अब सरकारी नौकरी पाने के लिए करना होगा 5 साल का कठिन परिश्रम, पढ़ें नए नियम-

सरकारी नौकरी पाकर आराम से काम करने वालों को अब खतरा होने वाला है. योगी आदित्यनाथ सरकार अब इन कामचोरों के लिए ऐसे नियम ला रही है, जिससे कि कम से कम पांच वर्ष तक तो आराम करना भूल ही जायेंगे.

5 years of hard work will get new government job
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प्रस्तावित व्यवस्था में चयन के बाद शुरुआती पांच वर्ष तक कर्मियों को संविदा के आधार पर नियुक्त किया जाएगा. इस दौरान उन्हें नियमित सरकारी सेवकों को मिलने वाले अनुमन्य सेवा संबंधी लाभ नहीं मिलेंगे. पांच वर्ष की कठिन संविदा सेवा के दौरान जो छंटनी से बच पाएंगे उन्हें ही मौलिक नियुक्ति मिल सकेगी. मतलब साफ़ है कि अब सरकारी नौकरी पाकर कुर्सी पर बैठ के काम करने के बजाये सो जाने वाले कामचोरों को बहुत कठिनाई होने वाली है.

इन पांच वर्ष के दौरान भी हर वर्ष में छह-छह महीने में उनका मूल्यांकन होगा. उसमें भी हर बार 60 प्रतिशत अंक लाना यानी फर्स्ट डिवीजन में पास होगा बेहद जरूरी होगा. लिहाजा पांच वर्ष बाद उन्हीं कर्मचारी को नियमित सेवा में रखा जाएगा जिन्हेंं 60 प्रतिशत अंक मिलेंगे. इस प्रस्ताव पर विभागों से राय मशविरा शुरू कर दिया गया है. शासन का कार्मिक विभाग इस प्रस्ताव को कैबिनेट के समक्ष विचार के लिए लाने की तैयारी कर रहा है.

प्रस्तावित नियमावली सरकार के समस्त सरकारी विभागों के समूह ख व समूह ग के पदों पर लागू होगी. ये सेवाकाल में मृत सरकारी सेवकों के आश्रितों की भर्ती नियमावली, 1974 पर भी लागू होगी. इसके दायरे से केवल प्रादेशिक प्रशासनिक सेवा (कार्यकारी एवं न्यायिक शाखा) और प्रादेशिक पुलिस सेवा के पद ही बाहर होंगे. सभी विभागों से सुझाव लेने के बाद इसे कैबिनेट में लाया जा सकता है.

इतना ही नहीं संविदा पर नियुक्त व्यक्ति पर यूपी सरकारी सेवक अनुशासन एवं अपील नियमावली-1999 लागू नहीं होगी. संविदा पर नियुक्त व्यक्ति को शासकीय कार्य से यात्रा पर भेजे जाने पर ही यात्रा व अन्य भत्ते दिए जाएंगे.

सरकार की इस नई योजना के पीछे का तर्क ये है कि इस व्यवस्था से कर्मचारियों की दक्षता बढ़ेगी. इसके साथ ही नैतिकता देशभक्ति और कर्तव्यपरायणता के मूल्यों का विकास होगा. इतना ही नहीं सरकार पर वेतन का खर्च भी कम होगा.

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