोड़ी बदल लेते हैं..गोदी मीडिया को तो कुछ कहना नहीं है..उनका रीचार्ज समय़ पर हो रहा है तो उनको केवल पाकिस्तान की गरीबी दिखाई देती है..उन लोगों का गेम अलग लेवल पर सेट है..लेकिन एक मासूम सा सवाल है..अगर सब कुछ बदलकर रख देने का वादा करके 8 साल से सत्ता चलाने वाली सरकार अपने देश को केवल भुखमरी (Bhukhamaree) से नहीं उबार पाई है तो आगे राष्ट्रवादी की रस्सी पकड़कर देश को कितनी देर दौड़ाया जा सकता है

पिछले साल हम 94वें स्थान पर थे..इस बार 101वें स्थान पर हैं..रिपोर्ट में भारत में भूखमरी (Bhukhamaree) की कंडीशन को चिंताजनक कहा गया है..इसका सीधा सा मतलब है कि जो 5 किलो अनाज गरीबों को दिया जा रहा है..वो सभी तक नहीं पहुंच रहा है..इसको ग्राउंड लेवल तक जाकर चेक करना होगा..देखिए नेतागिरी के प्रोफेशन में एक ही रूल चलता है मीठा मीठा गप गप कड़वा कड़वा थू थू..कल तक इसी ग्लोबल हंगर इंडेक्स को ढाल बनाकर दूसरी सरकारों को घेरने वालों की जब खुद की जवाबदेही की बारी आई तो कह दिया कि ये रिपोर्ट ही गलत है..ये सर्वे का तरीका ही फर्जी है..मोहल्ले में आपने वो बालक देखे होंगे जो दूसरे के आउट होने पर खूब चिल्लाते हैं..और जब खुद की गुल्लियां बिखर जाती हैं तो नो बाल बताते हैं..वही हाल सरकार का है

ये जो बिना बाइक वाले जमूरे घूम घूमकर कह रहे हैं कि पेट्रोल चाहे 500 रूपए लीटर हो जाए हम भराएंगे क्योंकि इससे हमारा देश आगे बढ़ रहा है.अगली बार ये आपको कहते हुए मिल जाएं तो इनसे कहना की मारेंगे लप्पड़ तो मुंह चवन्नी का चूरन चाटने लायक भी नहीं बचेगा..दोस्तों तेल महंगा करने से..देश पर महंगाई थोपने से अगर देश आगे बढ़ रहा होता तो हंगर इंडेक्स में देश की हालत पाकिस्तान बांग्लादेश और नेपाल से बत्तर नहीं होती

Disclamer- उपर्योक्त लेख लखनऊ के वरिष्ठ पत्रकार द्वारा लिखा गया है. लेख में सुचनाओं के साथ उनके निजी विचारों का भी मिश्रण है. सूचना वरिष्ठ पत्रकार के द्वारा लिखी गई है. जिसको ज्यों का त्यों प्रस्तुत किया गया है. लेक में विचार और विचारधारा लेखक की अपनी है. लेख का मक्सद किसी व्यक्ति धर्म जाति संप्रदाय या दल को ठेस पहुंचाने का नहीं है. लेख में प्रस्तुत राय और नजरिया लेखक का अपना है.

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