राम मंदिर निर्माण: लोड टेस्टिंग के दौरान 5 इंच नीचे धंसा पिलर, 200 फीट नीचे मिली बालू की परत

28 सालों बाद राम मंदिर पर फैसला आने के बाद निर्माण कार्य तो शुरू हो चुका है लेकिन मंदिर निर्माण में जुटे इंजीनियरों के सामने बड़ी तकनीकी चुनौतियां आ रही हैं. जिसे पूरा करने में अभी और समय लग सकता है.

ayodhya ram mandir construction soil testing
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दरअसल, मंदिर की नींव की सतह पर 200 फीट नीचे पीली मिट्टी नहीं, रेत मिली है. नींव की मजबूती के लिए पाइलिंग टेस्ट किया जा रहा था और जब पिलर पर भार डाला गया तो पिलर 2 से 5 इंच तक धंस गए. IIT दिल्ली के पूर्व निदेशक वीएस राजू की अध्यक्षता में गठित 8 टॉप इंजीनियर और कंस्ट्रक्शन एक्सपर्ट मंदिर की नींव से जुड़े कामों पर नजर बनाए हुए हैं.

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रामजन्म भूमि पर पिछले एक महीने से पाइलिंग की खुदाई कर मिट्टी की जांच का काम चल रहा है लेकिन जब मंदिर निर्माण में लगी कंपनी लॉर्सन एंड टूब्रो को मनमाफिक मिट्टी की परत नहीं मिली तो रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सामने दिक्कतें आईं. अब मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता में एक सब-कमिटी बनाई गई है जिसमे देश के नामी और और प्रतिष्ठित तकनीकी विशेषज्ञ मंदिर की नींव फाउंडेशन को लेकर अपनी अनुशंसा देंगे.

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य डॉ. अनिल मिश्र ने बताया कि इंजीनियर की कमेटी की रिपोर्ट पर ही नए सिरे से नींव की शुरुआत होगी. एक्सपर्ट की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाएगी. ये रिपोर्ट मंदिर निर्माण समिति और ट्रस्ट के बीच रहेगी. अब अगर एलएंडटी (L&T) ने नींव की डिजाइन में कोई बदलाव नहीं किया तो 20 दिन के अंदर पिलर का निर्माण शुरू हो जाएगा. अगर बदलाव हुआ तो मंदिर की डिजाइन भी बदली जाएगी.

बतादें कि गोस्वामी तुलसीदास ने जब रामचरित मानस की रचना की थी तब उस समय सरयू नदी राम जन्मभूमि के और करीब से बहती थी. इसीलिए यहां वाटर लेवल का स्टेटस और स्थानों के अपेक्षा ऊपर है. यही कारण है कि जमीन के नीचे रेत की परत है. जबकि मंदिर निर्माण के लिए मजबूत और ठोस जमीन की तलाश है.