इस एक कारण से देश भर में हर साल हो रही है 1.5 करोड़ महिलाओं की मौत, यूपी सबसे आगे, देखें-

दुनिया में हर मिनट लाखों लोगों की मौत होती है. और लाखों बच्चे जन्म भी लेते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक गलत कदम से पूरे देश भर में करोड़ों महिलाओं की मौत हो जाती है.

1.5 crore women deaths every year due to unsafe abortion
1.5 crore women deaths every year due to unsafe abortion

ये बिलकुल सच है. भारत में हर साल 1.5 करोड़ महिलाओं की मौत हो जाती है. जिसका सबसे बड़ा कारण है असुरक्षित गर्भपात. और सबसे बड़ी बात ये है कि इसमें से 30 लाख महिलाओं की मौत तो सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही होती हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसके पीछे क्या कारण है जो इतनी बड़ी संख्या में महिलाओं की मौत हो रही है.

इसका सबसे बड़ा कारण है जानकारी का अभाव और सामाजिक बंदिशें. महानिदेशक परिवार कल्याण डॉ. बद्री विशाल ने कहा, सिर्फ 15-16 फीसदी महिलाओं का ही सुरक्षित गर्भपात हो पाता है. इसके लिए हमें दंपतियों को परिवार नियोजन से जोड़ने की जरूरत है. क्योंकि गर्भवती सरकारी अस्पताल जाने में संकोच करती हैं.

बतादें कि मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी)ऐक्ट के तहत महिलाओं को गर्भपात का अधिकार है. बावजूद इसके 10 प्रतिशत महिलाएं हीं सुरक्षित गर्भपात करवा रही हैं. इसका एक कारण ये भी है कि एक सभ्य संस्कृति और समाज के नाते हम गर्भपात के बारे में खुलकर बात नहीं करते हैं. इसलिए जब भी कोई औरत अपना गर्भ गिराना चाहती है तो अक्सर उसे ये तक पता नहीं होता है कि वो इस बारे में किससे बात करे.

ऐसा भी होता है कि अनेक क्षेत्रों में लोगों को अच्छे गर्भनिरोधक नहीं मिल पाते हैं, जिससे अनचाहे गर्भ के मामले बढ़ने लगते हैं. गर्भपात की गोलियां भी प्रभावी हो सकती हैं, अगर उन्हें सही तरीके से लिया जाए. कई महिलाओं को इसका सही तरीका मालूम नहीं होता है, जो उनके स्वास्थ्य के लिए घातक भी हो सकता है. कुछ प्रतिशत महिलाओं को ही गर्भपात की सही गोलियों का पता है.

ऐसे में बाकी महिलाओं को भी इस बारे में सही जानकारी देने की जरूरत है ताकि वे इन गोलियों का उपयोग कर सकें और समस्या होने पर किसी अच्छे स्वास्थ्य देखभाल केंद्र तक पहुंच सकें. अगर गर्भवती महिलाये संकोच छोड़कर सरकारी अस्पताल पहुंच जाएं तो असुरक्षित गर्भपात से उसकी जान जोखिम में नहीं पड़ेगी. इसमें महिलाओं को बिलकुल भी घबराने की जरुरत नहीं है क्युकी मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेगनेंसी (एमटीपी) एक्ट के तहत गर्भपात से संबंधित जानकारी किसी से भी साझा नहीं की जाती है.

गर्भपात कराना महिला का हक है लेकिन इसके लिए समय सीमा 49 दिन या सवा दो महीने की समय सीमा तय है. इस समय सीमा का ही ध्यान नहीं रखा जाता है. जिससे महिलाओं को खतरा बढ़ जाता है जिसमें उनकी मौत भी हो जाती है. ऐसे में महिलाओं को सुरक्षित गर्भपात के बारे में जानकारी देना जरूरी है.

बतादें कि दुनियाभर में हर साल अनुमानित 5.6 करोड़ गर्भपात असुरक्षित तरीके से होते हैं. जिसमें कुछ की ही जान बच पाती है.

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