गुजरात में भी 196 बच्चों की मौत, मीडिया के सवालों से बच कर भागे CM रूपाणी, देखें वीडियो-

राजस्थान में बच्चों की मौत का सिलसिला अभी थमा भी नहीं है कि गुजरात के राजकोट और अहमदाबाद से भी ऐसी ही ख़बरें सामने आ रही है. जहाँ 111 बच्चों की मौत हो गई है.

196 children died in rajkot civil hospital and ahmedabad hospital
196 children died in rajkot civil hospital and ahmedabad hospital

राजकोट सिविल अस्पताल के डीन मनीष मेहता ने बताया कि राजकोट सिविल अस्पताल में दिसंबर में 111 बच्चों की मौत हुई है. इस बीच, मीडिया ने जब गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी से राजकोट अस्पताल में शिशुओं की मौत पर सवाल पूछे तो उन्होंने कुछ भी कहने से इन्कार कर दिया और तुरंत निकल गए.

गुजरात के राजकोट और अहमदाबाद इन दो शहरों में अबतक 196 बच्चों की मौत हो चुकी है. दिसंबर महीने में राजकोट के सिविल अस्पताल में 111 और अहमदाबाद में 85 मासूम दम तोड़ चुके हैं. यहां बच्चों की मौत की वजह कुपोषण, जन्म से ही बीमार, वक्त से पहले जन्म, मां का खुद कुपोषित होना बताया जा रहा है. राजकोट के सिविल अस्पताल में मरने वाले सभी बच्चे नवजात थे.

अस्पताल के एनआईसीयू में ढाई किलो से कम वजन वाले बच्चों को बचाने की व्यवस्थाएं और क्षमता ही नहीं है. वीडियो में आप देख सकते हैं की जब मीडिया ने सीएम से सवाल पूछे तो कैसे वे वहां से भाग निकले. बतादें कि राजकोट सिविल अस्पताल में एक साल में 1235 बच्चों की मौत हो चुकी है.

बतादें कि राजस्थान के कोटा में अबतक 110 बच्चों की मौत हो चुकी है. और अब सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर में भी दिसंबर में आइसीयू में 162 बच्चों की मौत की खबर है. बूंदी में 10 मासूम जिंदगी की जंग हार चुके हैं. वहीँ जोधपुर में भी 164 बच्चों की मौत की खबर आ रही है. जोधपुर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह जिला है. मेडिकल कॉलेज के अधिकारी इन मौतों को सामान्य बता रहे हैं.

बच्चों की मौत का कारण-

आपको बतादें कि प्रसव के बाद नवजात को जिंदा रखने के लिए 36.5 से 37.5 डिग्री तापमान होना जरूरी है. इससे कम तापमान में हाइपोथर्मिया का खतरा रहता है, जो बच्चों के लिए जानलेवा होता है. फिलहाल कोटा का तापमान 4 डिग्री तक पहुंच चुका है. विशेषज्ञ भी मानते हैं कि नवजात जैसे ही मां के गर्भ से बाहर आता है तो उसे तुरंत उसका तापमान मेंटेन करना बुनियादी जरूरत होती है. कारण नवजात 37 डिग्री तापमान वाले मां के गर्भ से सीधे 4 डिग्री तापमान में आता है. इससे उसके दिमाग को नुकसान हो सकता है.

नवजातों में 3 तरह की समस्याएं-

हाइपोथर्मिया : ये बच्चे में तापमान की कमी से होती है, जिसे ट्रांसपोर्ट इंक्यूबेटर या कंगारू मदर केयर से मेंटेन किया जा सकता है.
हाइपोग्लाइसीमिया : ग्लूकोज की कमी से होती है. बच्चे को दूध पिलाते हुए लाएं. अगर दूध नहीं है तो 10% ग्लूकोज फीड कराएं.
हाइपोक्सिया : ऑक्सीजन की कमी. ट्रांसपोर्टेशन के दौरान ऑक्सीजन का इंतजाम होना चाहिए, तभी बचाया जा सकता है.

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