MP में ढाई लाख पेड़ काटकर 50 करोड़ के हीरे खोदना क्या बुद्धिमानी का सौदा है ?

आपको याद होगा उन्नाव के डोंडिया खेड़ा में एक संत शोभन सरकार ने एक हजार टन सोने का खजाना होने का दावा किया था तब पूरी दुनिया की नजर उन्नाव जिले पर थी. ठीक उसी तरह अब बक्सवाहा का जंगल भी चर्चा में आ गया है. कहा जा रहा है कि बक्सवाहा की ज़मीन के नीचे बेशकीमती ख़ज़ाना छिपा है.

करीब दो लाख 15 हज़ार पेड़ काटे जाएंगे

ये मामला इतना बढ़ गया है कि अब टि्वटर पर ट्रेंड करने लगा #savebaxwahaforest. मध्यप्रदेश का ये बक्सवाहा जंगल एकदम से चर्चा में आ गया है. इस बेशकीमती खजाने को हासिल करने के लिए राज्य सरकार ने एक निजी कंपनी को बक्सवाहा के जंगल 50 साल के लिए लीज पर दे दिए हैं. देखा जाए तो हीरा खनन के लिए इस जंगल के करीब दो लाख 15 हज़ार पेड़ काटे जाएंगे. इसलिए इसका विरोध भी शुरू हो गया है. अब ये लड़ाई लंबी चलने वाली है. क्योंकि एक तरफ़ सरकार है और दूसरी तरफ जनता.

स्थानीय लोगों और ख़ासतौर पर युवा लोग अलग-अलग सोशल मीडिया माध्यमों के ज़रिये मुहिम छेड़कर बिरला समूह के इस प्रोजेक्ट को रोके जाने की अपील कर रहे हैं. इसके लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को चिट्ठी भी लिखी गई है. इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी एक पीआईएल दाखिल की गई है.

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क्या है मामला ? What is the matter ? कहाँ से हुई शुरुआत ? Where did it start ?

सरकार ने 20 साल पहले छतरपुर के बक्सवाहा में बंदर प्रोजेक्ट के तहत सर्वे शुरू किया था. जिसमें 3.42 करोड़ कैरेट हीरा मिलने का अनुमान जताया गया था. दो साल पहले मप्र सरकार ने इस जंगल की नीलामी की थी, जिसे आदित्य बिड़ला ग्रुल के एस्सेल माइनिंग एंड इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड ने खनन के लिए खरीदा था. लेकिन हीरा भंडार वाली 62.64 हेक्टेयर ज़मीन को मध्यप्रदेश सरकार ने इस कंपनी को 50 साल के लिए लीज पर दिया है. इस प्रोजेक्ट के तहत 62.64 हेक्टेयर ज़मीन में खनन किया जाना है

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आदित्य बिड़ला ग्रुप कंपनी ने 382.131 हेक्टेयर का जंगल मांगा है. कंपनी ने तर्क दिया है कि बाकी 205 हेक्टेयर जमीन का उपयोग खदानों से निकले मलबे को डंप करने में किया जाएगा. अब वन विभाग के मुताबिक इतने क्षेत्र में 215,875 पेड़ लगे हैं. चालीस हजार पेड़ कीमती सागौन के हैं, जिसकी एक पेड़ की कीमत 20 हज़ार या उससे ज़्यादा होती है. इन सभी पेड़ों को काटा जाना है.

क्या है इस जंगल की खासियत ? What is the specialty of this forest ?

देखा जाए तो जहां पर सबसे ज्यादा हीरा होने का दावा किया जा रहा है, वहां पर घना जंगल है और यहां नाले के दोनों ओर सागौन, अर्जुन, शीशम, जामुन, बेल, पीपल, तेंदू, बहेरा समेत अन्य औषधीय और जीवन उपयोगी पेड़ लगे हैं. इस बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में अर्जुन के करीब 10-12 हज़ार पेड़ हैं. वहीं मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यहां 382.131 हेक्टेयर जमीन में घना जंगल है. इस जंगल में कई विलुप्त प्रजाति के जानवर भी मिलते हैं. जंगल काटे जाने से जिनका जीवन ख़तरे में पड़ जाएगा.

इसी को देखते हुए लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि इस देश में पेड़ ज़रूरी हैं या हीरा ? इस प्रोजेक्ट को रोकने के लिए सोशल मीडिया पर #Save_Buxwaha_forest, #बक्सवाहाबचाओअभियान जैसे हैशटैग लगा कर सरकर के इस फैसले का विरोध शुरू हो गया है. आने वाले 5 जून पर्यावरण दिवस के अवसर पर देशभर से पर्यावरणविद इस प्रोजेक्ट का विरोध करने के लिए छतरपुर स्थित बक्सवाहा के जंगलों की ओर कूच करेंगे.

RTI एक्टिविस्ट ने बताई सच्चाई

मामला चर्चा में आने के बाद लगभग सभी लोगों का कहना है कि हम अपने इलाकों को तबाह नहीं होने देंगे. इसके साथ ही RTI एक्टिविस्ट अजय दुबे का कहना है कि जंगलों की जैव विविधता को नष्ट करने की जल्दबाजी आत्मघाती कदम है और इसे तुरंत रोकना चाहिए. उस समय मध्यप्रदेश की तत्कालीन कमलनाथ सरकार ने हीरों के लालच में बिड़ला समूह के लिए लाखों पेड़ और वन्य प्राणियों की बर्बादी का रास्ता खोला है. इसके साथ ही आम जनता को मिलने वाली ऑक्सीजन ख़त्म करना एक निंदनीय कार्य है.

अब प्रकृति की अमूल्य धरोहर को नष्ट होने से बचाने का शिवराज सरकार के पास मौका है. क्योंकि हम सभी जानते हैं कि केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट में लाखों पेड़ों के नष्ट होने के साथ पन्ना टाइगर रिजर्व का 40 फीसदी हिस्सा भी डूब जाएगा, जो भविष्य की पीढ़ियों के साथ विश्वासघात होगा.

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सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर

ये मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुँच गया है. दिल्ली की समाजसेविका नेहा सिंह ने 9 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है. जिसमें कहा गया है कि हीरों के लिए हम अपने जीनवदायी लाखों पेड़ों की बलि नहीं दे सकते हैं. लाखों पेड़ों के कटने से पर्यावरण को अपूर्णीय क्षति होगी, हम एक भी पेड़ नहीं कटने देंगे. याचिका में हीरा खनन के लिए आदित्य बिड़ला ग्रुप की दी गई लीज़ निरस्त करने की मांग की है.

पेड़ काटने से कितना होगा नुक्सान ?

याचिका में ये भी बताया गया है कि जंगल के जिस क्षेत्र में खनन की अनुमति दी गई है वो न्यूनजल क्षेत्र है, मतलब की यहां पानी की कमी है. ऐसे में कंपनी के काम के लिए बड़ी मात्रा में पानी का दोहन किया जाएगा, जिससे आसपास का जल स्तर प्रभावित हो जायेगा. लोगों को पानी की दिक्कत होगी, साथ ही वन्य प्राणी भी प्यासे मर जाएंगे. लिहाजा इस अनुबंध को निरस्त किया जाए.

वन विभाग और विधायक ने दी सफाई

वहीं स्थानीय विधायक प्रद्युम्न सिंह लोधी का कहना है कि इस प्रोजेक्ट में एक पेड़ काटने के बदले 15 पेड़ लगाए जाएंगे, सरकार को रॉयल्टी मिले इसके लिए ये ज़रूरी हैं. उधर वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हीरा खदान में जंगल काटने के बदले 382 हेक्टेयर राजस्व भूमि को वन भूमि में परिवर्तित किया जा रहा है. इस भूमि पर ही जंगल विकसित किया जाएगा, इसका पूरा खर्च खनन करने वाली कंपनी ही उठाएगी. इसके लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.

4 thoughts on “MP में ढाई लाख पेड़ काटकर 50 करोड़ के हीरे खोदना क्या बुद्धिमानी का सौदा है ?

  • May 23, 2021 at 12:40 am
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    Where did it start?
    ये सही sentence नहीं है।
    Where did it start from?
    ये सही sentence है।

    If you try for blogging then by giving such headings you may loose those readers who want to read your article in English, in future.

    Reply
    • May 23, 2021 at 1:37 am
      Permalink

      Sir Heading is question only thankyou for your comment

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    • May 24, 2021 at 12:01 am
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      Bhai. Naye. Ped. Lagaane. Ki. Gaarantee. Kaun. Lega. Bas. Naye. Pad. Lagaane. Ke. Naam. Par. Sarkaar. Se. Paisa. Lekar. Adikari. Apni. Jeb. Me. Rakh. Lenge. Aur. Kagaj. Me. Dikha. Denge. Ki. Sabhi. Ped. Lagane. Ke 2-4 varsh. Paschaat. Sookh. Gye. Aur. Prakriti. Ka. Ek. Hara. Bhara daaman. Ujaad. Ho. Jaayega. Sookh. Jaayega

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      • May 24, 2021 at 12:09 am
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        लेख पर आपकी बेशकीमती राय के लिए शुक्रिया..बेशकीमती इसलिए क्योंकि अपना ईमेल भरकर नाम भरकर..अगर आपने अपनी राय रखी है तो सारश्वत जी आप हमारे अमूल्य और सीरियस पाठक हैं. भविष्य में भी हमें आपकी राय आपके विचारों का इंतजार रहेगा..धन्यवाद..

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