ममता बंगाल जीत गईं..मोदी हार गए..देश दम तोड़ रहा है : संपादकीय

जिस दो मई के लिए हिंदुस्तान की हुकूमत ने देश को दांव पर लगा दिया..जिस दो मई के लिए अपने ही वतन के साथ चुनाव आयोग से लेकर सरकार तक ने दगा किया..वो दो मई फिर भी उनकी न हुई..बंगाल में ममता बनर्जी को बहुमत के साथ जीत मिली है..बीजेपी की भी सीटें बढ़ी हैं मोदी जी की रैलियां काम आई हैं लेकिन कमाल नहीं कर पाई हैं..बंगाल में मिली सीटें का औसत देश में जलती चिताओं से बहुत कम है.. ममता बनर्जी 200 सीटों से ज्यादा जीतकर मोदी से बहुत आगे हैं.. मोदी जी आधे से भी कम 98 पर लटके हुए हैं..और हिंदुस्तान 2 लाख मौतों के साथ नंबर वन पोजीशन बनाए हुए है..

जिस दो मई के लिए बंगाल में रैलियां करके हिंदुस्तान को मरघट बना दिया..उस दो मई को दीदी नहीं गईं..चली गईं देश की खुशियां..चले गए लाखों घरों के जलते चिराग..चला गया हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री पर से देश भरोसा..2 मई के लिए देश को श्मसान में जलती चिताओं के अंधेरे में धकेल दिया गया..2 मई को दीदी नहीं गईं..लेकिन हिंदुस्तान चला गया शोक के उस गर्त में जहां श्मशान दहक रहे हैं..दिलों में मौत की दहशत है..आस्पतालों में ऑक्सीजन की आफत है..

किसको मुबारकबाद कह दिया जाए..ममता को..या प्रधानमंत्री को..या गृह मंत्री जी को..या सफलता पूर्वक चुनाव कराकर देश को मरघट बना देने वाले चुनाव आयोग को..मेरे देश को मरघट बनाने के ये सब दोषी हैं..अब तो आप लोगों नरबलि का आप लोगों का नरबलि वाला चुनावी त्योहार संपन्न हो गया है..अब ममता जी को अपने पैर से और मोदी जी को अपनी आंखों से पट्टी उतारकर फेंक देना चाहिए..एक को देश की तरफ और एक को प्रदेश की तरफ देखना चाहिए..

कोरोना ने देश में बहुत कुछ बदल दिया है..लेकिन सब कुछ नहीं बदल पाया है..हिंदुस्तान की वो मीडिया जो बड़ी बड़ी चुनावी रैलियों में आई भीड़ को पॉलिटिकल पार्टियों की सफलता बताती थी..तब लोगों की भीड़ में कोरोना नहीं खोज पाती थी..वो ममता की जीत पर जश्न मना रहे सैकड़ों लोगों से कोरोना प्रोटोकॉल पूछ रही है..चुनाव आयोग टीवी चैनलों की एक एक फुटेज पर संज्ञान ले रहा है..भीड़ के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दे रहा है…अच्छा कदम है..ये सख्ती और ये जिम्मेदारी अगर पहले निभाई होती तो..बहुत सारे हमारे अपने हमारे बीच होते..हिंदुस्तान कभी नहीं भूलेगा कि यहां कोरोना फैला नहीं..फैलाया गया है…चलते हैं राम राम दुआ सलाम जय हिंद..

-----

DISCLAMER- लेख में प्रस्तुत तथ्य/विचार लेखक के अपने हैं. किसी तथ्य के लिए ULTA CHASMA UC उत्तरदायी नहीं है. लेखक एक रिपोर्टर हैं. लेख में अपने समाजिक अनुभव से सीखे गए व्यहवार और लोक भाषा का इस्तेमाल किया है. लेखक का मक्सद किसी व्यक्ति समाज धर्म या सरकार की धवि को धूमिल करना नहीं है. लेख के माध्यम से समाज में सुधार और पारदर्शिता लाना है.