फैसले से पहले अयोध्या जिला प्रशासन ने मांगी अतिरिक्त फोर्स, सुनवाई की तारीख हुई एक दिन कम

राम जन्मभूमि विवाद दिन पर दिन गर्माता ही जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई जारी है. सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को 17 अक्तूबर तक ही बहस खत्म करने को कहा दिया है.

ayodhya administration demand extra force supreme court verdict ayodhya land case
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बतादें की इससे पहले कोर्ट ने बहस पूरी करने के लिए 18 अक्टूबर की तारीख तय की गई थी. वहीं अयोध्या मामले में नवंबर महीने में फैसला आने की उम्मीद है. इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अगुवाई वाली संवैधानिक पीठ कर रही है. वहीं फैसले से पहले ही अयोध्या जिला प्रशासन ने सरकार से अतिरिक्त फोर्स की मांग कर दी है. जानकारी के मुताबिक बाहर से आने वाले पुलिसबल को स्कूल, कॉलेज, धर्मशाला, मठ और मंदिरों में ठहराया जाएगा. जिसके लिए जिला प्रशासन के अधिकारी अभी से व्यवस्था करने में जुट गए हैं.

रामलला विराजमान की ओर से वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि खुदाई में निकाले गए सामान से ये नतीजा निकलता है कि अयोध्या में बाबरी मस्जिद के नीचे मंदिर था. विवादित ढांचे के नीचे जो निर्माण है, वो ईदगाह की दीवारें या इस्लामिक ढांचा है.. ये कहना सही नहीं है. बतादें कि पूरे अयोध्या में हाई अलर्ट है. जगह-जगह चेकिंग की जा रही है. हिन्दू पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी सुनवाई पूरी कर ली है अब मुस्लिम पक्ष की सुनवाई चल रही है.

इससे पहले मुस्लिम पक्ष ने बयान किया था कि अयोध्या के विवादित स्थल के बाहरी हिस्से में स्थित ‘राम चबूतरा’ ही भगवान राम का जन्मस्थल है. साथ ही उसने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की उस रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए जिसमें संकेत दिया गया है कि ये ढांचा बाबरी मस्जिद से पहले स्थित था. मतलब मुस्लिम पक्ष का कहना था कि वहां कोई ढांचा ही नहीं था.

मुस्लिम पक्ष के वकील राजीव धवन ने कहा- एएसआई की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बात के कोई सबूत या निशान नहीं मिले हैं कि किसी मंदिर को ढहाया गया. फिर दूसरी बार उन्होंने (मुस्लिम पक्ष) ने कहा कि ये एक इस्लामिक ढांचा या ईदगाह की दीवारें थीं. जिसपर बाबरी मस्जिद बनी थी.

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