विजय दिवस: वॉर मेमोरियल पर PM मोदी ने जलाई ‘स्वर्णिम विजय मशाल’, शहीदों को दी श्रद्धांजलि

भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 में हुई जंग में जीत के आज 49 साल पूरे हो गए हैं और 50वां साल शुरू हो गया है. इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल वॉर मेमोरियल (NWM) पर स्वर्णिम विजय मशाल जलाई.

anniversary of 1971 india pak war pm modi to light swarnim vijay mashaal
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इस दिन को ‘विजय दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. आज शहीदों की याद में कई कार्यक्रम हो रहे हैं. इनमें 1971 की जंग में लड़े सैनिकों और शहीदों की विधवाओं का सम्मान किया जाएगा. इसके साथ ही बैंड डिस्प्ले, सेमिनार, प्रदर्शनी, फिल्म फेस्टिवल, कॉन्क्लेव और एडवेंचर एक्टिविटी भी होंगी. प्रधानमंत्री ने नेशनल वॉर मेमोरियल की लौ से चार विजय मशाल जलाई. इन मशालों को देश के अलग-अलग हिस्सों में ले जाया जाएगा.

तीन दिसंबर, 1971 को पाकिस्तान ने लड़ाई की शुरुआत तो कर दी, लेकिन भारतीय सैनिकों के पराक्रम के आगे महज 13 दिनों में ही घुटने टेकने पड़े थे. उस समय पाकिस्तान का सैनिक तानाशाह याहिया खां अपने ही देश के पूर्वी भाग में रहने वाले लोगों का दमन कर रहा था. 25 मार्च, 1971 को उसने पूर्वी पाकिस्तान की जनभावनाओं को कुचलने का आदेश दे दिया. और फिर आंदोलन के अगुआ शेख मुजीबुर्रहमान को गिरफ्तार कर लिया गया था.

जिसके बाद वहां के लोग भारत में शरण लेने लगे और भारत सरकार पर हस्तक्षेप का दबाव बनने लगा. उस समय की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने सेनाध्यक्ष जनरल मानिक शॉ से बातचीत की. लेकिन तब भारत के पास सिर्फ एक माउंटेन डिवीजन था और उसके पास भी पुल निर्माण की क्षमता नहीं थी. मानसून भी दस्तक देने वाला था. ऐसे में जनरल शॉ ने साफ कह दिया कि वो मुकम्मल तैयारी के साथ ही युद्ध के मैदान में उतरेंगे.

तीन दिसंबर, 1971 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कलकत्ता में जनसभा कर रही थीं. उसी समय पाकिस्तानी वायुसेना ने पठानकोट, श्रीनगर, अमृतसर, जोधपुर, आगरा आदि सैन्य हवाई अड्डों पर बमबारी शुरू कर दी. भारत सरकार ने भी जवाबी हमले की योजना बनाई और भारतीय सैनिकों ने पूर्वी पाकिस्तान के जेसोर और खुलना पर कब्जा कर लिया.

14 दिसंबर को सेना ने एक गुप्त संदेश पकड़ा कि ढाका के गर्वनमेंट हाउस में पाकिस्तान के शीर्ष अधिकारियों की बैठक होने वाली है. बैठक के दौरान ही भारतीय मिग-21 विमानों ने बम गिराकर उसकी छत उड़ा दी. 1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध का मुख्य कारण बांग्लादेश को आजाद कराना था. 13 दिन चली इस लड़ाई में पाक सेना को मुंह की खानी पड़ी.

16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी जनरल एएके नियाजी ने अपने 90 हजार सैनिकों के साथ भारत और मुक्ति वाहिनी के सामने ढाका में आत्मसमर्पण कर दिया. इसके साथ ही बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग हो गया था.

आज विजय दिवस के मौके पर पूर्वी कमान के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अनिल चौहान ने कहा कि लद्दाख में चीन के साथ हुई झड़प के बाद कमान क्षेत्र में कोई बड़ी घुसपैठ नहीं हुई है. गलवां घाटी में हुई घटना के बाद हमारे और चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) के बीच एलएसी पर पारस्परिक विश्वास कम हुआ है और इसे फिर से स्थापित होने में समय लगेगा.

पीएम मोदी के इस कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) बिपिन रावत और सेना के तीनों अंगों के प्रमुख भी मौजूद रहे. सभी ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी. लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू ने इस मौके पर कहा, ‘पाकिस्तान घाटी के युवाओं को गुमराह करने के प्रयास कर रहा है. यहां की अधिकांश आबादी भारत पर विश्वास करती है. बड़ी संख्या में गुमराह युवा वापस मुख्यधारा में आ गए हैं और इससे मुझे बहुत उम्मीद है.

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