समय के साथ बढ़ता गया बीजेपी का ग्राफ बिहार विधानसभा चुनाव में लगा देगी पूरी ताकत

बिहार में भारतीय जनता पार्टी भले ही समय के साथ अपना जनाधिकार बढ़ाती चली गई। लेकिन अब तक बिजेपी का कोई नेता बिहार में सत्ता के शीर्ष तक पहुंच नहीं सका। इस बात का सबसे प्रमुख कारण माना जाता है. कि भारतीय जनता पार्टी अब तक कभी भी राज्य में बड़ी पार्टी बनकर सामने नहीं आई।

इस बार भी भारतीय जनता पार्टी ने नीतिश कुमार के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ने की घोषणा की है। जबकि इस बार बीजेपी ने एक बड़ी पार्टी के रुप में समाने आने को लेकर अपनी पूरी ताकत लगा दी है।

साल 1962 में सिर्फ तीन विधायक वाली भारतीय जनता पार्टी के पास आज 53 विधायक हैं। अगर पिछले विधानसभा चुनाव की बात करें। तो उस चुनाव में बीजेपी ने 24.42 प्रतिशत वोट प्राप्त किए थे।

जो अब तक के चुनावी राजनीति में भारतीय जनता पार्टी का सबसे अधिक मत था। इस बात से इन्कार नहीं किया जाता कि बीजेपी का सियासी ग्राफ प्रत्येक चुनाव में बढ़ता ही गया है।

भारतीय जनता पार्टी हमेशा से ही विकास की राजनीति पर काम करती रही है। जबकि बिहार कि राजनीति जातीय ध्रुव के इर्द-गिर्द घूमती रही है। जी हां इसी कारण से मतदाताओं ने बीजेपी पार्टी को पसंद किया।

बीजेपी ने कलांतर में अविभाजित बिहार में कांग्रेस के मजबूत माने जाने वाले आदिवासियों के वोट बैंक में सेंध लगा दी और इन इलाकों में बीजेपी की जमीन मजबूत होती गई.

बीजेपी ने कलांतर में अविभाजित बिहार में कांग्रेस के मजबूत माने जाने वाले आदिवासियों के वोट बैंक में भारतीय जनता पार्टी ने सेंध लगा दी और इन इलाकों में भारतीय जनता पार्टी की जमीन मजबूत होती गई.

जनसंघ ने वर्ष 1967 में 272 सीटों पर उम्मीदवार उतारे और 26 सीटों पर जीत दर्ज की. इसमें अधिकांश सीटें आदिवासी क्षेत्रों की ही रही थी. 1969 में 34 सीटें जीती परंतु वर्ष 1972 में हुए विधानसभा चुनाव में 25 सीटों पर ही इस पार्टी के उम्मीदवार विजयी हो सके.

इस समय भारतीय जनता पार्टी एक संघ के रुप में जानी जाती है। लेकिन गैर कांग्रेसी दलों के बड़े राजनीतिक प्रयोग के तौर पर भारतीय जनता पार्टी विफल रही और 1980 में बीजेपी फिर एक बार अस्तित्व में आई। भारतीय जनता पार्टी ने 1980 में हूए चुनाव में 21 सीटों पर अपना झंडा लहराया। लेकिन उसके अगले ही चुनाव में बीजेपी केवल 16 सीटें ही जीत सकीं।

बिहार में समता पार्टी के साथ मिलकर भारतीय जनता पार्टी ने सन् 2000 के चुनाव में 67 सीटें अपने खाते में कर लीं थी. इस दौरान बिहार विभाजन ने बीजेपी के 32 विधायकों को झारखंड भेज दिया. जिससे बीजेपी को झारखंड में लाभ हुआ। लेकिन बिहार में नुकसान भी हुआ. बीजेपी के पास बिहार में सिर्फ 35 विधायक ही रह गए.

झारखंड के अलग होने के बाद फरवरी 2005 में बीजेपी ने जनता दल (युनाइटेड) के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और 37 सीटों पर तथा अक्टूबर में हुए चुनाव में 55 सीटों पर जीत दर्ज कर ही ली. इस जीत के कारण बीजेपी सत्ता में भी भागीदार बना गई. सीटों के बढ़ने का यह सिलसिला 2010 में भी लगातार जारी रहा और बीजेपी ने 102 सीटों पर चुनाव लड़कर 91 सीटें अपने खाते में दर्ज कर लीं.

पिछले चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जदयू से गठबंधन टूट गया और उस चुनाव में बीजेपी ने लोजपा और अन्य दलों से गठबंधन कर 53 सीटों पर अपना परचम लहराया. बीजेपी के प्रवक्ता निखिल आनंद कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी इस चुनाव में भी सबसे अधिक मतों के साथ सत्ता में आयेगी. उन्होंने कहा कि बीजेपी आज बिहार की सबसे पसंदीदा पार्टी बन चुकी है.

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