जनवरी तक टला अयोध्या मामला, अब नई बेंच करेगी सुनवाई, भड़के बीजेपी नेता

अयोध्या में विवादित ढांचा मामले पर मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय नई पीठ ने आज सुनवाई की. मामले की सुनवाई जनवरी 2019 तक टाल दी गई है. सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या राम जन्मभूमि मालिकाना हक विवाद से जुड़ी अपीलों की सुनवाई को जनवरी के पहले सप्ताह तक के लिए टाल दिया. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय नई पीठ में जस्टिस संजय किशन कौल (Sanjay Kishan Kaul) और केएम जोसेफ (KM Joseph) शामिल थे.

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मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में हुआ फैसला

जस्टिस रंजन गोगोई ने सुनाया फैसला

उत्तर प्रदेश सरकार और रामलला के वकील (lawyer) ने दिवाली की छुट्टी के तुरंत बाद सुनवाई का अनुरोध किया पर कोर्ट ने मांग ठुकरा दी और CJI जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा कि वे सिर्फ जनवरी (January) के पहले सप्ताह मे केस पर सुनवाई की तिथि तय करने के लिए लगाने का आदेश दे रहे है। तभी सुनवाई कौन पीठ करेगी यह तय होगा। सुनवाई मार्च या अप्रैल तब-तक चलेगी अभी नहीं कह सकते.

कोर्ट के फैसले से पहले केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह (Giriraj Singh) ने कहा है कि हिंदुओं का सब्र अब टूट रहा है. उन्होंने कहा, “मुझे भय है कि हिंदुओं का सब्र टूट गया तब क्या होगा? राम मंदिर जरूर बनेगा. कांग्रेस अभी तक इस मामले को लटकाने का काम करती आई है.

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संघ के विचारक इंद्रेश कुमार (Indresh Kumar) का कहना है कि जैसे काबा को बदला नहीं जा सकता, हरमंदिर साहब को बदला नहीं जा सकता, वेटिकन और स्वर्णमंदिर नहीं बदला जा सकता वैसे ही अयोध्या में रामजन्मभूमि का स्थान नहीं बदल सकता है. यह एक सत्य है.

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने दो दिन पहले कहा था कि सुप्रीम कोर्ट ने जिस तरह सबरीमाला मामले में निर्णय सुनाया है उसी तरह उसे राम मंदिर मुकदमे में भी फैसला सुनाना चाहिए.

27 सितंबर को तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा (Deepak Mishra) की अगुआई वाली पीठ ने दो-एक के बहुमत से आदेश दिया था कि विवादित भूमि के मालिकाना हक वाले दीवानी मुकदमे की सुनवाई तीन जजों की नई पीठ 29 अक्टूबर को करेगी