ऐसा आज तक कभी नहीं हुआ.. ये लखनऊ के आलमबाग वाला बैकुण्ठधाम है..

जीना तो छोड़िये मरने के बाद भी सुकून नहीं मिलने वाला है कि विधि पूर्वक अंतिम संस्कार हो सके. राजधानी लखनऊ की ऐसी ही स्थिति हो गई है. सरकार चाहे जितने वादे कर ले लेकिन यहाँ हालात बेकाबू हो चुके हैं.

Alambagh Waikuntham of Lucknow Terrible condition

आलमबाग के वैकुण्ठधाम की स्थिति

आलमबाग वीआईपी रोड पर मौजूद वैकुण्ठधाम की स्थिति बहुत ही भयानक है. यहाँ बॉडी ऐसे जलाई जा रही हैं जैसे लाश नहीं कोई आग जला रहा हो. फोटो में आप साफ़ देख सकते हैं कि हालात क्या हैं. सुविधाएं न होने पर जहाँ जगह मिली वहीं अंतिम संस्कार करवा दिया और गेट के बाहर लोग लाइन में खड़े हैं कि कब मेरा नंबर आएगा. ये है सरकार की सुविधाएँ.

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कहीं पर कोई सुविधा नहीं

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कोरोना को फैले हुए 1 साल से ज्यादा हो चुका है और सरकार ने सिर्फ बातें ही कि हैं अस्पतालों में मरीज को भर्ती करने के लिए बेड नहीं हैं. ना ही कोई विशेष सुविधा दी गई है. न मरीजों के पास टाइम पर एम्बुलेंस पहुँच रही है. जब तक एम्बुलेंस पहुँचती है तबतक मरीज की मौत हो जाती है. और मरने के बाद भी अंतिम संस्कार तक उसको तड़पना पड़ता है.

लखनऊ के वैकुण्ठधाम का हाल

क्योंकि मुर्दाघरों में ऐसी सुविधाएं हैं कि बॉडी वहां पहुँचने के बाद टोकन लेना पड़ता है और 10 से 12 घंटे इंतज़ार करना पड़ता है. नंबर आने के बाद मरने वाले का दूर से ही अंतिम संस्कार करा देते हैं फिर कह देते हैं कल आ कर अस्थियां ले जाना. ये हाल लखनऊ के वैकुण्ठधाम का है. सरकार के आंकड़ों में 10 से 15 लोग मर रहे लेकिन असल में स्थिति कुछ और ही है.

मुस्कुराइए आप लखनऊ में हैं

कहा जाता है कि मुस्कुराइए आप लखनऊ में हैं. ऐसी बदहाल और भयानक स्थिति देख कर आप क्या कहेंगे. अस्पतालों में मरीजों के लिए सुविधाएं दी जाती तो ऐसे हालात न बनते. सरकार ने बजट में चिकित्सा के नाम पर कई सौ करोड़ रुपये खर्च किये वो पैसा कहां लगा. दुःख है लखनऊ की ऐसी हालत देख कर.

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