राजस्थान: क्यों हो रही है नवजात बच्चों की मौत, आख़िर क्या है इसका कारण ?, पढ़ें-

राजस्थान में कोटा के जेके लोन अस्पताल में बच्चों की मौत का सिलसिला लगातार जारी है. जिसके बाद अब राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर सवाल उठने लगे हैं और सियासत भी गर्मा गई है.

103 child deaths in kota Rajasthan
103 child deaths in kota Rajasthan

एक महीने के अंदर बच्चों की मौत का आंकड़ा 103 तक पहुंच गया है. इस बड़ी लापरवाही के बाद अब मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बुरी तरह से घिर गए हैं. पूरे साल 2019 की बात करें तो यहां 963 बच्चों ने दम ताेड़ा है. वहीं 2018 में 1005 शिशुओं की मौत हुई थी.

बच्चों की मौत का कारण-

आपको बतादें कि प्रसव के बाद नवजात को जिंदा रखने के लिए 36.5 से 37.5 डिग्री तापमान होना जरूरी है. इससे कम तापमान में हाइपोथर्मिया का खतरा रहता है, जो बच्चों के लिए जानलेवा होता है. फिलहाल कोटा का तापमान 4 डिग्री तक पहुंच चुका है. विशेषज्ञ भी मानते हैं कि नवजात जैसे ही मां के गर्भ से बाहर आता है तो उसे तुरंत उसका तापमान मेंटेन करना बुनियादी जरूरत होती है. कारण नवजात 37 डिग्री तापमान वाले मां के गर्भ से सीधे 4 डिग्री तापमान में आता है. इससे उसके दिमाग को नुकसान हो सकता है.

नवजातों में 3 तरह की समस्याएं-

हाइपोथर्मिया : ये बच्चे में तापमान की कमी से होती है, जिसे ट्रांसपोर्ट इंक्यूबेटर या कंगारू मदर केयर से मेंटेन किया जा सकता है.
हाइपोग्लाइसीमिया : ग्लूकोज की कमी से होती है. बच्चे को दूध पिलाते हुए लाएं. अगर दूध नहीं है तो 10% ग्लूकोज फीड कराएं.
हाइपोक्सिया : ऑक्सीजन की कमी. ट्रांसपोर्टेशन के दौरान ऑक्सीजन का इंतजाम होना चाहिए, तभी बचाया जा सकता है.

चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा का कहना है कि यहां बच्चों की मौतों की संख्या में लगातार कमी आ रही है. ऑक्सीजन पाइप लाइन नहीं होना और ठंड बच्चों की मौत का कारण है. अब तक सिलेंडरों से ऑक्सीजन पहुंचाया जाता था जिससे इंफेक्शन का खतरा हमेशा रहता था. लेकिन अब पाइन लाइन बिछाने का काम शुरू किया जा रहा है. स्टाफ में बढ़ोतरी करने के साथ ही अन्य आवश्यक प्रबंध किए गए हैं. उन्होंने बताया कि अधिकतर शिशुओं की मौत जन्म के समय कम वजन के कारण हुई है.

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