योगी से नाख़ुश ’83 नौकरशाहों’ ने माँगा ‘CM योगी’ का इस्तीफ़ा

Ulta Chasma Uc  :   गोकशी के शक में बुलंदशहर में इतनी बड़ी हिंसा भड़की जिसमें एक पुलिस इंस्पेक्टर और एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई. जिसकी जांच में देरी के चलते उत्तर प्रदेश राज्य के पूर्व नौकरशाहों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का इस्तीफा मांगा है.

83 former bureaucrats demanded resignation of CM Yogi
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कब भड़की हिंसा ?

3 दिसंबर, 2018 को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर के स्याना गांव में के शक में हिन्दु संगठन और ग्रामीणों के बीच बहस हुई, थोड़ी ही देर में वहां कई लोग पहुंच गये और देखते ही देखते भीड़ एक बड़ी हिंसा में तब्दील हो गई. कई हिन्दु संगठन भी उसमें शामिल हो गये. सभी सड़कें जाम कर दी गर्इं. गुस्साए ग्रामीणों ने पास के चिंगरावठी चौकी के बाहर जाम लगा दिया. बवाल इतना बढ़ गया की पत्थर, लाठी और गोलियां भी चलने लगीं.

कब पहुंची पुलिस ?

स्याना गांव में इस भयानक हिंसा की खबर प्रशासन के किसी अधिकारी के पास नहीं थी. जब भीड़ पास में मौजूद चिंगरावठी चौकी पर आ धमकी तो वहां के इंस्पेक्टर सुबोध तुरन्त वहां पहुंचे और बवाल को शांत कराने का प्रयास करने लगे. तभी इंस्पेक्टर पर गुस्साए ग्रामीणों ने पत्थर बरसा दिए. भीड़ ने चौकी के बाहर खड़े पुलिस के वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया. चौकी के अंदर भी घुसकर खूब तोड़फोड़ की गई. आक्रोशित लोगों इंस्पेक्टर पर टूट पड़े और इंस्पेक्टर को मौत के घाट उतार दिया. पुलिस फिर भी उसके कुछ देर बाद ही पहुंची.

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सुमित नाम के युवक की मौत

वहीँ चिंगरावठी चौकी के सामने बस स्टाप पर सुमित नाम के युवक की भी गोली लगने से मौत हो गई. मृतक सुमित के परिवार वालों का कहना था कि सुमित ने अभी पुलिस भर्ती की परीक्षा दी है उसका सपना था की वो एक पुलिस वाला बन कर देश की सेवा करेगा. उस दिन सुमित का दोस्त उसके घर आया था शादी का कार्ड देने. नाश्ता करने के बाद सुमित अपने दोस्त को पास के बस स्टॉप पर छोड़ने गया था. तभी अचानक बवाल वहां तक पहुँच गया और उसे गोली लग गई. और तुरंत ही उसकी मौत हो गई.

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खुले ख़त में पूर्व नौकरशाहों की मांग-

इसी हिंसा को लेकर कार्यवाही में देरी के चलते पूर्व नौकरशाहों ने योगी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. योगी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए करीब 83 रिटायर्ड नौकरशाहों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस्तीफा देने को कहा है.

  • रिटायर्ड नौकरशाहों का साफ़ कहना है कि योगी आदित्यनाथ ने बुलंदशहर में भड़की हिंसा को गंभीरता से नहीं लिया.
  • योगी आदित्यनाथ सिर्फ गोकशी केस पर ही ध्यान देते आ रहे हैं उसके अलावा उनको कुछ नहीं दिख रहा है.
  • एक पुलिस वाले की भीड़ द्वारा हत्या किया जाना बहुत दर्दनाक है, इससे राज्य की कानून व्यवस्था पर कई तरह के सवाल खड़े होते हैं.
  • इलाहाबाद हाई कोर्ट को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए.
  • हिंसा से जुड़े सभी पहलू की जाँच होनी चाहिए.
  • बुलंदशहर हिंसा को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है.

योगी आदित्यनाथ का इस्तीफा मांगने वालों 83 रिटायर्ड नौकरशाहों में पूर्व अफसर बृजेश कुमार, अदिति मेहता, सुनील मित्रा जैसे बड़े अफसर शामिल हैं. हिंसा को लेकर अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

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