बीजेपी ने खेला सियासी दांव, सवर्णों को दिया ’10 प्रतिशत’ आरक्षण

मोदी सरकार ने 2019 से पहले बहुत बड़ा फैसला किया है. सवर्णों के लिए मोदी कैबिनेट ने 10 फीसदी का आरक्षण मंजूर कर दिया है. बीजेपी के इस मस्टर स्ट्रोक ने विरोधियों में खलबली मचा दी है. सवर्ण आरक्षण को लेकर बीजेपी से नाराज थे. अब सवर्णों को आर्थिक आधार पर आरक्षण मिलेगा.

इसका प्ररूप क्या होगा. क्या ओबीसी और दलितों के कोटे से सवर्णों के लिए 10 प्रतिशत काटा जाएगा या अलग से कोटा फिक्स किया जाएगा. आइये समझते हैं-

Reservation of '10 percent' sawarn
Reservation of ’10 percent’ sawarn
जातियों का गणित समझिए

यूपी में 18 प्रतिशत सवर्ण
14 प्रतिशत ब्राह्मण हैं
4 प्रतिशत ठाकुर हैं
21 प्रतिशत दलित आबादी है
18 प्रतिशत मुस्लिम हैं
39 प्रतिशत के लगभग पिछड़े हैं
जिसमें यादव 12 प्रतिशत हैं
कुर्मी, सैथवार आठ प्रतिशत
जाट पांच प्रतिशत
मल्लाह चार प्रतिशत
विश्वकर्मा दो प्रतिशत
अन्य पिछड़ी जातियों की तादाद 7 प्रतिशत है

मोदी सरकार के सवर्णों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के ऐलान के बाद अब संविधान में संशोधन करना जरूरी हो गया. जिस तरह से चुनाव से ठीक पहले बीजेपी ने सवर्णों को आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया उससे लगता है कि मामला कोर्ट में जा सकता है.

50 फीसदी आरक्षण संविधान में दलितों और पिछड़ों के लिए है. वो वही रहेगा उसमे कोई बदलाव या उनका कोटा काटा नहीं जायेगा. सवर्णों को 10% आरक्षण अलग से दिया जायेगा. संविधान में पहले से 50% का ही आरक्षण दलितों और पिछड़ों के लिए है अब सवर्णों का मिला कर ये 60% हो जायेगा. सरकार के लिए अब कल तक का ही समय है. सरकार को जल्द ही इसमें संसोधन करना होगा.

साढ़े चार तक स्किल इंडिया, ये इंडिया वो इंडिया करने के बाद बीजेपी को आरक्षण पॉलिटिक्स पर ही उतरना पड़ा है. सवाल सरकार पर भी खड़े होते हैं. देश को आगे बढ़ाने की जगह आरक्षण खत्म करने की जगह सबको एक बराबर करने की जगह बीजेपी ने भी अपने मजबूत सवर्ण वोट बैंक के आगे आरक्षण का दाना डाल दिया है.

लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार का ये बड़ा सियासी दांव हो सकता है. ताकि ज्यादा से ज्यादा वोट बीजेपी के खाते में आ सकें. ये आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को दिया जाएगा. मोदी सरकार सवर्णों का ये आरक्षण आर्थिक आधार पर ला रही है, लेकिन संविधान में अभी इसकी कोई व्यवस्था नहीं है.

नहीं मिलता था कोई आरक्षण

सवर्णों को अभी तक कोई आरक्षण नहीं दिया जाता था. कई छोटे बड़े दल भी सवर्णों के लिए आरक्षण की मांग कर चुके हैं. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतनराम मांझी पहले से ही आर्थिक आधार पर सवर्णों को 15 प्रतिशत आरक्षण देने की मांग की थी. आपको याद हो की सवर्णों ने आरक्षण के लिए 1 दिन का भारत बंद भी किया था.

कल ही लाना होगा विधेयक

अब सवर्ण को नौकरी के लिए 10% का आरक्षण मिल जायेगा. कल ही बीजेपी इसको लागू करने के लिए संविधान संसोधन विधेयक ला सकती है. बड़ी बात ये है की सरकार के पास सिर्फ कल तक का ही समय है. कल से शीतकालीन सत्र समाप्त हो रहा है. इसके लिए संविधान के अनुच्छेद 15 और अनुच्छेद 16 में बदलाव किया जाएगा. दोनों अनुच्छेद में बदलाव कर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का रास्ता साफ हो जाएगा.