सपा के संविधान के मुताबिक समझिए लोटनराम को हटाना सही या गलत

चौधरी लोटनराम निषाद को समाजवादी पार्टी पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाने के अखिलेश यादव के फैसले पर समाजवादी पार्टी के भीतर ही बहस चल रही है..कोई कह रहा है अखिलेश ने सही नहीं किया कोई कह रहा है अनुशासन हीनता के चलते कार्रवाई सही है..आज मैं आपको बिना किसी झुकाव बिना किसी पक्षपात के समाजवादी संविधान को सामने रखकर लोटनराम कांड सही है या गलत बताऊंगी…

आगे कोई और बात करें उससे पहले आप समाजवादी पार्टी का संविधान पढ़ लीजिए..धारा 2 के अनुच्छेद 2 में लिखा है कि धर्म पर आधारित राज्य की अवधारणा का समाजवादी पार्टी विरोध करती है..और धर्म आधारित राज्य में आस्था रखने वाले..किसी भी संगठन का कोई भी सदस्य समाजवादी पार्टी का सदस्य नहीं हो सकेगा.. मतलब साफ है धर्म के आधार पर बात करने वाले..बांटने लोगों की एंट्री समाजवादी पार्टी नहीं है..ना तो वो सपा का कार्यकर्ता रह सकता है..तो अब मसला है ये है कि क्या लोटन राम निषाद धर्म आधारित राज्य की कामना कर रहे थे..अगर नहीं तो लोटन राम निषाद को हटाना समाजवादी संविधान के तहत गलत है..

धार्मिक प्रोपोगेंडा ना चलाने का मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि लोटन राम निषाद को किसी की आस्थाओं का अपमान करने की आजादी संविधान दे देता है..ये जानना बेहद जरूरी है कि राम के अस्तित्व पर सवाल उठाने पर लोटन राम निषाद को बाहर किया गया है..ना कि नास्तिक होने पर..बहुत से लोग भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं..लेकिन समाजवादी संविधान के मुतबिक ही..सभी को अपना धर्म अपना ईष्टदेव चुनने और मानने का पूरा अधिकार है..

लोटन राम ने क्या कहा था अक्षरश: आपको बता रही हूं..लोटन राम कहां सीमा पार कर गए उसे देखिए..और अगर आपको लगता है कि लोटन राम ने सही कहा है तो कमेंट करके बताईयेगा..लोटनराम ने कहा कि अयोध्या में राम का मंदिर बने चाहे कृष्ण का मंदिर बने, मुझे मंदिर से कोई लेना देना नहीं है. राम के प्रति मेरी आस्था नहीं है. मेरी आस्था बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर के संविधान में है. कर्पूरी ठाकुर में और छत्रपति शाहू जी महाराज में है, जिनसे हमें बोलने का, नौकरी में जाने का, पढ़ने का, लिखने का और कुर्सी पर बैठने का अधिकार मिला है….हमें ये अधिकार संविधान से मिले हैं, ज्योतिबा फुले से मिले हैं, सावित्रीबाई फुले से मिले हैं. जिनसे मुझे डायरेक्ट लाभ मिला है, मैं उनको जानता हूं.’

लोटनराम निषाद ने आगे कहा कि – ‘राम थे कि नहीं, राम के अस्तित्व पर भी मैं प्रश्न खड़ा करता हूं. राम एक काल्पनिक पात्र हैं. जैसे फिल्मों की स्टोरी बनाई जाती है, वैसे ही राम एक स्टोरी के एक पात्र हैं. राम का कोई अस्तित्व नहीं है.’

अपने बयान में लोटनराम निषाद ने स्पष्ट कहा था कि ये उनके व्यक्तिगत विचार हैं. ऐसे में उनके बयान को उनका निजी बयान कहकर टाला जा सकता था. ये चारा समाजवादी पार्टी के पास था..क्योंकि यूपी के उपमुख्यमंत्री सीता को टेस्टट्यूब बेबी कह चुके हैं..योगी आदित्यनाथ हनुमान को दलित कह चुके हैं..लेकिन बीजेपी में किसी पर कोई कार्यवाई नहीं हुई..तो लोटनराम पर खिलाफ इतना बड़ा फैसला हैरान करता है..

 

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