ये हैं अजित पवार, चमक भी लिए काम भी हो गया और कोई समझ भी न पाया

एनसीपी नेता अजित पवार इनको तो अब हर कोई जान गया है. क्युकी इन्होंने खेल ही ऐसा किया है की सब के सब भौचक्के रह गए. ये कहानी शुरू हुई 23 नवंबर की सुबह को जब महाराष्ट्र में एक अलग ही किस्म का सियासी नाटक देखा गया.

Ajit Pawar Inside Story irrigation scam deputy cm maharashtra
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वो ये था की अजित पवार रातों-रात बीजेपी से मिल गए और सुबह 8 बजे शपथ लेकर सरकार बना ली. और खुद बन गए डिप्टी सीएम. अब जैसे ही महाराष्ट्र के लोग जागे तो हर तरफ जैसे अफरा तफरी मच गई. विरोधी पार्टियों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया. एक बात और की अजित पवार बीजेपी में तो आ गए मगर वो ये जरूर कहते रहे की मैं एनसीपी के साथ हूँ. अजित बार-बार ये बात क्यों दोहरा रहे थे.

दूसरे दिन अजित पवार पर सवाल खड़े हुए की वो सिंचाई घोटाले के मामले में फंसे हैं ऐसे में वे डिप्टी सीएम कैसे बन सकते हैं. फिर आया एक और ट्विस्ट और महाराष्ट्र एंटी करप्शन ब्यूरो में अजित को सिंचाई घोटाले के नौ मामलों में क्लीन चिट दे दी और जाँच फाइल बंद कर दी. फिर थोड़ी देर बाद एसीबी ने कहा की जिन मामलों को सोमवार को बंद किया गया है, उनमें से किसी में भी अजित पवार का नाम नहीं था.

मतलब साफ़ है की अजित पूरी तरह तो नहीं पर नौ मामलों से बच गए हैं. अब उसपर कोई जाँच नहीं होगी. तो पहला बड़ा फायदा की डिप्टी सीएम बन गए और दूसरा फायदा की सिंचाई घोटाले के नौ मामलों से बच गए. अब आगे चलते हैं.

तीसरे दिन एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना सुप्रीम कोर्ट पहुँच गए और देवेंद्र सरकार के खिलाफ याचिका दायर कर दी. 26 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य में कल यानी बुधवार को फ्लोर टेस्ट हो. इस फ्लोर टेस्ट का लाइव टेलीकास्ट होना चाहिए. गुप्त मतदान नहीं होना चाहिए. फ्लोट टेस्ट की वीडियो रिकॉर्डिंग होनी चाहिए.

बस अब यहाँ से खेल पलट गया. क्युकी अजित अपने साथ जिनको लाये थे वो पहले ही पलटी मार लिए. अब इधर बीजेपी के पास भी विधायकों की संख्या पूरी नहीं थी. सरकार संकट में आ गई थी. अजित को लगा सरकार तो गिर ही रही है तो खुद ही पहले इस्तीफ़ा देदो. बस जिस अजित पवार ने अपने समर्थन पर देवेंद्र फडणवीस की सरकार बनवाई थी 26 नवंबर को उसी अजित पवार ने अपने हथियार डाल दिए. और डिप्टी सीएम पद से इस्तीफा दे दिया.

अब अजित पवार के इस्तीफे के बाद देवेंद्र फडणवीस ने भी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. और दुखी मन से कहा कि अजित पवार के इस्तीफे के बाद अब हमारे पास संख्या नहीं है. अच्छा एक बात ये भी है कि अजित पवार सरकार को गिराते गिराते देवेंद्र से ये भी कह गए की मैं निजी कारणों के चलते डिप्टी सीएम पद से इस्तीफा दे रहा हूँ.

बीजेपी सरकार गिरते ही एनसीपी, कांग्रेस और शिवसेना के लोग खुशियां मनाने लगे और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे का नाम मुख्यमंत्री के लिए फ़ाइनल हुआ. यहाँ बात आती हैं की गठबंधन सरकार में मंत्री कौन कौन रहेगा और सबसे ख़ास बात की डिप्टी सीएम कौन बनेगा. ये तो तय हो गया था की दो डिप्टी सीएम होंगे एक कांग्रेस से और दूसरा एनसीपी से.

इधर अजित भी बीजेपी सरकार गिरा कर अपने चाचा और एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार के पास चले आये और दोनों ने बातचीत की. फिर चर्चा होने लगी की अजित पवार को कोई जगह मिलेगी या नहीं. तो इस बात की कमी शिवसेना नेता संजय राउत ने पूरी कर दी. उन्होंने कहा की अजित पवार बहुत बड़ा काम करके आये हैं उन्हें गठबंधन में उचित स्थान मिलेगा.

संजय राउत के इतना कहने पर ही फिर अटकलें तेज हो गईं हैं की उन्हें फिर से डिप्टी सीएम का पद मिल सकता है. और कल 28 नवंबर को उद्धव ठाकरे के अलावा 6 और मंत्रियों की शपथ हुई. तीनों पार्टियों से दो दो मंत्री बनाए गए. एनसपी के दोनों वरिष्ठ नेता मंत्री बन गए. लेकिन अजित पवार मंत्री नहीं बने. इससे ये तो साफ है कि डिप्टी सीएम अजित पवार ही होंगे. और अगर वो शक्ति परीक्षण के बाद शपथ लेंगे तो फिर सवाल ये है कि क्या अजित पवार की बगावत स्क्रिप्टेड थी? क्या बीजेपी को एक्सपोज करने के लिए ही शरद पवार ने ये खेल रचा था.

कुछ भी हो लेकिन अजित पवार ने गठबंधन सरकार के लिए बहुत बड़ा काम कर गए. जिसे बीजेपी समझ नहीं पाई.

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