मंत्री अजय मिश्रा (Ajay Mishra) टेनी और बेटा आशीष मिश्रा, अखाड़े से राजनीति तक..

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर जिले वाली घटना के बाद देश में पारा काफी चढ़ा हुआ है..इस घटना के मामले में केंन्द्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा (Ajay Mishra) और उनके पुत्र आशीष मिश्रा हैं..अजय मिश्रा को मोदी कैबिनेट में जगह ही उत्तर प्रदेश चुनाव को देखते हुए मिली थी..अजय मिश्रा के बेटे अशीष मिश्रा अभी तक अपने पिता के राजनीति के प्रबंध को देखते रहें हैं..और 2022 के चुनाव में टिकट के लिए दावेदर भी हैं..आज हम आपको इन दोनों के बारे में बता रहें हैं..

12 साल महाराज से मंत्री तक

12 साल के सियासत के सफर में लखीपुर खीरी के महाराज बन गए..मतलब अजय मिश्रा (Ajay Mishra) केंद्र मे मंत्री भी बन गए..केंन्द्र में मंत्री बनने के बाद भी अजय मिश्रा लोगों को याद दिलाना चाहते हैं..कि वो सिर्फ मंत्री, सांसद और विधायक नहीं हैं..उसके एक पहले का भी इतिहास है..उनका वो इतिहास उनकी दबंग छवि से जुड़ा हुआ है..और इस इतिहास में कई अपराधों का भी जिक्र भी है..लखीमपुर की फिजाओं में तमाम किस्से तैर रहें हैं..

अजय मिश्रा (Ajay Mishra) का जन्म 25 सितंबर 1960 को यूपी के सबसे बड़े जिले लखीमपुर खीरी के बनबीरपुर गांव में हुआ था..अजय मिश्रा की पढ़ाई-लिखाई अच्छी रही..अजय मिश्रा ने एलएलबी भी किया है..लखीमपुर खीरी में अजय मिश्रा महाराज और टेनी के नाम से जाने जाते हैं..अजय मिश्रा की दिलचस्पी खेलों में ज्यादा रही है..और सबसे ज्यादा तो अजय मिश्रा को पहलवानी पसंद है..और युवावस्था में पहलवानी किया करते थे..और बाद में वो पहलवानी का आयोजन करवाने लगे..अजय मिश्रा ने वकालत भी की..

उसके बाद बढ़ता ही चला गया अजय मिश्रा का रौला

अजय मिश्रा (Ajay Mishra) अपनी दबंगई की वजह से उनके किस्से काफी मशहूर होतो गए और उनकी पहचान बढ़ती चली गई..जब अजय मिश्रा पर प्रभात गुप्ता मर्डर केस का है..वो समय 2003 का था..प्रभात गुप्ता तिकुनिया गांव का रहने वाला था..सिर्फ 24 साल की उम्र में उसकी गोली मारकर हत्या कर दी गई..इस मामले में अजय मिश्रा का भी नाम था..इस मामले में अजय मिश्रा पर भी कोर्ट में गोलियां चली थी..

और इसके बाद अजय मिश्रा टेनी का रौला बढ़ता ही जा रहा था..2004-2005 में अजय मिश्रा ने राजनीति में कदम रखा अजय मिश्रा 2009 में पहली बार जिला पंचायत सदस्य बने..2012 में विधासभा चुनाव में उन्हें बीजेपी ने टिकट दिया और निघासन सीट से विधायक हो गए..अजय मिश्रा का बढ़ता हुए रौले को देखते हुए..2014 में अजय मिश्रा टेनी को सांसद की टिकट मिला और अजय मिश्रा ने बीएसपी के अरविंद गिरी को 10000 वोट से हरा दिया और सांसद बन गए..और साल 2019 में समाजवादी पार्टी के पूर्वी वर्मा को 2 लाख से भी ज्यादा वोटों से हराया था..

अजय मिश्रा के नक्श-ए-कदम पर बेटा आशीष

अजय मिश्रा के पिता अंबिका प्रसाद मिश्रा अपने क्षेत्र के बहुत ही नामी पहलवान थे..अजय मिश्रा (Ajay Mishra) भी पहलवानी करते थे..और उन्हीं के जैसे उनका बेटा आशीष भी उनके कदम मिलाकर चलता था..आशीष मिश्रा ने अभी कुछ समय पहले ही पहलवानी में अपना हाथ आजमाया और अब आयोजन बन गए हैं..मोनू के ऊपर पहला मुकदमा 2007 में लिखा गया था..

आशीष मिश्रा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के समय से ही राजीतिन में रुचि रखने लगे थे..और जब साल 2009 में आशीष के पिता अजय मिश्रा क्षेत्र पंचायत सदस्य बने तो उसके बाद आशीष ने परिवार का काम संभालना शुरु कर दिया था..पेट्रोल पंप ईंट-भट्टे का काम खेती का पूरा काम अब आशीष मिश्रा ही देखने लगे थे..

अजय मिश्रा टेनी की दबंग विरासत को बढ़ा रहें आशीष

आशीष मिश्रा को शुरु से ही खेल के शौकी थे..क्रिकेट खेलते औऱ पहलवानी करते थे..और उनके दादा के नाम पर जो दंगल होते थे..उसके आयोजन समिति के अध्यक्ष हैं..इसके अलावा वह लखीमपुर में एक क्रिकेट टूर्नामेंट भी कराते हैं..बीजेपी के कार्यकर्ता बताते हैं कि गरीब परिवार की लड़कियों कि शादी भी करवाते हैं..अजय मिश्रा टेनी ने अपनी जिस दबंग छवि को बनाकर रखा है..उसे उनका बेटा आशीष आगे बढ़ा रहा है..

अपने क्षेत्र की राजनीति में में उनका पूरा नाम बनाकर रखा है..क्षेत्र के विकास का काम जो सांसद निधि से होता है..उसकी देखरेख करने की जिम्मेदारी भी उनके ही पास है..आशीष मिश्रा को गाडियों का काफिला लेकर चलना काफी अच्छा लगता था..अपने पिता के क्षेत्र में होने वाले सारे कार्यक्रम वही तय करते हैं..फिलहाल आशीष मिश्रा निघासन सीट की तैयारी में हैं..ये वही सीट है, जिससे साल 2012 में अजय मिश्रा (Ajay Mishra) टेनी विधायक चुने गए थे..इस बात की चर्चा हर तरफ थी कि इस बार आशीष मिश्रा को निघासन सीट के लिए टिकट मिलेगा..

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