ट्रेन से कट कर 16 प्रवासी मजदूरों की मौत, पैदल घर के लिए निकले, थककर पटरी पर सो गए

महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में प्रवासी मजदूरों के साथ एक बड़ा हादसा हो गया है. एक मालगाड़ी की चपेट में आने के बाद 16 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई है. सभी मजदूर मध्य प्रदेश जा रहे थे.

16 migrant workers mowed down by goods train in maharashtras
16 migrant workers mowed down by goods train in maharashtras

हादसा औरंगाबाद में करमाड स्टेशन के पास हुआ. ये घटना उस वक्त हुई, जब मजदूर रेलवे ट्रैक पर सो रहे थे. दरअसल वे रेल की पटरियों के किनारे चल रहे थे और थकान के कारण पटरियों पर ही सो गए थे. कर्माड पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया कि ट्रेन सुबह सवा पांच बजे पटरी पर आ गई और उन्हें रौंदते हुए निकल गई. 5 घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. मजदूर जालना की एसआरजे स्टील फैक्ट्री में काम करते थे.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी घटना पर दुख जताया है. उन्होंने कहा कि रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल से बात हुई है. वो स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं. आवश्यक हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है.

मृतक प्रवासी मजदूरों के परिवारों के लिए महाराष्ट्र सरकार ने राहत राशि देने की घोषणा की है. सीएम उद्धव ठाकरे ने मृतकों के परिवारों को 5 लाख रुपये की मदद का एलान किया है. जिन लोगों पर ट्रेन गुजरी है वो सभी प्रवासी मजदूर थे. गृह मंत्री अमित शाह ने भी प्रभावित परिवारों को संत्वना दी है.

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए कहा, महाराष्ट्र का औरंगाबाद रेल हादसा अत्यंत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है. जिन परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है मेरी संवेदनाएं उनके साथ हैं. मैं घायलों के जल्द से जल्द ठीक होने की कामना करता हूं.

यहाँ एक सवाल खड़ा हो रहा है कि जब सरकार ने प्रवासी मजदूरों की सहायता के लिए इतने इंतज़ाम कर रखे हैं तो फिर मजदूर पैदल ही अपने घर क्यों निकल रहे हैं ? क्या सरकार सिर्फ खानापूर्ति कर रही है ?

सभी जिले से एक ऑनलाइन फॉर्म जारी हुआ है जिसे भरना है ताकि सरकार को पता चले की आप प्रवासी मजदूर, या छात्र हो जो यहाँ फंसे हुए हो, लेकिन प्रवासी मजदूरों को पढ़ना लिखना कहाँ आता है जो वे फॉर्म भर सकें, ऐसे में उनकी मदद कौन करेगा ?

अगर सरकार सर्वे कर रही है तो आखिर कैसे ? मजदूरों को क्यों पैदल सफर करना पड़ रहा है ? ऐसे बहुत से सवाल हैं. आखिर हर मुसीबत में गरीबों को ही क्यों बलिदान देना होता है.