इस बार मायावती के साथ अखिलेश भी काटेंगे बर्थडे केक… ?

बीएसपी सुप्रीमों मायावती का जन्मदिन आने वाला है. और चर्चा है की 10 जनवरी को माया लखनऊ आ रही हैं. मतलब ये साफ़ है की मायावती अपना जन्मदिन लखनऊ में ही मनाएंगी. मायावती करीब 3 महीने बाद लखनऊ आ रहीं हैं. उनके आने की खबर मिलते ही 9 माल एवेन्यू स्थित आवास को उनके जन्मदिन के उपलक्ष्य में सजाया-संवारा जाना शुरू हो गया है.

अखिलेश का आना तय

मायावती के आने की ख़बर से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. सबकी नज़र उनके जन्मदिन पर नहीं बल्कि वहां होने वाले चुनावी ऐलान पर होंगी. और जन्मदिन पर धमाका तो तब होगा जब मायावती की जन्मदिन पार्टी में अखिलेश यादव पहुंचेंगे. माया अपने जन्मदिन पर अखिलेश के साथ गठबंधन का ऐलान कर सकती हैं. ऐसे में राजनीतिज्ञ लोगों का भी मानना है की अखिलेश मायावती के जन्मदिन पर पहुँच सकते हैं.

Akhilesh will cut birthday cake with Mayawati
Akhilesh will cut birthday cake with Mayawati
सीटों पर हो चुका है समझौता

अभी हालही में दिल्ली में अखिलेश यादव बीएसपी से गठबंधन के बीच में फंसे ‘सीटों के पेंच’ को टाइट करने के लिए माया से मिलने पहुंचे थे. 3 घंटे बाद दोनों ने 37-37 सीटें बाँट ली. मतलब यूपी की 80 लोकसभा सीटों मे से अखिलेश और मायावती 37-37 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतरेंगे. बची हुई 6 सीटें दोनों ने अन्य सहयोगी दलों के लिए छोड़ी हैं. लेकिन मायावती इसका औपचारिक ऐलान अपने जन्मदिन पर ही करेंगी.

बीजेपी और कांग्रेस के उड़े होश

25 साल के बाद यूपी की दो दिग्गज पार्टियां एक साथ हुईं हैं. इससे बीजेपी और कांग्रेस दोनों होश उड़ गए हैं. अखिलेश और माया के गठबंधन से ये तो तय हो गया है की इस बार बीजेपी को लोकसभा चुनाव में कई सीटों का नुक्सान होने वाला है. क्युकी अखिलेश माया के साथ चाचा शिवपाल सिंह यादव भी अब सबसे अलग यूपी की राजनीति में अपना झंडा गाड़ चुके हैं. उनका भी दबदबा कुछ कम नहीं है. बीजेपी को इन तीनों से खतरा है.

इस बार ख़ास होगा जन्मदिन

लोकसभा चुनाव से पहले मायावती का जन्मदिन बेहद ख़ास हो गया है. उनका जन्मदिन हमेशा ‘जन कल्याणकारी दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. मायावती इसी दिन ‘ब्लू-बुक’ नाम की किताब व पार्टी का कैलेंडर जारी करती हैं. ब्लू-बुक में पार्टी की वर्ष भर की गतिविधियों का लेखाजोखा होता है. इन सबके साथ इस बार माया राजनीतिक ऐलान कर बीजेपी को कई चुनौतियाँ दे सकती हैं.

कब अलग हुए थे सपा-बसपा ?

यूं तो समाजवादी पार्टी और बीएसपी में गेस्ट हाउस कांड के बाद से ही तल्खियां थीं लेकिन यूपी में बीजेपी को रोकने के लिए अब दोनों दल दूरियां खत्म करते हुए एक साथ आ रहे हैं. यूपी में हुए उपचुनाव में भी एसपी के लिए बीएसपी ने मदद की थी. और अब मिशन 2019 के लिए एसपी-बीएसपी का गठबंधन होना तय हो चुका है. 1995 में यूपी में मुलायम सिंह यादव की अगुवाई वाली समाजवादी पार्टी की सरकार बीएसपी के समर्थन से चल रही थी. लेकिन बाद में मायावती और बीजेपी के पास गठबंधन को लेकर बातचीत चलने लगी. इसकी भनक मिलने पर समाजवादी पार्टी के लोगों ने लखनऊ के गेस्ट हाउस में बवाल कर दिया जहां मायावती मौजूद थीं. गेस्ट हाउस कांड के बाद बीएसपी और एसपी का रिश्ता टूट गया था जो अब 24 साल बाद फिर से परवान चढ़ने लगा है.