संसद में पारित हुए कृषि बिल को ना मानने को लेकर किसानों का विरोध-प्रदर्शन

संसद में हाल ही में पास हुए 3 कृषि विधेयकों का विरोध करते हुए किसान संगठन ने आंदोलन करने का आवाहन किया है। आंदोलन का सबसे ज्यादा असर पंजाब और हरियाणा में दिख रहा है। पंजाब के किसान जो कई दिनों से सड़क पर प्रदर्शन कर रहे थे, अब वो बेचारे किसान रेलवे ट्रैक पर बैठ गए है।

उत्तर प्रदेश के किसान जहां कर्फ्यू और जाम का आवाहन कर रहे हैं, वहीं हरियाण के किसान-आढ़तियों ने राजमार्ग जाम करने कि चेतावनी दी है। पंजाब के किसान ने रेल रोको प्रदर्शन शुरु किया है। जिसमें किसान यूनियन के लोग अलग-अलग रेलवे ट्रैक के हिस्से में बैठ गए हैं।

वहीं हरियाणा के सभी हाई-वे पर भारी मात्रा में पुलिस बल तैनात है। और जो किसान यूनियन रेलवे ट्रैक पर प्रदर्शन करने कि बात कर रहें हैं उन्हें हाईवे पर ही रोका जा रहा है, क्योंकि डीजीपी ने सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया है कि अगर किसान भीड़ इकट्ठा करते हैं या किसी भी तरह का प्रदर्शन करते हैं तो उन्हें रोका जाए।

मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारी किसानों से अपील की आंदोलन के दौरान कानून व्यवस्था का उल्लंघन बिल्कुल नहीं होना चाहिए। किसानों के बढ़ते विरोध-प्रदर्शन से ये तो पता चलता है कि संसद में बिल भले ही पारित हो गए हों। लेकिन किसान उन्हें स्वीकार करने के मूड में बिल्कुल नहीं दिखाई दे रहें हैं। क्योंकि बेचारे किसानों को यह चिंता सता रही है कि कहीं मंडी के बारह ही खरीद शुरु हो गई तो उन्हें किसानों के समर्थन मूल्य से हाथ धोना पड़ सकता है।

किसानों का कहना है कि सरकार हम किसानों से बात ही नहीं करना चाहती है। अगर हम इन कानून को स्वीकार नहीं करते हैं तो उसे जमीन पर लागू नहीं किया जा सकता है। किसानों का कहना है कि हम लड़ते रहेगें चाहे इसमें जितना भी समय लग जाए। सरकार इस भ्रम में बिल्कुल भी ना रहे कि किसान इस कानून को स्वीकार कर लेंगें।

यहां तक किसानों ने चेतावनी दे दी है। संसद में जो बिल पारित किए गए हैं उन्हें वापस लिया जाए वरना उनका आंदोलन और तेज होगा। किसानों के आंदोलन को देखते हुए रेलवे ने 24 से 26 सितंबर तक रेलवे परिचालन रद्द कर दिया है।

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